कांगो में इबोला का प्रकोप: मौतों का आंकड़ा 5,026, अन्य अफ्रीकी देशों में भी फैला वायरस
कांगो में बंडीबुग्यो इबोला वायरस से मरने वालों की संख्या 5,000 के पार पहुँच गई है. हिंसा, स्वास्थ्यकर्मियों की हड़ताल और अज्ञात संक्रमण श्रृंखलाओं के बीच यह घातक बीमारी अब केन्या और नाइजीरिया जैसे अन्य अफ्रीकी देशों में भी पैर पसार रही है.
नई दिल्ली । डेस्क: डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआरसी) में घातक इबोला प्रकोप के कारण स्थिति बेहद गंभीर हो गई है. देश के स्वास्थ्य मंत्रालय के ताजा सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस बीमारी से मरने वालों की संख्या 5,026 तक पहुंच गई है. कुल 10,351 संक्रमितों के साथ इस बीमारी की मृत्यु दर लगभग 50 प्रतिशत दर्ज की गई है. मई के मध्य में शुरू हुआ बंडीबुग्यो वायरस का यह प्रकोप अब इतिहास का दूसरा सबसे घातक इबोला प्रकोप बन चुका है. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसे अत्यधिक विनाशकारी बताते हुए गहरी चिंता व्यक्त की है.
पूर्वी कांगो बना संक्रमण का मुख्य केंद्र
संक्रमण का सबसे भयानक असर देश के पूर्वी हिस्से में देखा जा रहा है. कुल 26 में से 8 प्रांतों के 67 स्वास्थ्य क्षेत्र इस बीमारी से प्रभावित हुए हैं, जिनमें से 50 क्षेत्रों में सक्रिय मामले मौजूद हैं. खासतौर पर इटुरी और उत्तरी किवू इस प्रकोप के प्रमुख केंद्र बनकर उभरे हैं, जहाँ अकेले 9,782 मामले और 4,792 मौतें दर्ज की गई हैं. वायरस के प्रसार को रोकने के लिए कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग और टेस्टिंग में काफी मुश्किलें आ रही हैं. अफ्रीका सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के मुताबिक, लगभग 80 प्रतिशत नए मामले अज्ञात संक्रमण श्रृंखलाओं से सामने आ रहे हैं.
देश के स्वास्थ्य मंत्रालय के ताजा सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस बीमारी से मरने वालों की संख्या 5,026 तक पहुंच गई है. कुल 10,351 संक्रमितों के साथ इस बीमारी की मृत्यु दर लगभग 50 प्रतिशत दर्ज की गई है.
सशस्त्र संघर्ष और हिंसा से राहत कार्यों में बाधा
संक्रमण से निपटने की कोशिशों को क्षेत्र में जारी हिंसक संघर्ष और जन-अविश्वास से भारी झटका लगा है. पूर्वी क्षेत्र में सरकारी सेना, रवांडा समर्थित M23 विद्रोही समूह और Allied Democratic Forces जैसे उग्रवादी संगठनों के कारण स्वास्थ्यकर्मियों की पहुँच सीमित हो गई है. इसके अलावा, स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और सुविधाओं पर लगातार हमले हो रहे हैं. हाल ही में एक अलर्ट का जवाब देते समय एक नर्स की हत्या कर दी गई, जबकि स्वास्थ्य उपायों का समर्थन करने वाले एक राजनीतिज्ञ की भी जान ले ली गई.
बकाया वेतन को लेकर स्वास्थ्यकर्मियों की हड़ताल
संक्रमण के बीच स्वास्थ्य सेवाओं का संकट और गहरा गया है क्योंकि वेतन न मिलने के कारण स्वास्थ्यकर्मी बार-बार काम बंद कर रहे हैं. इटुरी के चोमिया स्थित इबोला उपचार केंद्र में चार महीने से बकाया वेतन की मांग को लेकर कर्मचारियों ने हड़ताल कर दी है. बेनी जैसे इलाकों में भी ईंधन और वित्तीय संसाधनों की कमी से स्थिति बिगड़ रही है. इस बंडीबुग्यो वायरस का कोई स्वीकृत टीका या विशिष्ट इलाज मौजूद नहीं है, और मरीजों का उपचार केवल उनके लक्षणों के आधार पर किया जा रहा है.
सीमा पार अन्य देशों तक पहुँचा संक्रमण
इबोला का यह प्रकोप अब केवल कांगो तक सीमित नहीं रहा है और अन्य अफ्रीकी देशों में भी इसके मामले दर्ज किए गए हैं. अक्टूबर महीने में केन्या और नाइजीरिया में संक्रमण की पुष्टि हुई है. केन्या में 8 मामलों के साथ 2 मौतों की पुष्टि हुई है, जबकि नाइजीरिया के इकलौते मरीज को इलाज के लिए स्विट्जरलैंड ले जाया गया. इससे पहले गर्मियों के दौरान युगांडा में भी कई मामलों की पुष्टि की जा चुकी है.