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छत्तीसगढ़: धान खरीदी केंद्रों की संख्या 2,740 से बढ़कर 3,100 हुई, किसानों को लंबी कतारों से राहत

छत्तीसगढ़ सरकार ने धान खरीदी केंद्रों की संख्या 2,740 से बढ़ाकर 3,100 कर दी है. इससे दो लाख से अधिक किसानों को कम दूरी, कम परिवहन खर्च और समय की बचत के साथ सुलभ धान विक्रय की सुविधा मिलेगी.

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30 अक्टू. 2026, 10:17 PM 6 मिनट में पढ़ें 30

धान खरीदी केन्द्र
धान खरीदी केन्द्र

रायपुर । संवाददाता: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में धान खरीदी को अधिक सुगम, पारदर्शी और किसान हितैषी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है. राज्य सरकार ने प्रदेश में 360 नए धान उपार्जन केंद्रों को स्वीकृति प्रदान की है. इस नए निर्णय के साथ ही प्रदेश में धान उपार्जन केंद्रों की कुल संख्या 2,740 से बढ़कर 3,100 हो गई है. इस पहल का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के अन्नदाता किसानों को धान बेचने के लिए लंबी दूरी तय करने से बचाना, उपार्जन केंद्रों में अनावश्यक प्रतीक्षा से राहत दिलाना और कम समय में अधिक से अधिक किसानों की उपज का विक्रय सुनिश्चित करना है.

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस निर्णय के संदर्भ में स्पष्ट किया है कि अन्नदाता किसानों की मेहनत का सम्मान और उनकी सुविधाओं का विस्तार राज्य सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है. धान खरीदी की पूरी प्रक्रिया में किसानों को किसी भी प्रकार की अनावश्यक परेशानी न हो, इसके लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं. 

उन्होंने बताया कि नए उपार्जन केंद्रों की स्वीकृति का उद्देश्य केवल केंद्रों की संख्या में वृद्धि करना नहीं है, बल्कि किसानों के लिए धान विक्रय की पूरी व्यवस्था को अधिक सरल, सुलभ और सुविधाजनक बनाना है. छत्तीसगढ़ के किसान प्रदेश की अर्थव्यवस्था की मजबूत आधारशिला हैं और उनकी मेहनत से उपजा धान प्रदेश की समृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान देता है. इसलिए किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए एक सरल, पारदर्शी और भरोसेमंद व्यवस्था उपलब्ध कराना सरकार का स्पष्ट संकल्प है.

नए उपार्जन केंद्रों से किसानों को मिलने वाली राहत

राज्य सरकार द्वारा 360 नए उपार्जन केंद्रों की स्वीकृति दिए जाने से प्रदेश में धान खरीदी की व्यवस्था का व्यापक विस्तार होगा. इन नए केंद्रों के प्रारंभ होने से किसानों को अपने गांव या आसपास के क्षेत्रों में ही धान विक्रय की सीधी सुविधा मिल सकेगी. इससे धान लेकर दूरस्थ उपार्जन केंद्रों तक जाने की आवश्यकता काफी हद तक कम हो जाएगी, जिससे किसानों के परिवहन पर होने वाले खर्च में सीधी बचत होगी.

अब तक जिन उपार्जन केंद्रों पर किसानों की अधिक संख्या के कारण भीड़ और लंबी प्रतीक्षा की स्थिति निर्मित होती थी, वहां भी नए केंद्र खुलने से दबाव कम होगा. किसानों का आवागमन विभिन्न केंद्रों में विभाजित हो जाने से धान की तौल, गुणवत्ता परीक्षण और अन्य आवश्यक प्रक्रियाओं को अधिक व्यवस्थित ढंग से पूरा करने में मदद मिलेगी. 

इस व्यवस्था से किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए कम समय देना पड़ेगा और वे अपने अन्य कृषि कार्यों तथा आवश्यक गतिविधियों के लिए समय निकाल सकेंगे. विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों को इस व्यवस्था से बहुत बड़ी सुविधा मिलने की अपेक्षा है.

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दो लाख से अधिक पंजीकृत किसानों को सीधा लाभ

छत्तीसगढ़ में स्वीकृत किए गए 360 नए धान उपार्जन केंद्रों से दो लाख से अधिक पंजीकृत किसानों को सीधा लाभ प्राप्त होगा. इन सभी किसानों को नए केंद्रों के माध्यम से टोकन प्राप्त करने और निर्धारित समय सीमा के भीतर धान विक्रय करने की बेहतर सुविधा उपलब्ध होगी. नए उपार्जन केंद्रों के संचालन से संपूर्ण धान खरीदी की क्षमता का विस्तार होगा.

एक ही समय में अधिक केंद्रों पर खरीदी का कार्य संचालित होने से अधिक संख्या में किसानों का धान निर्धारित अवधि के भीतर खरीदा जा सकेगा. इससे पुराने केंद्रों पर किसानों की निर्भरता कम होगी और धान बेचने के लिए की जाने वाली अनावश्यक प्रतीक्षा की समस्या समाप्त होगी. 

