इजराइल चुनाव: बेंजामिन नेतन्याहू ने दक्षिणपंथी सरकार का किया दावा
इजराइली संसदीय चुनाव के नतीजों के रुझानों के बीच प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है कि देश की दीर्घकालिक सुरक्षा के लिए एक मजबूत दक्षिणपंथी सरकार का गठन बेहद जरूरी है.
नई दिल्ली । डेस्क: इजराइल में हुए संसदीय चुनावों के रुझानों के बीच प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने देश में एक मजबूत दक्षिणपंथी सरकार बनाने का आह्वान किया है. पश्चिमी यरूशलेम स्थित अपनी लिकुड पार्टी के मुख्यालय में समर्थकों को संबोधित करते हुए नेतन्याहू ने साफ कहा कि इजराइल की दीर्घकालिक सुरक्षा के लिए एक दक्षिणपंथी सरकार का गठन आवश्यक है.
उन्होंने अरब दलों के साथ किसी भी प्रकार का गठबंधन करने से साफ इनकार करते हुए कहा कि ऐसे दलों पर निर्भर नहीं रहा जा सकता.
आधे से अधिक मतों की गिनती के बाद आए शुरुआती रुझानों के अनुसार, नेतन्याहू के गठबंधन को लगभग 56 सीटें मिलती दिख रही हैं, जबकि गादी आइजनकोट (Gadi Eisenkot) के गठबंधन के खाते में 49 सीटें जाती नजर आ रही हैं.
हालांकि, रुझानों से यह स्पष्ट है कि किसी भी प्रमुख दल को सरकार बनाने के लिए आवश्यक स्पष्ट बहुमत मिलना आसान नहीं होगा. इजराइली टीवी चैनलों के अनुमानों के मुताबिक नेतन्याहू की लिकुड पार्टी 27 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभर रही है, जबकि आइजनकोट की याशर (Yashar) पार्टी को 21 सीटें मिलने का अनुमान है.
अपने संबोधन के दौरान नेतन्याहू ने अपने 2022 से शुरू हुए मौजूदा कार्यकाल की उपलब्धियों का जिक्र किया. उन्होंने मध्य पूर्व के राजनीतिक और सुरक्षा परिदृश्य को बदलने का दावा करते हुए कहा कि उनकी सरकार ने देश के सिर पर मंडराते अस्तित्व के खतरे को दूर कर दिया है.
नेतन्याहू ने गाजा, लेबनान और सीरिया में सुरक्षा क्षेत्र स्थापित करने तथा ईरान पर दबाव बनाने को अपनी बड़ी सफलता बताया. उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ मिलकर ईरान से जुड़े रणनीतिक मुद्दों पर आगे काम करने की मंशा भी जताई.
दूसरी ओर, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव के यह रुझान नेतन्याहू के लिए आसान राह की ओर इशारा नहीं करते. पूर्व इजराइली राजदूत अलोन पिंकस के अनुसार, सबसे बड़े दल को सरकार बनाने के लिए कुछ असहज गठबंधन समझौते करने पड़ सकते हैं.
वहीं, राजनीतिक विश्लेषक मारवान बिशारा का कहना है कि नेतन्याहू चुनावी नतीजों को अपने पक्ष में दिखाने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि असलियत यह है कि 2009 के बाद से लिकुड पार्टी का यह सबसे कमजोर प्रदर्शन माना जा रहा है. कुल मिलाकर, अंतिम नतीजे आने के बाद ही इजराइल की भावी राजनीति का रुख साफ हो सकेगा.