मंगल, 27 अक्टू. 2026

CGKhabar

जशपुर पुलिस फेसबुक पर नहीं, जरुरी मुद्दों पर ध्यान दे- सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने फेसबुक पोस्ट पर एफआईआर दर्ज किए जाने के मुद्दे पर सुनवाई करते हुए जशपुर पुलिस को कहा है कि वह जरुरी मुद्दों पर ध्यान दे.

C

CG Khabar

27 अक्टू. 2026, 08:09 PM 6 मिनट में पढ़ें 2,624

जशपुर पुलिस फेसबुक पर नहीं, जरुरी मुद्दों पर ध्यान दे- सुप्रीम कोर्ट

रायपुर/दिल्ली | डेस्क : सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ में एक सामाजिक कार्यकर्ता के खिलाफ फेसबुक पोस्ट को लेकर दर्ज आपराधिक मामले पर सुनवाई करते हुए पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं. अदालत ने पूछा कि जब पुलिस के सामने गंभीर आपराधिक मामले मौजूद हैं, तो उसे इस तरह के विवादित सोशल मीडिया पोस्ट पर आपराधिक मुकदमा दर्ज करने की जरूरत क्यों पड़ी? मामला छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के गृह ज़िले जशपुर का है.

न्यायमूर्ति आर. महादेवन ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी की- “एफआईआर दर्ज करने की क्या जरूरत है? बड़े मामलों पर ध्यान दीजिए, ऐसे मामलों पर नहीं.”

यह मामला छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के कुनकुरी थाने में सामाजिक कार्यकर्ता रूपनारायण एक्का के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी से जुड़ा है. फेसबुक पर साझा की गई एक पोस्ट में महिलाओं के स्तन ढकने से जुड़े कथित ऐतिहासिक कर का उल्लेख किया गया था. शिकायतकर्ता का आरोप है कि पोस्ट में हिंदुओं और ब्राह्मण समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली तथा हिंदू महिलाओं के प्रति अपमानजनक सामग्री थी.

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने अभी न तो एफआईआर रद्द की है और न ही मामले के आरोपों पर कोई अंतिम फैसला सुनाया है. अदालत ने एक्का को मिली अंतरिम सुरक्षा को 4 दिसंबर 2026 तक बढ़ा दिया है. यह सुरक्षा जांच में सहयोग करने की शर्त के अधीन है.

सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?

न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ रूपनारायण एक्का की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उन्होंने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के अग्रिम जमानत देने से इनकार करने के आदेश को चुनौती दी है.

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि सुप्रीम कोर्ट ने 9 सितंबर को मामले में नोटिस जारी किया था, लेकिन इसके बाद एक्का पुलिस थाने में पेश नहीं हुए थे.

इस पर पीठ ने कहा-आप उन्हें समन कीजिए. वह पेश होंगे.

राज्य की ओर से इसके बाद अदालत को बताया गया कि एक्का को पुलिस के सामने उपस्थित होने के लिए नोटिस जारी किया जा रहा है.

एक्का की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने अदालत का ध्यान इस बात की ओर दिलाया कि नोटिस जारी होने के बावजूद राज्य सरकार ने याचिका पर अपना जवाब दाखिल नहीं किया है.

राज्य सरकार के अनुरोध पर अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 4 दिसंबर 2026 के लिए निर्धारित कर दी. साथ ही, सितंबर में दी गई अंतरिम राहत को जारी रखने का निर्देश दिया.

इस राहत के तहत एक्का के खिलाफ कोई दंडात्मक या जबरन कार्रवाई नहीं की जा सकती, बशर्ते वह जांच में सहयोग करें.

विज्ञापन

फेसबुक पोस्ट में क्या दावा किया गया था?

इस पूरे विवाद का केंद्र एक फेसबुक पोस्ट है, जिसमें महिलाओं के स्तन ढकने से संबंधित कर के लिए ‘पेशवाई ब्राह्मणों’ को जिम्मेवार बताया गया था.

शिकायतकर्ता दीपक मिश्रा ने आरोप लगाया कि इस पोस्ट से हिंदुओं और ब्राह्मण समुदाय की धार्मिक भावनाएं आहत हुईं. शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया कि पोस्ट में हिंदू महिलाओं के संबंध में अपमानजनक सामग्री थी और उसे व्यापक रूप से प्रसारित किया गया.

रूपनारायण एक्का ने इन आरोपों का विरोध किया है. वह बहुजन मुक्ति पार्टी के सदस्य भी बताए गए हैं.

उनका कहना है कि इस मामले में उन्हें राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के कारण फंसाया गया है. उन्होंने यह भी दलील दी कि उन्होंने विवादित सामग्री स्वयं तैयार नहीं की थी, बल्कि केवल उसे आगे साझा किया और उस पर ‘लाइक’ किया था.

एक्का की ओर से अदालत में यह तर्क दिया गया कि उनके कथित कृत्य से भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत अपराध के आवश्यक तत्व पूरे नहीं होते.

किन धाराओं में दर्ज हुई FIR?

कुनकुरी थाने में दर्ज FIR संख्या 103/2025 में भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 299 और धारा 353(2) लगाई गई हैं.

धारा 299, किसी वर्ग के नागरिकों की धार्मिक भावनाओं को आहत करने के इरादे से धर्म या धार्मिक मान्यताओं का जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण अपमान करने से संबंधित है.

