ब्राजील: व्हाट्सएप के दम पर पलटी चुनाव की बाजी, लूला की जीत के पीछे 'डिजिटल जनरल' का दिमाग
पहले दौर में पिछड़ने के बाद लूला डा सिल्वा ने कैसे पलटी बाजी? जानिए 'डिजिटल जनरल' आंद्रे जानोनेस के उस व्हाट्सएप नेटवर्क की कहानी, जिसने 1.1 करोड़ समर्थकों को लूला की चुनावी सेना में बदलकर नतीजे बदल दिए.
नई दिल्ली । डेस्क: साओ पाउलो में राष्ट्रपति चुनाव की जीत का जश्न मनाते हुए लुइज़ इनासियो लूला डा सिल्वा ने अपने बगल में खड़े हरी और पीली जर्सी पहने एक शख्स के सिर पर हाथ रखा और जनता के सामने उसे अपना "जनरल" कहकर संबोधित किया. यह शख्स कोई सैन्य अधिकारी नहीं, बल्कि 42 वर्षीय ब्राजीलियाई सांसद आंद्रे जानोनेस थे. राष्ट्रपति चुनाव के पहले दौर में पिछड़ने के बाद लूला डा सिल्वा की जिस तरह से धमाकेदार वापसी हुई, उसका सबसे बड़ा श्रेय जानोनेस के डिजिटल चुनावी अभियान को दिया जा रहा है.
चुनाव के पहले चरण में लूला डा सिल्वा अपने दक्षिणपंथी प्रतिद्वंद्वी फ्लेवियो बोलसोनारो से पीछे रह गए थे. दक्षिणपंथी खेमे के मजबूत सोशल मीडिया नेटवर्क के आगे लूला का पारंपरिक प्रचार सुस्त पड़ता दिख रहा था. इस कठिन परिस्थिति में वकील और सांसद आंद्रे जानोनेस ने लूला के डिजिटल अभियान की कमान अपने हाथों में ली. उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर खुलकर दावा किया कि लूला ही ब्राजील के अगले राष्ट्रपति बनेंगे और इसके साथ ही उन्होंने समर्थकों को एकजुट करना शुरू किया.
'लूला की सेना': 60 हजार से 1.1 करोड़ सब्सक्राइबर्स का सफर
आंद्रे जानोनेस की चुनावी रणनीति का मुख्य केंद्र उनका व्हाट्सएप चैनल था, जिसे "एक्सेरसिटो डो लूला" यानी "लूला की सेना" नाम दिया गया था. पहले दौर के मतदान के समय इस चैनल से लगभग 60 हजार लोग जुड़े थे. लेकिन जानोनेस की रणनीतिक अपील के कारण चुनाव के दिन तक इस व्हाट्सएप चैनल के सब्सक्राइबर्स की संख्या बढ़कर करीब 1.1 करोड़ (11 मिलियन) पहुंच गई.
जानोनेस ने अपने समर्थकों को "सिपाही" का दर्जा दिया और उन्हें दैनिक आधार पर छोटे-छोटे लक्ष्य यानी "मिशन" सौंपे. इन कार्यों में तीन नए दोस्तों को अभियान से जोड़ना, अभियान के वीडियो साझा करना और विशेष हैशटैग को ट्रेंड कराना शामिल था. संदेशों का यह सिलसिला दिन-रात चलता रहता था. हालांकि समर्थक इन संदेशों का जवाब नहीं दे सकते थे, लेकिन वे इन्हें बड़ी संख्या में फॉरवर्ड करते थे और इमोटिकॉन्स के जरिए अपनी प्रतिक्रिया देते थे. विशेषज्ञों ने इस रणनीति को "चुनावी गेमिफिकेशन" का नाम दिया, जिसने समर्थकों में एक साझा लक्ष्य के लिए काम करने का उत्साह भरा.
प्रचार शैली में बदलाव और जमीनी धरातल से जुड़ाव
डिजिटल सेना तैयार करने के साथ-साथ लूला के चुनाव प्रचार के अंदाज में भी व्यापक बदलाव किए गए. जानोनेस की सलाह पर लूला के अभियान को ज्यादा अनौपचारिक और आम जनता से जोड़ने वाला बनाया गया. झिझक भरे और औपचारिक भाषणों के बजाय लूला के सीधे, अनफिल्टर्ड और सेल्फी स्टाइल वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट किए जाने लगे, जिनमें वे आम लोगों से घर जाकर मिलते और कॉफी पीते दिखे.
अंतिम टीवी डिबेट के दौरान जब प्रतिद्वंद्वी फ्लेवियो बोलसोनारो ने लूला के नौ उंगलियों वाले हाथ का मजाक उड़ाया, तो लूला ने इसे बेहद प्रभावी ढंग से अपने पक्ष में मोड़ लिया. लूला ने देशवासियों को याद दिलाया कि 17 साल की उम्र में एक कारखाने में नाइट शिफ्ट के दौरान उन्होंने दुर्घटना में अपनी उंगली खो दी थी. उन्होंने खुद को ब्राजील के मेहनतकश मजदूर वर्ग से जोड़ते हुए बोलसोनारो पर तंज कसा कि वे कामगारों के दर्द को समझते हैं. डिबेट के तुरंत बाद जानोनेस ने इंटरनेट पर #SomosTodos9Dedos (#हमसब9उंगलियांहैं) हैशटैग चला दिया, जो देखते ही देखते देश भर में ट्रेंड करने लगा और लोगों ने एकजुटता दर्शाते हुए अपनी तस्वीरें साझा कीं.
जीत में डिजिटल रणनीति की भूमिका
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यद्यपि किसी एक डिजिटल समूह का चुनावी नतीजों से सीधा सांख्यिकीय संबंध स्थापित करना कठिन है, लेकिन इसमें कोई संदेह नहीं कि जानोनेस के इस अभियान ने लूला के समर्थकों में नया जोश फूंका. बिखरे हुए वामपंथी समर्थकों को एक मंच पर लाकर उन्हें सक्रिय भागीदारी का अहसास कराना इस रणनीति की सबसे बड़ी सफलता रही.
जीत की रात साओ पाउलो की पॉलिस्टा एवेन्यू में जुटी उत्साही भीड़ को संबोधित करते हुए जानोनेस ने अपने डिजिटल सैनिकों को जश्न में शामिल होने का बुलावा दिया और मजाक में कहा कि इस बड़ी जीत के बाद वे अपने "सैनिकों" को कुछ दिनों की छुट्टी देंगे.