मौत की सजा नाकाम: ज़िंदा बची कैदी ने जेल प्रशासन को ठहराया जिम्मेदार
जानलेवा इंजेक्शन के बावजूद ज़िंदा बची 50 वर्षीय क्रिस्टा पाइक ने पहली बार अपनी चुप्पी तोड़ी है. उन्होंने इस विफलता के लिए प्रशासन को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि वे लगातार असहनीय दर्द और मानसिक पीड़ा से गुजर रही हैं.
नई दिल्ली । डेस्क: अमेरिका के टेनेसी में जानलेवा इंजेक्शन देकर मौत दिए जाने की कोशिश के एक महीने बाद ज़िंदा बची 50 वर्षीय महिला कैदी क्रिस्टा पाइक ने अपनी पहली सार्वजनिक प्रतिक्रिया दी है. पाइक ने शुक्रवार को दिए अपने बयान में कहा कि वह उस रात शांति से मरने के लिए पूरी तरह तैयार थीं, लेकिन जब उनकी आंख खुली तो वह अस्पताल के बिस्तर पर अकेली और उलझन में थीं.
उन्होंने बताया कि इस घटना के बाद से वे लगातार शारीरिक और मानसिक दर्द से जूझ रही हैं और उन्हें बोलने में भी भारी तकलीफ हो रही है. उनके वकीलों के मुताबिक, इंजेक्शन के निष्पादन में हुई गड़बड़ी के कारण उनके हाथ जल गए और उन पर छाले पड़ गए थे, जिसके बाद उन्हें कई दिनों तक वेंटिलेटर पर रखा गया.
पाइक ने इस पूरी घटना के लिए प्रशासन की नाकामी को जिम्मेदार ठहराया है. गौरतलब है कि पाइक को 1995 में अपनी 19 वर्षीय सहपाठी कॉलीन स्लेमर की हत्या के जुर्म में मौत की सजा सुनाई गई थी.
गत 30 सितंबर को जब राज्य ने उन्हें पेंटोबार्बिटल की दो खुराक दीं, तो IV लाइन में खराबी के कारण दवा खून में जाने के बजाय टिशू में जमा हो गई और वे बच गईं.
इस घटना के बाद टेनेसी के गवर्नर बिल ली ने मामले की जांच के आदेश देते हुए अन्य निष्पादनों को स्थगित कर दिया है, जबकि राज्य के जेल प्रमुख ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है.
पाइक के वकीलों ने गवर्नर से उनकी सजा को उम्रकैद में बदलने की मांग की है, हालांकि गवर्नर ने संकेत दिया है कि जब तक अदालत कोई अन्य फैसला नहीं लेती, उनकी सजा वही रहेगी. पाइक ने अपनी जान बचाने वाले चिकित्साकर्मियों का आभार व्यक्त किया है और कहा कि वे अब हर दिन उबरने की कोशिश कर रही हैं.