राज्य सरकार का यह प्रयास है कि धान खरीदी की व्यवस्था ऐसी बने, जिसमें किसानों को कम दूरी तय करनी पड़े, कम समय लगे और उनकी उपज का विक्रय पूरी तरह से सुचारू रूप से संपन्न हो सके.

15 नवंबर से 15 जनवरी तक चलेगी धान खरीदी की प्रक्रिया

राज्य सरकार ने खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के लिए धान खरीदी की समय अवधि 15 नवंबर 2026 से 15 जनवरी 2027 तक निर्धारित की है. इस निर्धारित अवधि के दौरान प्रदेश के सभी पंजीकृत किसानों से धान की खरीदी की जाएगी. धान खरीदी का कार्य प्रारंभ होने से पहले ही उपार्जन केंद्रों पर आवश्यक तैयारियां पूरी करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि किसानों को शुरुआत से ही सभी व्यवस्थित सुविधाएं मिल सकें.

नए केंद्रों की स्वीकृति मिल जाने से खरीदी कार्य को अधिक विकेंद्रीकृत बनाने में बड़ी सहायता मिलेगी. इससे सीमित केंद्रों पर किसानों की भीड़ एकत्र होने के बजाय विभिन्न केंद्रों पर धान खरीदी की प्रक्रिया समानांतर रूप से व्यवस्थित ढंग से संचालित की जा सकेगी.

‘तुंहर टोकन’ मोबाइल एप से 24 घंटे ऑनलाइन टोकन की सुविधा

धान विक्रय के लिए किसानों को समितियों के बार-बार चक्कर लगाने और टोकन प्राप्त करने के लिए लंबी कतारों में खड़े होने की समस्या से निजात दिलाने के उद्देश्य से इस वर्ष भी ‘तुंहर टोकन’ मोबाइल एप के माध्यम से ऑनलाइन टोकन की व्यवस्था की गई है. किसान अपने मोबाइल फोन का उपयोग करके घर बैठे ही धान विक्रय के लिए टोकन प्राप्त कर सकेंगे.

यह सुविधा 24 घंटे उपलब्ध रहेगी, जिससे किसानों को अपनी सुविधा के अनुसार टोकन प्राप्त करने का अवसर मिलेगा और टोकन लेने के लिए किसी निर्धारित समय पर समिति पहुंचने की बाध्यता नहीं रहेगी. ऑनलाइन टोकन व्यवस्था से किसानों को धान विक्रय की पूर्व तैयारी करने में सुविधा होगी और वे निर्धारित तिथि के अनुसार धान के परिवहन एवं विक्रय की योजना बना सकेंगे. 

इससे उपार्जन केंद्रों पर अनावश्यक भीड़ को नियंत्रित करने और पूरी प्रक्रिया को व्यवस्थित बनाए रखने में मदद मिलेगी.

2 से 5 नवंबर तक ट्रायल रन और 10 नवंबर से मिलेंगे टोकन

धान खरीदी व्यवस्था को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए राज्य सरकार ने अग्रिम तैयारियों पर विशेष जोर दिया है. इसके तहत 2 नवंबर से 5 नवंबर 2026 तक सभी समितियों में ट्रायल रन का आयोजन किया जाएगा. इस दौरान टोकन संबंधी प्रक्रियाओं और आवश्यक तकनीकी व्यवस्थाओं का परीक्षण किया जाएगा, ताकि वास्तविक खरीदी शुरू होने से पहले संभावित समस्याओं की पहचान करके उनका समाधान किया जा सके.

इसके पश्चात किसानों के लिए 10 नवंबर 2026 से टोकन प्राप्त करने की व्यवस्था प्रारंभ कर दी जाएगी, जिससे किसानों को 15 नवंबर से शुरू होने वाली धान खरीदी के लिए पहले से तैयारी करने का पर्याप्त अवसर मिल सके.

समय और परिवहन खर्च की बचत से आर्थिक लाभ

नए उपार्जन केंद्रों की स्थापना का एक प्रमुख उद्देश्य धान विक्रय से जुड़े किसानों के अतिरिक्त खर्च को कम करना है. दूरस्थ उपार्जन केंद्रों तक धान पहुंचाने के लिए किसानों को परिवहन की व्यवस्था करनी पड़ती है, जिससे दूरी बढ़ने पर खर्च और समय दोनों अधिक लगते हैं. 

नए केंद्रों के माध्यम से धान विक्रय की सुविधा नजदीक मिलने से किसानों को दोनों स्तरों पर राहत मिलेगी. खरीदी केंद्रों पर भीड़ कम होने से किसानों की श्रमशक्ति और समय की बचत होगी. 

राज्य सरकार की मंशा है कि किसानों को धान का निर्धारित मूल्य मिलने के साथ ही विक्रय प्रक्रिया में होने वाले अनावश्यक खर्च और परेशानियों से भी पूर्ण राहत मिले तथा धान खरीदी के बाद समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित किया जा सके.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP