ऑस्ट्रेलिया का बहुचर्चित मशरूम मर्डर केस: एरिन पैटरसन को कोर्ट ने दी बिना पैरोल उम्रकैद की सजा
ऑस्ट्रेलिया के बहुचर्चित मशरूम मर्डर केस में विक्टोरिया के कोर्ट ऑफ अपील ने एरिन पैटरसन की याचिका खारिज कर दी है. जहरीला भोजन देकर तीन लोगों की हत्या करने की दोषी एरिन की पैरोल की पात्रता को समाप्त करते हुए कोर्ट ने सजा को और सख्त कर दिया है, जिसके कारण अब उसे पूरी जिंदगी जेल में ही बितानी होगी.
नई दिल्ली । डेस्क: ऑस्ट्रेलिया के बहुचर्चित और सनसनीखेज "मशरूम मर्डर" मामले में 52 वर्षीया एरिन पैटरसन को अदालत से बहुत बड़ा झटका लगा है. तीन लोगों की जहरीला भोजन देकर हत्या करने के आरोप में दोषी ठहराई गई पैटरसन ने अपनी सजा और दोषसिद्धि के खिलाफ विक्टोरिया राज्य के कोर्ट ऑफ अपील में याचिका दाखिल की थी. पैटरसन ने अपनी तिहरे हत्याकांड की सजा को "न्याय का उपहास" करार देते हुए अदालत से खुद को पूरी तरह बरी करने या फिर मामले की नए सिरे से दोबारा सुनवाई कराने की गुहार लगाई थी.
हालांकि, अपीलीय अदालत ने उनकी अर्जी को सिरे से खारिज कर दिया. अदालत ने स्पष्ट रूप से पाया कि ये हत्याएं "अत्यंत ठंडे दिमाग से, सोच-समझकर और पूरी योजना के साथ" अंजाम दी गई थीं, इसलिए मामले की दोबारा सुनवाई का कोई पर्याप्त या उचित आधार नहीं बनता है.
सुनवाई के दौरान जज स्टीफन मैक्लीश ने पैटरसन के कृत्य की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा, "यह अपराध असाधारण रूप से ठंडा, निर्मम और सोची-समझी साजिश के तहत किया गया था. इसे सख्त से सख्त शब्दों में खारिज और निंदित किया जाना चाहिए." अदालत ने न केवल पैटरसन की अपील खारिज की, बल्कि यह भी टिप्पणी की कि निचली अदालत द्वारा सुनाई गई मूल सजा उनके द्वारा किए गए जघन्य अपराध की गंभीरता और भयावहता के अनुकूल नहीं थी.
मूल फैसले के तहत एरिन पैटरसन 33 वर्ष की जेल काटने के बाद पैरोल के लिए आवेदन करने की हकदार थीं. हालांकि, अभियोजन पक्ष (सरकारी वकीलों) ने अदालत में दलील दी थी कि 33 साल की गैर-पैरोल अवधि इस स्तर के जघन्य अपराध के लिए "स्पष्ट रूप से अपर्याप्त" है. अभियोजकों का यह भी तर्क था कि मूल ट्रायल के जज ने इस गलत धारणा के आधार पर पैरोल का फैसला लिया था कि पैटरसन को भविष्य में कई वर्षों तक एकांत कारावास में रखा जा सकता है, जिससे उनका निर्णय प्रभावित हुआ था.
कोर्ट ऑफ अपील ने अभियोजन पक्ष की दलीलों को सही माना और पैटरसन की पैरोल पाने की पात्रता को पूरी तरह समाप्त कर दिया. पैरोल खत्म होने का सीधा अर्थ यह है कि अब एरिन पैटरसन अपनी बाकी बची पूरी जिंदगी जेल की सलाखों के पीछे ही बिताएंगी और वहीं उनकी मृत्यु होगी.
