15 नवम्बर से 3100 रूपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी पर छत्तीसगढ़ कैबिनेट की मुहर लगी
विष्णु देव साय सरकार की कैबिनेट बैठक में किसानों, कर्मचारियों, युवाओं और आम जनता के लिए ऐतिहासिक निर्णय लिए गए. 15 नवंबर से शुरू हो रही धान खरीदी से लेकर कैशलेस इलाज और बुनियादी ढांचे के विकास को लेकर कई बड़े फैसलों पर अंतिम स्वीकृति दी गई.
रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के किसानों, आम बिजली उपभोक्ताओं, सरकारी कर्मचारियों और युवाओं के हित में कई दूरगामी और ऐतिहासिक निर्णय लिए हैं. मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में आयोजित राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में प्रदेश के विकास और जनकल्याण से जुड़े महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी प्रदान की गई. मंत्रिपरिषद के इन फैसलों से न केवल कृषि क्षेत्र में समृद्धि आएगी, बल्कि राज्य में बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य सेवाओं, औद्योगिक निवेश और खेल संस्कृति को भी एक नई दिशा मिलेगी.
15 नवंबर से शुरू होगी धान खरीदी, किसानों को बड़ी राहत
मंत्रिपरिषद ने खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में छत्तीसगढ़ प्रदेश के किसानों से दिनांक 15 नवम्बर 2026 से धान खरीदी करने का निर्णय लिया है. उक्त अवधि में 27.50 लाख से अधिक किसानों से 3100 रूपये प्रति क्विंटल की दर से अधिकतम 21 क्विंटल प्रति एकड़ के मान से धान की खरीदी की जावेगी. किसान हित में बड़ा फैसला लेते हुए एग्रीस्टेक आईडी युक्त विगत वर्ष के पंजीकृत सभी कृषकों को धान विक्रय हेतु मान्य किया है, इन किसानों को पृथक से पंजीयन की कोई आवश्यकता नहीं होगी.
एग्रीस्टेक में पंजीयन होने के कारण किसानों को धान विक्रय हेतु पृथक से ऋण पुस्तिका समिति में लाने की आवश्यकता नहीं होगी. डिजिटल क्राप सर्वे के माध्यम धान के रकबे का ऑनलाईन निर्धारण डिजिटल रूप से सुनिश्चित हुआ है. वास्तविक किसानों से धान खरीदी सुनिश्चित करने हेतु बायोमैट्रिक आधारित धान की खरीदी की जावेगी. किसानों को बेहतर एवं सुगम व्यवस्था प्रदान किये जाने हेतु 360 नये उपार्जन केन्द्र प्रारंभ किये जा रहे हैं, फलस्वरूप इस वर्ष 3100 उपार्जन केन्द्रों के माध्यम से धान खरीदी सुनिश्चित की जायेगी.
धान खरीदी हेतु समितियों में समुचित व्यवस्था किये जाने के निर्देश दिये गये है. इसके साथ ही मंत्रिपरिषद ने खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 एवं वर्ष 2025-26 में अतिशेष धान की नीलामी के माध्यम से निराकरण करने के संबंध में मंत्रिमण्डलीय उपसमिति की बैठक के निर्णय का अनुसमर्थन किया है. इसके अतिरिक्त, खरीफ-2026 में कृषक उन्नति योजना के संशोधन को मंजूरी दी गई, जिसके तहत धान फसल पर आदान सहायता राशि प्रति क्विंटल के स्थान पर प्रति एकड़ के मान से प्रदान की जाएगी, जिससे किसानों को फसल विविधीकरण और उन्नत तकनीकों में निवेश का प्रोत्साहन मिलेगा.
बिजली उपभोक्ताओं को राहत और ठेकेदारों को बिटुमिन मूल्य सहायता
प्रदेश के आम नागरिकों को राहत देने के क्रम में सरकार ने 'मुख्यमंत्री ऊर्जा राहत जन अभियान' (एम-ऊर्जा) योजना के अंतर्गत 200 यूनिट तक बिजली बिल में दी जा रही छूट को जारी रखने का फैसला किया है. योजना का लाभ लेने के लिए 400 यूनिट तक की पात्रता अवधि को 30 सितंबर 2026 से बढ़ाकर 31 मार्च 2027 कर दिया गया है, जिससे लगभग 7.25 लाख घरेलू उपभोक्ताओं को सीधा लाभ मिलता रहेगा.
दूसरी ओर, निर्माण कार्यों को रफ्तार देने के लिए बिटुमिन की बढ़ती कीमतों को देखते हुए सड़क निर्माण और संधारण कार्यों के ठेकेदारों को मूल्य राहत देने का निर्णय लिया गया है. इसके तहत छत्तीसगढ़ ग्रामीण सड़क विकास अभिकरण और लोक निर्माण विभाग की योजनाओं के अंतर्गत करोड़ों रुपये का बजटीय अनुदान दिया जाएगा, जिससे लंबित सड़क परियोजनाओं को समय पर पूरा किया जा सके.