इसी तरह धारा 353(2) झूठी जानकारी, अफवाहों या ऐसी खबरों को बनाने, प्रकाशित करने अथवा प्रसारित करने से संबंधित है, जिनका उद्देश्य या जिनसे विभिन्न धार्मिक, नस्लीय, भाषाई, क्षेत्रीय, जातिगत अथवा सामुदायिक समूहों के बीच वैमनस्य, घृणा या दुर्भावना को बढ़ावा मिलने की आशंका हो.

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने अग्रिम जमानत क्यों खारिज की?

सुप्रीम कोर्ट में पहुंचने से पहले रूपनारायण एक्का ने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट से दो बार अग्रिम जमानत मांगी थी.

उनकी पहली याचिका, MCRCA संख्या 1964/2025, 15 दिसंबर 2025 को गुण-दोष के आधार पर खारिज कर दी गई थी.

इसके बाद उन्होंने दूसरी याचिका, MCRCA संख्या 1014/2026, दायर की. इसमें उन्होंने दलील दी कि पहले आदेश में कथित घटनाओं के समयक्रम को सही ढंग से नहीं समझा गया था.

एक्का के अनुसार, वर्तमान फेसबुक पोस्ट की कथित तारीख 13 अप्रैल 2025 थी, जबकि दूसरे मामले में FIR संख्या 91/2025 को 30 अप्रैल 2025 को दर्ज किया गया था. वर्तमान FIR संख्या 103/2025 इसके बाद 4 मई 2025 को दर्ज हुई.

उन्होंने तर्क दिया कि इस समयक्रम को देखते हुए पहले दिए गए आदेश पर दोबारा विचार किया जाना चाहिए.

राज्य सरकार ने इसका विरोध किया. उसका कहना था कि पहली याचिका पहले ही गुण-दोष के आधार पर खारिज हो चुकी है और परिस्थितियों में ऐसा कोई महत्वपूर्ण बदलाव नहीं हुआ है, जिससे दूसरी बार अग्रिम जमानत दी जा सके.

राज्य ने एक्का के कथित पूर्व आपराधिक मामलों का भी उल्लेख किया.

3 जुलाई 2026 को तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा ने दूसरी याचिका खारिज कर दी. हाई कोर्ट ने माना कि परिस्थितियों में ऐसा कोई पर्याप्त बदलाव नहीं हुआ था, जो पहले लिए गए निर्णय पर अलग दृष्टिकोण अपनाने का आधार बन सके. अदालत ने राज्य की ओर से बताए गए पूर्व आपराधिक मामलों से संबंधित दलीलों पर भी विचार किया. इसके बाद एक्का ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया.

‘ब्रेस्ट टैक्स’ क्या है ?

यह विवाद जिस ‘ब्रेस्ट टैक्स’ यानी स्तन कर से जुड़ा है, वह भारत में जातिगत भेदभाव, महिलाओं के पहनावे और सामाजिक असमानता पर होने वाली ऐतिहासिक चर्चाओं का एक संवेदनशील विषय है.

यह शब्द आम तौर पर केरल के वर्तमान क्षेत्र में स्थित पूर्ववर्ती त्रावणकोर रियासत से जुड़े ‘मुलक्करम’ नामक कथित कर के संदर्भ में इस्तेमाल किया जाता है. लोकप्रिय ऐतिहासिक विवरणों में इसे जाति-आधारित सामाजिक व्यवस्था और वंचित समुदायों की महिलाओं पर लागू प्रतिबंधों से जोड़कर प्रस्तुत किया जाता है.

इस विषय के साथ नांगेली नामक महिला की कहानी भी प्रचलित है. लोकप्रिय कथाओं में उन्हें कथित कर का विरोध करने वाली महिला के रूप में याद किया जाता है. उनकी कहानी जातिगत उत्पीड़न के विरुद्ध प्रतिरोध के प्रतीक के तौर पर सामने आई है.

हालांकि, नांगेली की कहानी के विवरण, उससे जुड़े दस्तावेजी साक्ष्यों और ऐतिहासिक घटनाक्रम की व्याख्या को लेकर विद्वानों के बीच बहस भी रही है.

यह खबर शेयर करें: WhatsApp Facebook
ED
छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ में ED का छापा: रायपुर और दुर्ग में दो कारोबारियों के ठिकानों पर रेड

एक घंटा पहले

AI Generated Photo
छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़: धमतरी में मोबाइल फोन इस्तेमाल करने को लेकर बड़े भाई ने छोटे भाई की पीटकर हत्या

एक घंटा पहले

AI Generated Photo- धान खरीदी केन्द्र
छत्तीसगढ़

15 नवम्बर से 3100 रूपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी पर छत्तीसगढ़ कैबिनेट की मुहर लगी

एक घंटा पहले

मरवाही में हाथी के हमलें में घायल ग्रामीण
छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़: मरवाही में हाथी के करीब जाना ग्रामीण को पड़ा भारी, हमले में गंभीर रूप से घायल

2 घंटे पहले

छत्तीसगढ़ रेरा
छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़: रायपुर की वात्सल्य गौरव-1 परियोजना पर रेरा का एक्शन, जुर्माना लगाया

6 घंटे पहले

FIR
छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ के अम्बिकापुर के श्री महावीर अस्पताल में फर्जी डॉक्टर का खुलासा, FIR दर्ज करने के निर्देश

6 घंटे पहले

CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP