31 अक्टूबर को हैलोवीन विरोध-प्रदर्शनों के लिए 70,000 पुलिसकर्मियों की तैनाती; फ्रांस अलर्ट पर
बढ़ती महंगाई और पुलिसिया कार्रवाई के विरोध में फ्रांस में छात्र और 'येलो वेस्ट' आंदोलनकारी एक बार फिर सड़कों पर उतरने की तैयारी में हैं, जिसे देखते हुए सुरक्षा कड़ी कर दी गई है.
नई दिल्ली । डेस्क: फ्रांस में बढ़ती महंगाई, असमानता और पुलिसिया कार्रवाई को लेकर जनाक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है. देश में शनिवार को एक बार फिर बड़े पैमाने पर होने वाले विरोध-प्रदर्शनों को देखते हुए फ्रांस के गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज ने 'सार्वजनिक अव्यवस्था के अत्यधिक उच्च जोखिम' की चेतावनी जारी की है. इस स्थिति से निपटने के लिए देशभर में लगभग 70,000 पुलिस अधिकारियों और जेंडरम्स (सैन्य पुलिस) को तैनात करने की घोषणा की गई है.
देश में आगामी छह महीनों में राष्ट्रपति चुनाव होने वाले हैं और जनमत सर्वेक्षणों में सुदूर दक्षिणपंथी नेता मरीन ले पेन आगे चल रहे हैं, जिससे राजनीतिक माहौल पहले से ही काफी तनावपूर्ण बना हुआ है. गृह मंत्री नुनेज ने स्पष्ट किया है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनों की अनुमति होगी, लेकिन शहर के प्रमुख केंद्रों में अव्यवस्था के खतरे को देखते हुए प्रदर्शन पर रोक रहेगी.
इसके साथ ही, सोशल मीडिया पर शनिवार शाम हैलोवीन के नाम पर 'क्रांति' का आह्वान करने वाले जमावड़ों को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है. मंत्री ने कहा कि किसी भी तरह की अति को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और प्रशासन बेहद सख्ती से निपटेगा. गौरतलब है कि हैलोवीन हर साल 31 अक्टूबर को मनाया जाता है. कल यानी 31 अक्टूबर (शनिवार) को हैलोवीन है.
उल्लेखनीय है कि 17 अक्टूबर के राष्ट्रव्यापी प्रदर्शनों के दौरान बड़े पैमाने पर हिंसा, लूटपाट और सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचा था, जिसके बाद अधिकारियों ने अपनी सुरक्षा और खुफिया विफलताओं को स्वीकार किया था. इसके बाद से छात्रों और 'येलो वेस्ट' आंदोलनकारियों ने अपने विरोध को और तेज कर दिया है.
दूसरी ओर, छात्र संगठनों ने सरकार पर बातचीत से भागने और पुलिसिया हिंसा को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया है.
सरकार द्वारा विश्वविद्यालय प्रवेश प्लेटफॉर्म को बदलने और स्कूल नवीनीकरण के लिए ऋण देने जैसे कदमों को छात्रों ने अपर्याप्त बताया है. छात्र संघ 'यूनेफ' की महासचिव मनोन मोरेट और 'लेस लीसियंस!' के उप प्रमुख लुई लेटौब्लोन ने गृह मंत्री के साथ हुई हालिया बैठक के बाद निराशा जताते हुए आरोप लगाया कि प्रशासन पुलिस की दमनकारी कार्रवाई की जवाबदेही लेने से इनकार कर रहा है.