मॉक संसद: संबित पात्रा बोले- राहुल गांधी को उसी पुराने ढांचे का मॉक प्रधानमंत्री बना दें
विपक्ष की ओर से आयोजित मॉक संसद सत्र पर प्रतिक्रिया देते हुए बीजेपी सांसद संबित पात्रा ने कहा कि अगर विपक्षी एजेंटों ने सही से काम किया होता तो ऐसी स्थिति न आती. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि देश में किसी का वोट चोरी नहीं हुआ है.
नई दिल्ली । डेस्क: भारतीय जनता पार्टी ने शनिवार 31 अक्टूबर 2026 को कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों पर मॉक संसद सत्र आयोजित कर लोकतांत्रिक संस्थाओं का मजाक उड़ाने का आरोप लगाया है. बीजेपी ने कहा कि विपक्षी दलों ने वास्तविक संसद की कार्यवाही में बार-बार बाधा पहुंचाई है. एक पत्रकार वार्ता के दौरान बीजेपी सांसद संबित पात्रा ने मॉक संसद के लिए बनाए गए पुराने संसद भवन जैसे ढांचे का जिक्र करते हुए कहा कि विपक्ष हर पुरानी ब्रिटिशकालीन संरचना को बरकरार रखना चाहता है. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि उन्हें राहुल गांधी को उसी पुराने ढांचे में ही मॉक प्रधानमंत्री बनाकर बैठा देना चाहिए और इसमें बीजेपी को कोई आपत्ति नहीं होगी.
यह बयान 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन द्वारा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के दिल्ली स्थित आवास पर आयोजित मॉक संसद सत्र के संदर्भ में आया है. विपक्ष ने यह सत्र मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण और चुनावों के संचालन में अनियमितताओं के आरोपों को लेकर प्रतीकात्मक 'सार्वजनिक महाभियोग' के रूप में आयोजित किया था.
विपक्ष के 'वोट चोरी' के आरोपों का जवाब देते हुए संबित पात्रा ने कहा कि अगर विपक्ष के 38 लाख बूथ-स्तरीय एजेंटों (बीएलए) ने ठीक से काम किया होता, तो आज उन्हें यह मॉक संसद आयोजित करने की जरूरत नहीं पड़ती.
13 करोड़ लोगों के मताधिकार छीने जाने के दावे को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि यदि ऐसा हुआ होता तो प्रभावित लोग सड़कों पर उतर आते, जबकि सच्चाई यह है कि एक भी व्यक्ति का वोट चोरी नहीं हुआ है. उन्होंने ध्यान दिलाया कि कांग्रेस शासन के दौरान भी 10 बार एसआईआर आयोजित किया गया था और कांग्रेस पर दोहरे रवैये का आरोप लगाया.
आंकड़ों की व्याख्या करते हुए पात्रा ने बताया कि लगभग 12 करोड़ मतदाता स्थायी रूप से स्थानांतरित हो गए थे, जिनमें से करीब 6 करोड़ लोगों ने मतदाता सूची में शामिल होने के लिए फॉर्म 6 भर दिया है. शेष लोगों को नोटिस भेजे गए हैं और प्रक्रिया जारी है.
इसके अलावा, लगभग 2.8 करोड़ नाम मृत्यु के कारण हटाए गए और लगभग 1 करोड़ डुप्लिकेट प्रविष्टियों को भी हटाया गया है. उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के शासन के दौरान मृत लोगों के नाम पर फर्जी वोट डाले जाते थे, लेकिन एसआईआर ने इस प्रथा पर रोक लगा दी है.
पात्रा ने फॉर्म 6 में संशोधन के आरोप को भी खारिज किया और कहा कि इसमें केवल एक घोषणा जोड़ी गई है, जिस पर 27 मई 2026 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले में स्पष्टता दी गई है. उन्होंने यह भी बताया कि निर्वाचन आयोग ने एसआईआर से जुड़े फैसले सर्वसम्मति से लिए हैं और आयोग के डिजिटल प्लेटफॉर्म (ECINET) को लेकर भी कोई असहमति नहीं थी.
2023 के कानून पर सफाई देते हुए उन्होंने कहा कि चुनाव आयुक्तों को संवैधानिक सुरक्षा पहले से प्राप्त थी और इस कानून ने केवल प्रक्रिया तय की है. उन्होंने जुलाई 2023 के तेलंगाना की एक निचली अदालत के उस आदेश का हवाला दिया जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ मामला दर्ज करने को कहा गया था, जिसे बाद में उच्च न्यायालय ने रद्द कर दिया था. पात्रा ने कहा कि उस समय यह महसूस किया गया था कि राजनीतिक दबाव के कारण संवैधानिक प्राधिकारियों के खिलाफ बिना विचार किए मामले दर्ज कराए जा सकते हैं.
इससे पहले बीजेपी सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने वर्ल्ड बैंक की 2025 की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने गरीबी घटाने में सफलता हासिल की है. इस रिपोर्ट के अनुसार 2011 से 2023 के बीच अत्यधिक गरीबी 27.6% से घटकर 2.6% रह गई है. उन्होंने कहा कि जहां एनडीए सरकार गरीबी उन्मूलन और लोगों के जीवन स्तर को सुधारने के लिए प्रतिबद्ध है, वहीं कांग्रेस और राहुल गांधी देश में अराजकता पैदा करने का प्रयास कर रहे हैं.