फ्रांस के शहरों में भड़का युवा आक्रोश: पुलिस ने दागे आंसू गैस के गोले
फ्रांस के पेरिस और लियोन समेत यूरोप के कई प्रमुख शहरों में महंगाई और शिक्षा व्यवस्था में कमियों के खिलाफ युवाओं का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा. प्रदर्शन के दौरान आगजनी, पथराव और हिंसक झड़पों के बाद पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और सैकड़ों प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार कर लिया.
नई दिल्ली । डेस्क: पेरिस और लियोन में जीवन-यापन की बढ़ती लागत और देश के स्कूलों की बदतर स्थिति को लेकर सड़कों पर उतरे युवाओं पर पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े हैं. शनिवार को हुई यह रैली फ्रांस में प्रदर्शनों का लगातार तीसरा सप्ताहांत थी. युवाओं के संगठनों और यूनियनों के गठबंधन का दावा है कि इन प्रदर्शनों में लगभग पांच लाख लोगों ने भाग लिया, जिसमें केवल पेरिस में दो लाख लोग शामिल थे. वहीं दूसरी ओर, अधिकारियों ने देशव्यापी उपस्थिति 3,20,000 बताई है, जिसमें राजधानी के 70,000 लोग शामिल हैं.
शांतिपूर्ण शुरुआत के बाद हिंसा में बदला मुख्य मार्च
राजधानी में मार्च की शुरुआत शांतिपूर्वक हुई थी, लेकिन जैसे ही प्रदर्शनकारी उस स्थान के पास पहुंचे जहां मुख्य मार्च समाप्त होना था, माहौल हिंसक हो गया. डस्टबिन और सड़क के सामानों में आग लगा दी गई, जिससे शहर के ऊपर धुएं का गुबार उठता देखा गया. पेरिस से रिपोर्ट करते हुए अल जजीरा की नताशा बटलर ने बताया कि पुलिस इस भीड़ पर काफी आंसू गैस छोड़ रही है और उनकी टीम को वहां से हटना पड़ा क्योंकि सांस लेना मुश्किल हो गया था.
दंगारोधी पुलिस ने लाउडस्पीकर से चेतावनी दी कि यदि सड़क खाली नहीं की गई तो वे और आंसू गैस छोड़ेंगे. इस दौरान घायलों को ले जाया गया, जबकि कुछ प्रदर्शनकारियों ने यह दिखाने के लिए अपने हाथ उठाए कि उनका इरादा नुकसान पहुंचाना नहीं है.
पेरिस के बाहरी इलाकों में काले कपड़ों में चेहरे ढके दर्जनों लोगों ने हथौड़ों से पत्थर उखाड़कर पुलिस पर फेंके और सुरक्षा बलों पर कम से कम एक ज्वलनशील पदार्थ भी फेंका, जिसके जवाब में आंसू गैस और लाठीचार्ज किया गया. फ्रांस के गृह मंत्रालय के अनुसार देश भर में अब तक कम से कम 290 लोगों को गिरफ्तार किया गया है.
फ्रांस के अलावा यूरोप के अन्य शहरों में भी प्रदर्शन देखने को मिले हैं. शनिवार को जर्मनी में हजारों युवा इस विरोध में शामिल हुए, जहां कोलोन में पुलिस ने बढ़ती लागत, शिक्षा में कटौती और सैन्य भर्ती की योजनाओं का विरोध कर रही बड़ी भीड़ को तितर-बितर करने के लिए वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया.
सरकार से भरोसा उठने का प्रदर्शनकारियों का दावा
अधिकांश प्रदर्शनकारियों ने हिंसा की निंदा की, लेकिन कई लोगों ने उनकी बात न सुनने के लिए सरकार को दोषी ठहराया. बटलर ने कहा कि पिछले कुछ हफ्तों में बार-बार सड़कों पर उतरने वाले लोगों में यह भावना है कि वे अब सरकार पर विश्वास नहीं करते और भरोसा खत्म हो चुका है.
हालांकि, सरकार का कहना है कि उसने प्रदर्शनकारियों की बात सुनी है. प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू ने इस सप्ताह छात्र यूनियनों के साथ कई बैठकें की हैं और वे जीवन यापन की लागत को आसान बनाने के उपायों पर विचार कर रहे हैं. पूरे देश में लगभग 70,000 पुलिस और जेंडरम्स तैनात किए गए थे, जबकि गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज ने विशेष रूप से हैलोवीन पर अंधेरा होने के बाद भारी उपद्रव का जोखिम जताया था.
अंतिम समय में कानूनी लड़ाई के बाद मुख्य पेरिस मार्च को शहर के पूर्वी छोर पर स्थानांतरित कर दिया गया था, और चैंप्स-एलिसीज के आसपास बिना अभिभावक वाले नाबालिगों के लिए रात 9 बजे से कर्फ्यू लागू किया गया था. यह आंदोलन पिछले महीने हाई स्कूल के छात्रों द्वारा उपेक्षित इमारतों, शिक्षकों की कमी और विश्वविद्यालय प्रवेश प्रणाली के खिलाफ शुरू हुआ था, जिसे बाद में श्रमिक यूनियनों का भी समर्थन मिला. 17 अक्टूबर को हुए प्रदर्शनों में 5,00,000 से अधिक लोग शामिल हुए थे, जो फ्रांस के सबसे बुरे दंगों में से एक बन गया था.
यूरोप के अन्य देशों तक फैली विरोध की आग
फ्रांस के अलावा यूरोप के अन्य शहरों में भी प्रदर्शन देखने को मिले हैं. शनिवार को जर्मनी में हजारों युवा इस विरोध में शामिल हुए, जहां कोलोन में पुलिस ने बढ़ती लागत, शिक्षा में कटौती और सैन्य भर्ती की योजनाओं का विरोध कर रही बड़ी भीड़ को तितर-बितर करने के लिए वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया. आयोजकों का कहना है कि 30 से अधिक शहरों में 1,70,000 लोगों ने प्रदर्शनों के लिए पंजीकरण कराया था. उधर, स्पेन के बार्सिलोना में 24 अक्टूबर को हुए दंगों और लगभग 130 नाबालिगों की गिरफ्तारी के बाद क्षेत्रीय पुलिस को उच्चतम अलर्ट पर रखा गया है, जबकि इटली के मिलान, ट्यूरिन और बोलोग्ना में हुई झड़पों के बाद वहां की पुलिस भी सतर्क है.