ग्रामीण डाक सेवक भर्ती: पुराने प्रमाणपत्र पर भी नियुक्ति मान्य, HC का फैसला
ग्रामीण डाक सेवक (GDS) नियुक्ति विवाद पर हाईकोर्ट का अहम फैसला! केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) के निर्णय पर मुहर लगाते हुए अदालत ने साफ किया कि 2012 में जारी शैक्षणिक प्रमाणपत्र के आधार पर अभ्यर्थियों को अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता.
छत्तीसगढ़ । संवाददाता: छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने ग्रामीण डाक सेवक (जीडीएस) भर्ती से जुड़े एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक योग्यता विवाद में केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) के निर्णय को पूरी तरह सही माना है. मुख्य न्यायाधीश कृष्ण राम महापात्र एवं न्यायाधीश संतोष शर्मा की पीठ ने केंद्र सरकार तथा डाक विभाग द्वारा दाखिल याचिका को निरस्त करते हुए स्पष्ट किया कि किसी बोर्ड की मान्यता बाद में निलंबित होने मात्र से, पूर्व में जारी वैध अंकसूची व प्रमाणपत्र को अमान्य नहीं ठहराया जा सकता.
यह पूरा मामला हेमचरण साहू, उत्तरा कुमार और अन्य अभ्यर्थियों के चयन से जुड़ा हुआ है, जिन्होंने जीडीएस पद के लिए 10वीं कक्षा उत्तीर्ण करने के साथ-साथ गणित और अंग्रेजी विषय की योग्यता का साक्ष्य प्रस्तुत किया था.
इन अभ्यर्थियों ने 'छत्तीसगढ़ बोर्ड ऑफ स्कूल एंड टेक्निकल एजुकेशन' से प्राप्त प्रमाणपत्र जमा किए थे. हालांकि, डाक विभाग और केंद्र सरकार ने शिक्षा मंत्रालय के दिसंबर 2021 के एक परिपत्र का हवाला देकर यह तर्क दिया कि राज्य में केवल छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल और राज्य ओपन स्कूल ही स्वीकृत हैं, और इसी आधार पर इनकी नियुक्ति की प्रक्रिया रोक दी गई थी.
विभाग के इस रुख से व्यथित होकर अभ्यर्थियों ने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण का दरवाजा खटखटाया था. कैट ने सभी प्रस्तुत साक्ष्यों एवं दस्तावेजों का गहन परीक्षण करने के बाद अभ्यर्थियों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए उन्हें न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता के लिए पात्र घोषित किया था.
इस आदेश से असंतुष्ट होकर केंद्र सरकार और मुख्य पोस्ट मास्टर जनरल ने हाईकोर्ट में अपील दायर कर दावा किया था कि संबंधित बोर्ड को केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की मान्यता प्राप्त नहीं है और उसकी मान्यता भी निलंबित की जा चुकी है.
मामले की सुनवाई के दौरान अभ्यर्थियों के कानूनी पक्ष ने यह दलील दी कि उन्हें 20 दिसंबर 2012 को अंकसूची व प्रमाणपत्र प्रदान किए गए थे, इसलिए इतने वर्षों बाद बोर्ड की मान्यता के मुद्दे को आधार बनाकर उन्हें नौकरी के अवसर से वंचित करना न्यायसंगत नहीं है.
दोनों पक्षों की दलीलों और उपलब्ध रिकॉर्ड्स की समीक्षा करने के पश्चात हाईकोर्ट ने कैट के फैसले में किसी भी प्रकार की वैधानिक त्रुटि से इंकार किया. अदालत ने अंततः कैट के निर्णय पर मुहर लगाते हुए अभ्यर्थियों की पात्रता को बहाल रखा.