ईरान युद्ध में अमेरिका के $47.1bn खर्च से मिडटर्म चुनाव से पहले ट्रंप सरकार पर बढ़ा दबाव
पेंटागन की ताजा रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि ईरान युद्ध पर अमेरिका का खर्च 47.1 अरब डॉलर तक पहुंच गया है. आगामी मिडटर्म चुनाव से ठीक पहले आई इस खबर और बढ़ती महंगाई ने अमेरिकी राजनीति में नया तूफान खड़ा कर दिया है.
नई दिल्ली । डेस्क: अमेरिकी संसद को सौंपी गई पेंटागन की एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि ईरान के खिलाफ युद्ध में अमेरिकी करदाताओं के कम से कम 47.1 अरब डॉलर खर्च हो चुके हैं. यह रिपोर्ट आगामी मंगलवार को होने वाले मिडटर्म चुनावों से ठीक कुछ दिन पहले सामने आई है. ये चुनाव यह तय करेंगे कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी का कांग्रेस पर नियंत्रण बरकरार रहेगा या नहीं. पेंटागन के अनुसार उसने राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा मंजूर किए गए फंड का 97.5 प्रतिशत हिस्सा इस्तेमाल कर लिया है, जो पिछले साल हस्ताक्षरित 'वन बिग ब्यूटीफुल बिल एक्ट' के तहत मिला था.
सैन्य अभियानों पर पेंटागन के बजट का लेखा-जोखा
पेंटागन के आंकड़ों के मुताबिक इस बजट का एक बड़ा हिस्सा हथियारों और सैन्य अभियानों में लगा है. इसमें से 29 अरब डॉलर युद्ध में इस्तेमाल हुए बम, गोलियों और सैन्य हार्डवेयर को बदलने के लिए प्रस्तावित हैं. 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से अमेरिकी वायुसेना ने 7.6 अरब डॉलर, नौसेना ने युद्धपोतों पर 1.5 अरब डॉलर और थलसेना ने मध्य पूर्व में तैनात 50,000 से अधिक सैनिकों के रखरखाव पर 2.1 अरब डॉलर खर्च किए हैं.
इसके अतिरिक्त क्षतिग्रस्त विमानों और हथियारों को बदलने में 6.1 अरब डॉलर, कमांडो सहायता में 645 मिलियन डॉलर और इन-हाउस चिकित्सा सहायता में 24.5 मिलियन डॉलर का खर्च आया है. परिवहन कमान ने उपकरण ले जाने पर 92.2 मिलियन डॉलर और साइबर कमान ने 14 मिलियन डॉलर खर्च किए हैं. हालांकि, इसमें क्षतिग्रस्त सैन्य अड्डों की मरम्मत और ईंधन की लागत शामिल नहीं है.
हताहतों की संख्या और लागत में अनिश्चितता
पेंटागन ने आधिकारिक रूप से 18 अमेरिकी सैनिकों की मौत की बात स्वीकार की है, लेकिन अन्य आधिकारिक सूत्रों के अनुसार यह संख्या कम से कम 22 है. वहीं आधिकारिक डेटाबेस के अनुसार 865 सैन्यकर्मी घायल हुए हैं. सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह 47.1 अरब डॉलर का आंकड़ा अंतिम नहीं है, बल्कि एक चलता हुआ योग है.
यदि युद्ध बिना किसी परिणाम के जारी रहता है, तो अमेरिका को सैन्य दबाव बनाए रखने और अपनी क्षमताओं को फिर से खड़ा करने के लिए बार-बार भुगतान करना पड़ेगा. लगातार खर्च से अमेरिका के हथियारों का स्टॉक कम हो रहा है, ऊर्जा बाजार अस्थिर हो रहे हैं और क्षेत्रीय सुरक्षा का मुद्दा अनसुलझा बना हुआ है.
राजनीतिक विरोध और बदलता जनमत
रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद डेमोक्रेटिक पार्टी के नेताओं ने ट्रंप प्रशासन पर युद्ध की वास्तविक लागत छिपाने का आरोप लगाया है. सीनेट में अल्पसंख्यक नेता चक शूमर ने कहा है कि अमेरिकी परिवार महीनों से इस युद्ध के भारी बोझ तले दबे हैं. मार्च की शुरुआत में ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद किए जाने से वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतें बढ़ गई हैं.
अमेरिका में डीजल की कीमतें लगभग दोगुनी होकर $6.35 प्रति गैलन पर पहुंच गई हैं, जिससे खाद्य आपूर्ति और आम जीवन प्रभावित हुआ है. इसके साथ ही देश का राष्ट्रीय कर्ज 40 ट्रिलियन डॉलर के रिकॉर्ड स्तर को पार कर गया है.
आगामी मिडटर्म चुनावों पर युद्ध का असर
बढ़ती महंगाई और युद्ध के कारण राष्ट्रपति ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग घटकर 33 प्रतिशत पर आ गई है. चुनाव से ठीक पहले आए पोलिंग आंकड़ों में डेमोक्रेटिक पार्टी 51.4 प्रतिशत के साथ रिपब्लिकन पार्टी के 43.2 प्रतिशत के मुकाबले बढ़त बनाए हुए है.
विश्लेषकों का कहना है कि यह मुद्दा ट्रंप के दो मुख्य दावों को चुनौती देता है—कोई नया युद्ध शुरू न करने का वादा और अमेरिकी अर्थव्यवस्था को सुधारने का संकल्प. युद्ध के भारी खर्च और अनिश्चित भविष्य के कारण ट्रंप के मुख्य समर्थकों से इतर अन्य मतदाता उनसे दूर होते दिख रहे हैं, जिसका सीधा असर आने वाले मिडटर्म चुनाव के परिणामों पर पड़ सकता है.