इंडोनेशिया: 1.2 टन लिक्विड मेथ जब्त, अंतरराष्ट्रीय ड्रग गिरोह का भंडाफोड़- जाने मेथ क्या है
इंडोनेशिया, चीन और मलेशिया की पुलिस ने साझा अभियान चलाकर 1.2 टन लिक्विड मेथामफेटामाइन जब्त की और एक बड़े अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क का सफाया कर दिया.
नई दिल्ली । डेस्क: चीन के सार्वजनिक सुरक्षा मंत्रालय ने शुक्रवार को जानकारी दी कि उसने इंडोनेशिया और मलेशिया के सहयोग से एक बड़े अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी नेटवर्क को ध्वस्त कर दिया है. इस संयुक्त कार्रवाई में लगभग 1.2 टन लिक्विड मेथामफेटामाइन जब्त की गई है.
इंडोनेशिया की राष्ट्रीय नारकोटिक्स एजेंसी (BNN) ने 21 अक्टूबर को इंडोनेशिया के आचे (Aceh) में दो दुकानों में चल रही एक विशाल ड्रग प्रोसेसिंग और प्यूरीफिकेशन लैब पर छापेमारी कर उसे बंद कराया. चीन के राष्ट्रीय नारकोटिक्स नियंत्रण आयोग (NNCC) और मलेशिया की राष्ट्रीय एंटी-ड्रग्स एजेंसी की मदद से चलाए गए इस अभियान में 11 लोगों को गिरफ्तार किया गया.
यह फैक्ट्री इंडोनेशिया में अपनी तरह की सबसे बड़ी प्रयोगशाला मानी जा रही है. स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मौके से मेथामफेटामाइन को प्रोसेस करने में इस्तेमाल होने वाली वाशिंग मशीनें, एलपीजी सिलेंडर और अन्य उपकरण व सामग्रियां बरामद हुई हैं.
मंत्रालय के मुताबिक, हाल के वर्षों में चीन और अन्य देशों द्वारा संयुक्त रूप से चलाए गए ड्रग तस्करी विरोधी अभियानों में यह अब तक की सबसे अधिक गिरफ्तारियों वाली और व्यापक कार्रवाई है. इंडोनेशियाई राष्ट्रीय पुलिस (INP) की वेबसाइट पर प्रकाशित एक लेख के अनुसार, चीनी अधिकारियों ने चीन में भी इस नेटवर्क से जुड़े 7 संदिग्धों को गिरफ्तार किया है.
यह आपराधिक गिरोह म्यांमार, थाईलैंड और लाओस से इंडोनेशिया सहित कई देशों में तरल मादक पदार्थों की तस्करी में शामिल था.
इंडोनेशिया की अंतरा (Antara) समाचार एजेंसी के अनुसार, इंडोनेशिया में पकड़े गए 11 लोगों में से 10 को औपचारिक रूप से संदिग्ध नामित किया गया है, जिनमें 8 इंडोनेशियाई और 2 चीनी नागरिक (LJ और XM) शामिल हैं, जबकि एक व्यक्ति को गवाह के रूप में वर्गीकृत किया गया है.
दोनों चीनी नागरिक मुख्य शेफ या केमिस्ट के रूप में काम कर रहे थे जो लिक्विड मेथ को क्रिस्टल मेथ में बदलते थे और मलेशिया से आचे आए थे, जबकि इंडोनेशियाई संदिग्ध सहायक शेफ, लॉजिस्टिक्स सप्लायर, ड्राइवर और एस्कॉर्ट के रूप में काम कर रहे थे. पुलिस इस गिरोह से जुड़े दो अन्य संदिग्धों की भी तलाश कर रही है.
बुधवार को एनएनसीसी के उप सचिव जनरल लैन वेइहोंग ने जकार्ता में चीनी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करते हुए आईएनपी प्रमुख जनरल सुयुडी आरियो सेतो से मुलाकात कर मामले पर चर्चा की. चीन के एंटी-ड्रग अधिकारियों ने सबसे पहले अक्टूबर 2025 में इस अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़े सुरागों का पता लगाया था और अगले एक साल तक गहन जांच की.
इस वर्ष सितंबर में चीन ने यह जानकारी इंडोनेशिया की एजेंसी को सौंपी, जिसके बाद दोनों पक्षों ने मिलकर कार्रवाई करने का फैसला किया. सुयुडी के अनुसार, इंडोनेशियाई जांचकर्ता मेदान क्षेत्र में मिली एक नाव और उसके संदिग्ध मलेशियाई मालिक से जुड़े अन्य संपर्कों की भी जांच कर रहे हैं.
दोनों देश खुफिया जानकारी के आदान-प्रदान और कानून प्रवर्तन सहयोग के माध्यम से ड्रग नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई मजबूत करने पर सहमत हुए हैं, हालांकि इस अभियान में मलेशिया की एजेंसी की विशिष्ट भूमिका का सार्वजनिक खुलासा नहीं किया गया है.
मेथामफेटामाइन या मेथ क्या होता है?
मेथामफेटामाइन, जिसे आमतौर पर 'मेथ' या 'क्रिस्टल मेथ' के नाम से जाना जाता है, एक अत्यंत शक्तिशाली, सिंथेटिक (कृत्रिम) और अत्यधिक लत पैदा करने वाला उत्तेजक (स्टिमुलेंट) ड्रग है. यह मानव शरीर के केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (सेंट्रल नर्वस सिस्टम) को सीधे तौर पर प्रभावित करता है. रासायनिक रूप से यह एम्फेटामाइन से मिलता-जुलता होता है, लेकिन इसका असर दिमाग पर बहुत अधिक तीव्र और लंबे समय तक रहने वाला होता है.
यह अक्सर सफेद, गंधहीन, कड़वे स्वाद वाले पाउडर या पारदर्शी कांच के टुकड़ों (क्रिस्टल) के रूप में दिखाई देता है. इसे आमतौर पर धुएं के रूप में खींचकर, निगलकर, सूंघकर या घोल बनाकर इंजेक्शन के जरिए शरीर में लिया जाता है.
जब कोई व्यक्ति इसका सेवन करता है, तो यह मस्तिष्क में 'डोपामाइन' नामक रसायन के स्तर को तेजी से और बहुत अधिक मात्रा में बढ़ा देता है. डोपामाइन दिमाग में खुशी, ऊर्जा और आनंद का अहसास कराने के लिए जिम्मेदार होता है. इसके सेवन के तुरंत बाद व्यक्ति को अत्यधिक ऊर्जा, उत्साह, सतर्कता और आत्मविश्वास का अहसास होता है.
हालांकि, यह आनंद बेहद अस्थायी होता है और इसके पीछे एक विनाशकारी चक्र शुरू हो जाता है.
मेथ का अल्पकालिक प्रभाव दिल की धड़कन और रक्तचाप को अनियंत्रित रूप से बढ़ा देता है, जिससे शरीर का तापमान खतरनाक स्तर तक पहुंच सकता है. इसके सेवन से व्यक्ति की भूख और नींद पूरी तरह गायब हो जाती है.
जब इस ड्रग का असर उतरता है, तो व्यक्ति अत्यधिक थकान, डिप्रेशन, चिड़चिड़ापन और गंभीर मूड स्विंग्स का शिकार होता है. लगातार और लंबे समय तक इसके सेवन से व्यक्ति का दिमाग और शरीर गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो जाते हैं.
इसके दीर्घकालिक प्रभावों में मस्तिष्क की संरचना में स्थायी बदलाव, गंभीर पैरानोया (अत्यधिक भ्रम व शक), मतिभ्रम (ऐसी चीजें देखना या सुनना जो वास्तव में नहीं हैं) और हिंसक व्यवहार शामिल हैं.
कई मामलों में पीड़ितों को अपनी त्वचा के नीचे कीड़े रेंगने का अहसास होता है, जिससे वे अपनी त्वचा को बुरी तरह खरोंच लेते हैं. इसके अलावा, इसके लगातार इस्तेमाल से दांत तेजी से सड़ने और टूटने लगते हैं, जिसे 'मेथ माउथ' कहा जाता है.
अत्यधिक मात्रा में सेवन (ओवरडोज) करने पर स्ट्रोक, दिल का दौरा या मौत भी हो सकती है. गैर-कानूनी रूप से इसे अक्सर सीक्रेट प्रयोगशालाओं या 'क्लैंडेस्टाइन लैब्स' में खतरनाक रसायनों के मिश्रण से तैयार किया जाता है, जिसके कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कानून प्रवर्तन एजेंसियां इसके अवैध निर्माण और तस्करी पर कड़ी निगरानी रखती हैं.