राहुल गांधी ने टाटा समूह के बोर्डरूम विवाद पर मोदी सरकार को घेरा
टाटा संस के नेतृत्व विवाद और नोएल टाटा द्वारा एन. चंद्रशेखरन के पुनर्नियोजन के विरोध के बीच, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने टाटा समूह में चल रहे संकट पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने व्यापारिक नेताओं की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए न्याय सुनिश्चित करने का वादा किया.
नई दिल्ली । डेस्क: टाटा समूह के भीतर टाटा संस के नेतृत्व को लेकर जारी आंतरिक कलह अब देश की राजनीति के केंद्र में आ गई है. लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने टाटा समूह में चल रहे विवाद पर अपनी पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया देते हुए केंद्र सरकार और उद्योग जगत पर जोरदार हमला बोला है.
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि देश के सबसे बड़े कारोबारी घरानों में शामिल टाटा समूह को 'आपराधिक रूप से नष्ट' किया जा रहा है और इस पूरे घटनाक्रम पर देश के शीर्ष उद्योगपतियों की चुप्पी पर भी सवाल उठाए.
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट शेयर करते हुए राहुल गांधी ने देश के व्यापारिक नेताओं को संबोधित करते हुए कहा कि वे कब तक इस मुद्दे पर चुप रहेंगे. उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारतीय उद्योग जगत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का खिलौना नहीं है.
राहुल गांधी ने दावा किया कि उद्योगपतियों में साहस की कमी है, लेकिन कांग्रेस इस स्थिति में चुप नहीं बैठेगी और इन गलतियों के खिलाफ न्याय सुनिश्चित करेगी.
यह राजनीतिक बयानबाज़ी टाटा संस के बोर्डरूम में उपजे उस गंभीर विवाद के बाद आई है, जिसमें टाटा ट्रस्ट्स के अध्यक्ष नोएल टाटा ने 17 सितंबर को हुई बोर्ड बैठक में एन. चंद्रशेखरन को टाटा संस के अध्यक्ष के रूप में फिर से नियुक्त करने के प्रस्ताव को चुनौती दी है.
टाटा संस में 66 फीसदी हिस्सेदारी रखने वाले टाटा ट्रस्ट्स ने इस फैसले को अवैध करार दिया है, क्योंकि नोएल टाटा ने इस नियुक्ति पर अपना वीटो लगाया था. फिलहाल इस पूरे मामले पर न तो सरकार और न ही टाटा समूह की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया आई है.