यह पूरा मामला विक्टोरिया राज्य के एक शांत और कृषि प्रधान गांव लियोंगाथा का है. जुलाई में 12 सदस्यों वाली जूरी ने एरिन पैटरसन को अपने पूर्व पति साइमन के माता-पिता—70 वर्षीय डॉन पैटरसन और गेल पैटरसन—तथा साइमन की 66 वर्षीया बुजुर्ग चाची हीथर विल्किंसन की हत्या का दोषी करार दिया था. पैटरसन ने अपने घर पर दोपहर के भोजन (लंच) के दौरान उन्हें 'बीफ वेलिंगटन' (Beef Wellington) नाम की डिश परोसी थी, जिसमें उन्होंने दुनिया के सबसे जहरीले मशरूमों में शामिल 'डेथ कैप' (Death Cap) मिला दिया था. इस जहरीले भोजन को खाने के बाद तीनों की इलाज के दौरान मौत हो गई थी.
इसके अलावा, पैटरसन को हीथर के पति और स्थानीय पादरी इयान विल्किंसन की हत्या के प्रयास का भी दोषी पाया गया है. इयान भी उसी लंच में शामिल थे और जहरीला खाना खाने के बाद अत्यंत गंभीर स्थिति में अस्पताल में भर्ती हुए थे.
कई हफ्तों तक जिंदगी और मौत से जूझने के बाद आखिरकार पादरी इयान विल्किंसन की जान बच पाई थी. इस पूरे दुखद घटनाक्रम में सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि एरिन पैटरसन द्वारा अपने ही रिश्तेदारों को इस तरह जहरीला खाना देकर मारने के पीछे का असली मकसद आज भी एक रहस्य बना हुआ है.
इस अपील की सुनवाई के दौरान एरिन पैटरसन खुद अदालत में शारीरिक रूप से उपस्थित नहीं हुईं, बल्कि उन्होंने मेलबर्न के बाहरी इलाके में स्थित एक मैक्सिमम-सिक्योरिटी जेल से वीडियो लिंक के माध्यम से अदालती कार्यवाही को देखा. सुनवाई के दौरान पैटरसन की कानूनी टीम और वकीलों ने मूल ट्रायल में कई अनियमितताओं का दावा किया था. उन्होंने आरोप लगाया था कि मुकदमे के दौरान पैटरसन के साथ "उत्पीड़नकारी" प्रतिपरीक्षण किया गया और सबूतों को स्वीकार करने के संबंध में अदालत ने अनुचित फैसले लिए. हालांकि, अपीलीय अदालत ने बचाव पक्ष की इन सभी दलीलों को पूरी तरह खारिज कर दिया.
पिछले साल मोरवेल शहर के एक ग्रामीण न्यायालय में चला यह ऐतिहासिक मुकदमा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में रहा. गुलाब के फूलों के लिए प्रसिद्ध यह शांत शहर इस मुकदमे के दौरान पॉडकास्टरों, फिल्म क्रू, पत्रकारों और दुनियाभर के 'ट्रू क्राइम' (सच्ची आपराधिक घटनाओं) के प्रशंसकों का केंद्र बन गया था. न्यूयॉर्क से लेकर नई दिल्ली तक की मीडिया और आम जनता ने "मशरूम मर्डर" के नाम से मशहूर हुए इस सनसनीखेज मामले के हर मोड़ को उत्सुकता से फॉलो किया. अदालत के इस ताजा फैसले के बाद अब इस केस पर अंतिम कानूनी मुहर लग गई है.
डेथ कैप मशरूम क्या है?
डेथ कैप (वैज्ञानिक नाम: एमानिटा फेलोइड्स / Amanita phalloides) दुनिया का सबसे जहरीला और जानलेवा मशरूम माना जाता है. इसे 'डेथ कैप' (Death Cap) नाम इसके अत्यंत घातक स्वभाव के कारण दिया गया है, क्योंकि इसकी थोड़ी सी मात्रा का सेवन भी इंसान के लिए सीधा मौत का कारण बन सकता है.
मशरूम से होने वाली मौतों के अधिकांश वैश्विक मामलों के लिए यही अकेला मशरूम जिम्मेदार होता है. मूल रूप से यूरोप का यह कवक मुख्य रूप से ओक (Oak), चेस्टनट, पाइन और अन्य चौड़ी पत्ती वाले पेड़ों की जड़ों के आसपास नामी और छायादार जगहों पर उगता है.
हवा, मिट्टी और पौधों के आयात-निर्यात के कारण अब यह ऑस्ट्रेलिया, उत्तरी अमेरिका और दुनिया के कई अन्य हिस्सों में भी तेजी से फैल चुका है.
