वेनेजुएला के साथ 100 साल के तेल समझौते पर मार्को रुबियो बोले- चीन और रूस की एंट्री रोकना जरूरी
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने वेनेजुएला के साथ हुए तेल समझौते को चीन और रूस के दबदबे के खिलाफ एक रणनीतिक कदम बताया है. विपक्ष की आलोचनाओं को दरकिनार करते हुए उन्होंने कहा कि यह सौदा अमेरिका को संकट के समय ऊर्जा सुरक्षा प्रदान करेगा.
नई दिल्ली । डेस्क: अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने वेनेजुएला के साथ हुए तेल समझौते का पुरजोर बचाव करते हुए इसे चीन और रूस की बढ़ती मौजूदगी के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कदम करार दिया है. उन्होंने वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना माचाडो द्वारा की गई आलोचनाओं को खारिज करते हुए कहा कि अमेरिका का यह कदम देश के रणनीतिक हितों की रक्षा के लिए बेहद जरूरी था.
पत्रकारों से बातचीत करते हुए रुबियो ने स्पष्ट किया कि जिस अमेरिकी समर्थित कंपनी को वेनेजुएला में तेल निष्कर्षण का ठेका मिला है, वे क्षेत्र पहले चीन और रूस के नियंत्रण या संचालन में थे. इस नए समझौते के तहत अमेरिकी कंपनी को 17 तेल क्षेत्रों में 100 वर्षों के लिए रियायत दी गई है, जिनमें लगभग 65 अरब बैरल का प्रमाणित तेल भंडार मौजूद है.
रुबियो ने तर्क दिया कि यदि अमेरिका यह पहल नहीं करता, तो कोई अन्य देश इन समृद्ध संसाधनों का दोहन कर रहा होता, इसलिए अमेरिकी कंपनियों का वहां होना ज्यादा फायदेमंद है.
विपक्षी नेता माचाडो की आपत्तियों पर जवाब देते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि उन्हें समझौते से असहमत होने का पूरा अधिकार है, लेकिन तेल सौदा और देश में लोकतांत्रिक चुनाव की प्रक्रिया दो अलग-अलग विषय हैं.
उन्होंने यह भी बताया कि अमेरिका वेनेजुएला में कोई प्रत्यक्ष आर्थिक पूंजी नहीं लगा रहा है, बल्कि अमेरिकी कंपनियों की मौजूदगी से निवेशकों में भरोसा बढ़ा है, जिससे वेनेजुएला के गिरते तेल उद्योग को नई ताकत मिलेगी.
इसके साथ ही, रुबियो ने चीन के पुराने तेल समझौतों पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा कि चीन वेनेजुएला से तेल के बदले नकद भुगतान करने के बजाय उसे केवल अपने दिए गए कर्ज के बदले भुनाता था.
हालांकि, अब नए ढांचे के तहत वेनेजुएला के कच्चे तेल को बाजार दरों पर बेचा जा रहा है और उससे मिलने वाली राशि अमेरिकी खजाने द्वारा नियंत्रित खातों में रखी जा रही है. उन्होंने जोर देकर कहा कि अमेरिका वेनेजुएला पर प्रतिबंधों में ढील का इस्तेमाल वहां लोकतांत्रिक सुधारों और निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए दबाव बनाने के हथियार के रूप में करता रहेगा.