वैश्विक डीजल संकट के बीच भारत बना प्रमुख निर्यातक, महंगे क्रूड से बढ़ा आयात बिल
दुनिया भर में डीजल की भारी किल्लत के बीच भारतीय रिफाइनरियां पूरी क्षमता के साथ उत्पादन कर वैश्विक बाजार की मांग पूरी कर रही हैं. हालांकि, इसके चलते देश का कच्चा तेल आयात बिल भी काफी बढ़ गया है.
नई दिल्ली । डेस्क: दुनिया भर में छाये ईंधन संकट और डीजल की आसमान छूती मांग के बीच भारतीय रिफाइनरियां वैश्विक बाजार की आपूर्ति का प्रमुख जरिया बन गई हैं. अमेरिका के बाद भारत पहले से ही समुद्री मार्ग से भेजे जाने वाले डीजल का दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक है. अब सरकारी रिफाइनरियां अपनी उत्पादन क्षमता का विस्तार कर आगामी वर्षों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में और अधिक डीजल आपूर्ति करने की योजना बना रही हैं. यह सार्वजनिक प्रयास भारत को दुनिया का प्रमुख स्विंग सप्लायर बनाने की एक बड़ी रणनीतिक सोच का हिस्सा है.
वैश्विक बाजार में बढ़ता भारतीय डीजल का दबदबा
वैश्विक स्तर पर रिफाइनिंग क्षमता में आ रही गिरावट के विपरीत भारत अपनी मौजूदा रिफाइनरियों का आधुनिकीकरण और विस्तार कर रहा है. अक्टूबर के दौरान भारत से डीजल निर्यात प्रतिदिन लगभग सात लाख बैरल तक पहुंचने की संभावना जताई गई है, जिसमें सबसे बड़ी हिस्सेदारी यूरोपीय देशों की है. इस वैश्विक उछाल का सबसे बड़ा लाभ निजी क्षेत्र की रिलायंस इंडस्ट्रीज और नायरा एनर्जी को मिल रहा है. दूसरी ओर, सरकारी रिफाइनरियां घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता देते हुए अपनी रिफाइनिंग क्षमता को बढ़ाने में जुटी हैं ताकि वैश्विक मांग का फायदा उठाया जा सके.
महंगे कच्चे तेल का भारी आर्थिक दबाव
ईंधन निर्यात से होने वाली बंपर कमाई के बीच भारत के लिए कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें एक नई चुनौती बनकर उभरी हैं. अपनी जरूरत का करीब नब्बे प्रतिशत कच्चा तेल आयात करने वाले भारत को अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारी प्रीमियम चुकाना पड़ रहा है. चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में देश का कच्चा तेल आयात बिल बढ़कर नब्बे अरब डॉलर तक पहुंच गया है. हालांकि, रिफाइनिंग उत्पादों के निर्यात में हुई भारी बढ़ोतरी ने इस वित्तीय प्रभाव को काफी हद तक संभालने में मदद की है.
घरेलू उपभोक्ताओं को राहत और वैश्विक आपूर्ति रणनीति
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के ऊंचे दामों के बावजूद भारतीय सरकार ने घरेलू स्तर पर ईंधन की कीमतों को नियंत्रित रखा है. वैश्विक तेल कीमतों का सीधा बोझ आम उपभोक्ताओं पर नहीं डाला गया है, जिससे खुदरा डीजल की दरें काफी हद तक स्थिर बनी हुई हैं. इसके साथ ही, भारत ने पश्चिमी एशिया के अपने पारंपरिक आपूर्तिकर्ताओं से फिर से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदना शुरू कर दिया है.
वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और बदलती भू-राजनीति
लाल सागर के वैकल्पिक पाइपलाइन मार्गों का उपयोग कर सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात से तेल की खेप भारतीय रिफाइनरियों तक पहुंच रही है. वहीं, रूसी कच्चे तेल पर मिलने वाली छूट में कमी और शिपिंग दरों में बढ़ोतरी के बावजूद रूस के सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता बने रहने की संभावना है. इसके अतिरिक्त, खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर हो रही रणनीतिक वार्ताओं का असर सीधा होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाले तेल परिवहन पर पड़ सकता है, जिससे आने वाले समय में वैश्विक ऊर्जा व्यापार का नया स्वरूप तय होगा.