अमेरिका के चुनावी मैदान में भारत जैसी 'डमी कैंडिडेट' राजनीति, ट्रंप ने दिए आपराधिक जांच के आदेश
भारत के चुनावों में हेमा मालिनी और राहुल गांधी के हमनाम 'डमी' उम्मीदवारों का मैदान में उतरना आम बात रही है, लेकिन अब अमेरिका के अलस्का में ठीक इसी तरह के वाकये ने बड़ा राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है.
नई दिल्ली । डेस्क: भारत के चुनावी परिदृश्य में 'डमी' यानी हमनाम उम्मीदवारों का मैदान में उतरना कोई नई बात नहीं है. मथुरा में हेमा मालिनी से लेकर वायनाड में राहुल गांधी तक, भारतीय चुनावों में ऐसे मामले अक्सर देखने को मिलते हैं जो कई बार हास्य का कारण भी बनते हैं. 2014 के लोकसभा चुनाव में हेमा मालिनी का मुकाबला एक अन्य हेमा मालिनी से हुआ था, तो वहीं 2019 में वायनाड में राहुल गांधी के सामने एक अन्य राहुल गांधी और रघुल गांधी चुनाव मैदान में थे.
भारत में इस तरह के प्रयोगों के उस्ताद कांग्रेस नेता अजीत जोगी माने जाते थे, जिन्होंने 2014 में छत्तीसगढ़ के महासमुंद में भाजपा उम्मीदवार चंदूलाल साहू के खिलाफ सात अन्य 'चंदूलाल' और तीन 'चंदूराम' नाम के प्रत्याशियों को मैदान में उतार दिया था. हालांकि, इसके बावजूद भाजपा के साहू बेहद कम अंतर से चुनाव जीतने में सफल रहे थे.
अब भारत से हजारों मील दूर अमेरिका के अलस्का राज्य में ठीक ऐसा ही हमनाम उम्मीदवारों से जुड़ा विवाद एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया है. 3 नवंबर को होने वाले अमेरिकी मध्यवधि चुनावों से ठीक पहले इस मुद्दे ने देश में सियासी भूचाल ला दिया है, जिसे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों और लोकप्रियता पर जनमत संग्रह माना जा रहा है.
अलस्का में रिपब्लिकन पार्टी के मौजूदा सीनेटर डैनियल सुलिवन का मुकाबला डेमोक्रेटिक उम्मीदवार मैरी पेल्टोला से है. इस मुकाबले में डैनियल सुलिवन नाम के ही एक रिटायर्ड स्कूल शिक्षक तीसरे उम्मीदवार के रूप में उतरे हैं.
द न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह डेमोक्रेटिक टीम के एक समन्वित प्रयास का नतीजा था. इसके बाद ट्रंप ने तुरंत मोर्चा खोलते हुए इसे 'उच्च स्तर की मतदाता धोखाधड़ी' करार दिया और जस्टिस डिपार्टमेंट को जांच के आदेश दे दिए.
ट्रंप का आरोप है कि अलस्का के डेमोक्रेट्स ने रिपब्लिकन वोटों को काटने और मतदाताओं को भ्रमित करने के लिए यह डैनियल सुलिवन नाम का डमी प्रत्याशी खड़ा किया है. ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा कि इस तरह के व्यवहार को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता और पेल्टोला को मतपत्र से हटाकर उन पर मुकदमा चलाया जाना चाहिए.
अमेरिकी कानूनों के तहत चुनाव एक राज्य का विषय है और मतपत्र पर दोनों सुलिवन की पहचान स्पष्ट रूप से अलग दर्ज है, जिससे संघीय सरकार की इस जांच के सामने कानूनी अड़चनें आ सकती हैं.
चुनावी सर्वेक्षणों के अनुसार, सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स दोनों में ही ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी पिछड़ रही है. अलस्का जैसी मजबूत रिपब्लिकन सीट पर भी न्यूयॉर्क टाइम्स-सिना पोल में डेमोक्रेट्स को 51-45 प्रतिशत की बढ़त दिखाई गई है. यदि अलस्का से सीनेट के नियंत्रण का फैसला होता है, तो इसके नतीजे अमेरिका में बड़ा राजनीतिक घमासान पैदा कर सकते हैं.
दूसरी तरफ भारत में, 2024 में ऐसे डमी और हमनाम उम्मीदवारों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई थी. हालांकि, शीर्ष अदालत ने इसे खारिज करते हुए टिप्पणी की थी कि किसी भी व्यक्ति का नाम, चाहे वह राहुल गांधी हो या लालू प्रसाद यादव, उनके चुनाव लड़ने के अधिकार के रास्ते में नहीं आ सकता.