शासकीय सेवकों के लिए कैशलेस इलाज और नई पद संरचना
राज्य के शासकीय सेवकों और उनके आश्रितों के लिए कैबिनेट ने कैशलेस चिकित्सा सुविधा को मंजूरी देकर एक बड़ा तोहफा दिया है. अब कर्मचारियों को इलाज के समय खुद भुगतान करके लंबी प्रतिपूर्ति प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा, बल्कि सूचीबद्ध अस्पतालों में डिजिटल और ऑनलाइन प्रक्रिया के माध्यम से तत्काल मुफ्त उपचार की सुविधा मिलेगी.
वहीं प्रशासनिक दक्षता और समन्वय को बढ़ाने के उद्देश्य से सुशासन एवं अभिसरण विभाग में आयुक्त, अपर संचालक और विशेषज्ञ के तीन नए पदों के सृजन को मंजूरी दी गई है.
इसके अलावा, नवा रायपुर स्थित वन मुख्यालय में विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी का एक अस्थायी पद स्वीकृत किया गया है, ताकि पीएम गति-शक्ति और परिवेश पोर्टल के कार्यों को तेजी से निपटाया जा सके. एक अन्य मानवीय निर्णय में स्वर्गीय डॉ. राकेश मोहन चंदोला की लंबी सेवा अवधि को परिवार पेंशन के लिए नियमित सेवा मानते हुए उनके परिजनों को एरियर्स और पेंशन का हकदार बनाया गया है.
अधोसंरचना, पर्यटन और खेल विकास के लिए बड़े मिशन
प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण विकास को गति देने के लिए 'मुख्यमंत्री अधोसंरचना मिशन-2026' की गाइडलाइन्स को मंजूरी दी गई है. अगले पांच वर्षों में 500 करोड़ रुपये के बजट के साथ लोक निर्माण विभाग और CGRIDCL के माध्यम से एकीकृत सड़क नेटवर्क, जीआईएस नियोजन और ई-माप पुस्तिका जैसी तकनीकों का उपयोग कर पारदर्शी निर्माण सुनिश्चित किया जाएगा. इसी तर्ज पर 'मुख्यमंत्री पर्यटन विकास मिशन' को 500 करोड़ रुपये के प्रावधान के साथ मंजूरी दी गई है, जिसका उद्देश्य होमस्टे, स्थानीय रोजगार और बेहतर कनेक्टिविटी के जरिए छत्तीसगढ़ को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करना है.
युवाओं में खेल प्रतिभा को निखारने के लिए 100 करोड़ रुपये के वार्षिक प्रावधान के साथ 'मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन' शुरू किया जाएगा. इसके तहत अंबिकापुर, बिलासपुर, रायपुर, दुर्ग, जगदलपुर और जशपुर में शुरुआती चरण में फीडर सेंटर स्थापित कर खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय कोचिंग और स्पोर्ट्स साइंस की सुविधाएं दी जाएंगी.
रेल कनेक्टिविटी, उद्योग, भूमि आवंटन और प्रशासनिक निर्णय
कनेक्टिविटी को नया आयाम देते हुए 295 किलोमीटर लंबी कटघोरा-तखतपुर-मुंगेली-कवर्धा-खैरागढ़-डोंगरगढ़ रेल परियोजना को शत-प्रतिशत इक्विटी निवेश के साथ पूरा करने की स्वीकृति दी गई है. 8,000 करोड़ रुपये की इस परियोजना में राज्य सरकार और रेल मंत्रालय आधी-आधी हिस्सेदारी वहन करेंगे. औद्योगिक क्षेत्र में बड़े निवेश को आकर्षित करने के लिए औद्योगिक विकास नीति 2024-30 में संशोधन कर 1,000 करोड़ रुपये से अधिक की कोल गैसीफिकेशन परियोजनाओं के लिए विशेष पैकेज की घोषणा की गई है, साथ ही औद्योगिक भूमि नियमों को भी सरल बनाया गया है.
सार्वजनिक परिसंपत्तियों के बेहतर उपयोग के लिए दुर्ग के पोल्ट्री फार्म, रामानुजगंज के वेटनरी अस्पताल, जशपुर पुलिस लाइन, सक्ती के बुधवारी बाजार और धमतरी के रुद्री चौक का पीपीपी मॉडल पर पुनर्विकास किया जाएगा. भंडारण क्षमता बढ़ाने के लिए राजनांदगांव के खपरीकला में केंद्रीय भंडारण निगम को 10 एकड़ भूमि तथा सोमनी में राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड को मल्टी फ्रूट प्रोसेसिंग फैसिलिटी के लिए 31.55 एकड़ भूमि आवंटित की जाएगी, जिससे हजारों अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होंगे. इसके अतिरिक्त जनहित में राजनीतिक आंदोलनों से जुड़े 9 न्यायालयीन प्रकरणों को वापस लेने की अनुशंसा को भी मंजूरी प्रदान की गई है, वहीं रायपुर जिले की नगर पंचायत कूंरा का नाम बदलकर उसकी प्राचीन ऐतिहासिक पहचान के अनुरूप 'कुंवरगढ़' करने का ऐतिहासिक फैसला लिया गया है.