IDBI: कांग्रेस के समय बैंक स्थापित किए गए, मौजूदा समय में बैंकों को बेचा जा रहा है- राहुल गांधी
नई दिल्ली । डेस्क: लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने आईडीबीआई बैंक के प्रस्तावित विनिवेश का विरोध कर रहे बैंक कर्मचारियों का समर्थन किया है. उन्होंने सार्वजनिक क्षेत्र के इस बैंक में सरकार की बहुलांश हिस्सेदारी कनाडा की फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स को बेचने के फैसले पर सवाल उठाए हैं. राहुल गांधी ने कहा कि सार्वजनिक बैंक बेचने के लिए संपत्ति नहीं हैं, बल्कि ये देश निर्माण के साधन हैं.
29 अक्टूबर को आईडीबीआई बैंक परिवार के सदस्यों को लिखे अपने एक खुले पत्र में राहुल गांधी ने याद दिलाया कि पिछले साल मार्च में संसद भवन में मुलाकात के दौरान कर्मचारियों ने इस बिक्री को लेकर अपनी चिंताएं जताई थीं. उन्होंने कहा कि उन्होंने इस सवाल को लोकसभा में भी उठाया था कि एक मुनाफे वाले बैंक को क्यों बेचा जा रहा है और कर्मचारियों व जमाकर्ताओं की सुरक्षा कैसे होगी, लेकिन सरकार ने इसका कोई कारण नहीं बताया. अब सरकार ने इसे कनाडा की कंपनी फेयरफैक्स को बेचने का फैसला किया है.
बैंक के बदलाव और 2003 के वादे का दिया हवाला
आईडीबीआई बैंक के वित्तीय बदलाव को रेखांकित करते हुए कांग्रेस नेता ने कहा कि कर्मचारियों के सामने आई कई चुनौतियों के बावजूद यह बैंक एक विकास बैंक से वाणिज्यिक बैंक के रूप में उभरा है. उन्होंने कहा कि सात साल पहले बैंक नुकसान में था, लेकिन पिछले साल इसने नौ हजार करोड़ रुपये से अधिक का लाभ कमाया और यह बदलाव कर्मचारियों की मेहनत का नतीजा है.
राहुल गांधी ने तर्क दिया कि जनता के पैसे से बना संस्थान जनता का ही होता है. वर्तमान में सरकार और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) के पास बैंक की 95 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जो इस सौदे के बाद घटकर 34 प्रतिशत रह जाएगी.
उन्होंने 2003 में संसद में दिए गए सरकार के उस आश्वासन को भी याद दिलाया, जिसमें कहा गया था कि सरकार हमेशा आईडीबीआई में कम से कम 50 प्रतिशत हिस्सेदारी बनाए रखेगी. उन्होंने कहा कि भले ही यह वादा कानून में न लिखा हो, लेकिन संसद से किया गया वादा देश की जनता से किया गया वादा होता है.
आरक्षण और सेवा शर्तों पर जताई चिंता
निजीकरण के बाद कर्मचारियों पर पड़ने वाले असर पर चिंता व्यक्त करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि बैंक के निजी हाथों में जाने से अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के उम्मीदवारों के लिए आरक्षण समाप्त हो जाएगा. इसके अलावा कर्मचारियों की सेवा शर्तें भी अपनी आखिरी सुरक्षा खो देंगी.
उन्होंने जोर देकर कहा कि कांग्रेस ने हमेशा निजी क्षेत्र के साथ-साथ एक मजबूत सार्वजनिक क्षेत्र पर विश्वास किया है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए सरकार पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस के समय उद्योग बनाने के लिए बैंक स्थापित किए गए थे, जबकि मौजूदा समय में बैंकों को बेचा जा रहा है.
सरकार ने विनिवेश प्रक्रिया पर दी स्पष्टीकरण
राहुल गांधी की यह टिप्पणी निवेश और सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग (DIPAM) द्वारा दिए गए उस स्पष्टीकरण के बाद आई है, जिसमें आईडीबीआई बैंक के रणनीतिक विनिवेश के लिए दूसरे दौर की बोली प्रक्रिया की जानकारी दी गई थी. DIPAM ने साफ किया कि दूसरे दौर की प्रक्रिया विनिवेश पर सचिवों के कोर ग्रुप (CGD) द्वारा तय की गई थी, जिसे कैबिनेट समिति ने प्रक्रियात्मक मुद्दों से निपटने के लिए अधिकृत किया था. वित्त वर्ष 2025-26 में आयोजित पहले दौर की बोलियों को मंजूरी नहीं मिली थी, जिसके बाद वे निष्प्रभावी हो गई थीं.
विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि आरक्षित मूल्य में कोई बदलाव नहीं किया गया है और बोलियों का कोई पूर्व-निर्धारित बेंचमार्क नहीं होता क्योंकि बोलीदाता स्वतंत्र रूप से मूल्यांकन करते हैं. निष्पक्ष मूल्य का आकलन करने के लिए स्वतंत्र मूल्यांकन एजेंसियां नियुक्त की जाती हैं. DIPAM के अनुसार, यदि उच्चतम वित्तीय बोली आरक्षित मूल्य से नीचे गिरती है, तो आगे की कार्रवाई का निर्णय सरकार करती है और योग्य पक्ष इसे चुनौती नहीं दे सकते.
फेयरफैक्स को 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी की मंजूरी
इससे पहले 14 अक्टूबर को सरकार ने आईडीबीआई बैंक में 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी कनाडा की फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स को लगभग 53,000 करोड़ रुपये (5.5 अरब डॉलर) में बेचने की मंजूरी दी थी. यह सौदा भारतीय बैंकिंग क्षेत्र में सबसे बड़ा विदेशी निवेश होगा.
इस सौदे के तहत फेयरफैक्स सरकार की 30.48 प्रतिशत हिस्सेदारी (लगभग 26,620 करोड़ रुपये) और LIC की 30.24 प्रतिशत हिस्सेदारी (लगभग 26,440 करोड़ रुपये) का अधिग्रहण करेगा. प्रेम वत्स के नेतृत्व वाली फेयरफैक्स 81 रुपये प्रति शेयर का भुगतान करेगी, जो स्वतंत्र एजेंसियों द्वारा निर्धारित 75.99 रुपये प्रति शेयर के फेयर वैल्यू से अधिक है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से नियामक मंजूरी मिलने के बाद इस रणनीतिक सौदे के चालू वित्त वर्ष के अंत तक पूरा होने की उम्मीद है.