INDIA ब्लॉक ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर चलाया 'प्रतीकात्मक महाभियोग'
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर INDIA ब्लॉक ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ 'प्रतीकात्मक महाभियोग' की कार्रवाई की. इस दौरान चुनाव आयोग की निष्पक्षता और 14 करोड़ वोटरों के नाम हटाने जैसे गंभीर मुद्दों पर सरकार को घेरा गया.
नई दिल्ली । डेस्क: विपक्षी दलों के INDIA गठबंधन ने शनिवार को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एक प्रतीकात्मक 'जन महाभियोग' का आयोजन किया. विपक्ष का आरोप है कि मुख्य चुनाव आयुक्त देश के मतदाताओं के अधिकारों को कमजोर कर रहे हैं और संवैधानिक संस्था चुनाव आयोग को मोदी सरकार के इशारे पर चला रहे हैं.
पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार की अध्यक्षता में यह पूरी कार्यवाही कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर संपन्न हुई. इस दौरान मल्लिकार्जुन खड़गे ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रस्ताव पेश करते हुए उन्हें पद से हटाने, चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े 2023 के कानून को रद्द करने और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभ्यास को तुरंत समाप्त करने की मांग रखी.
सरकार के इशारे पर काम करने और निष्पक्षता खत्म करने का आरोप
प्रस्ताव पेश करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त स्वतंत्र रूप से काम करने के बजाय सीधे तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के निर्देशों पर चुनाव आयोग का संचालन कर रहे हैं. विपक्ष का कहना है कि इसके चलते आज देश में आम नागरिकों का मताधिकार गंभीर खतरे में पड़ गया है और चुनाव आयोग अपनी संवैधानिक स्वतंत्रता खो चुका है.
वोटर लिस्ट से 14 करोड़ पात्र मतदाताओं के नाम हटाने पर घिरे CEC
महाभियोग की कार्यवाही की शुरुआत करते हुए मीरा कुमार ने कहा कि पात्र मतदाताओं को गलत तरीके से वोटर लिस्ट से बाहर किया जा रहा है. वहीं खड़गे ने दावा किया कि विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर अभ्यास के जरिए लगभग 14 करोड़ योग्य नागरिकों को जानबूझकर मतदान के अधिकार से वंचित किया गया है. उन्होंने दिल्ली में बैठकर कंप्यूटर के जरिए लोगों के वोट गलत तरीके से हटाए जाने पर कड़ा ऐतराज जताया.
2023 के नए कानून से सीईसी को मिली अनुचित सुरक्षा
विपक्ष ने चुनाव आयोग के नए कानून को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं. खड़गे का आरोप है कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त (नियुक्ति, सेवा शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम 2023 के माध्यम से मुख्य चुनाव आयुक्त को ऐसी अनुचित सुरक्षा और छूट दी गई है, जो राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री तक के पास नहीं है. उन्होंने याद दिलाया कि यह कानून संसद से तब पास कराया गया था जब विपक्ष के 145 सांसदों को निलंबित कर दिया गया था.
फॉर्म 6 में गैर-कानूनी बदलाव और युवाओं के अधिकारों पर असर
मुख्य चुनाव आयुक्त पर संसद को भरोसे में लिए बिना मतदाताओं के पंजीकरण से जुड़े फॉर्म 6 में गैर-कानूनी तरीके से संशोधन करने का भी आरोप लगाया गया है. विपक्षी गठबंधन के अनुसार इस एकतरफा बदलाव से नए और युवा मतदाताओं के पंजीकरण और उनके मताधिकार पर सीधा बुरा असर पड़ सकता है.
चुनाव आयोग में केंद्रीकरण और अन्य आयुक्तों की उपेक्षा
गठबंधन ने सीईसी पर वोटर लिस्ट के नियंत्रण को अवैध रूप से अपने हाथों में केंद्रित करने का आरोप लगाया है. इसके साथ ही यह बात भी सामने रखी गई कि निर्णय लेने की प्रक्रिया से बाकी दोनों चुनाव आयुक्तों को जानबूझकर अलग रखा जा रहा है. विपक्ष का तर्क है कि इस तरह के एकतरफा रवैये से चुनाव आयोग का सामूहिक कामकाज और उसकी संस्थागत स्वायत्तता पूरी तरह ध्वस्त हो रही है.
संवैधानिक जनादेश का उल्लंघन और लोकतंत्र पर मंडराता खतरा
मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने अपने संवैधानिक कर्तव्यों और जनविश्वास के साथ विश्वासघात किया है, जिससे अनुच्छेद 326 के तहत मिलने वाला सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार खतरे में पड़ गया है. उन्होंने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ दल चुनावी हेरफेर के जरिए देश में लोकतंत्र को खत्म करने की कोशिश कर रहा है, जिसे विपक्षी दल किसी भी कीमत पर सफल नहीं होने देंगे.