गुजरात हाईकोर्ट: सोमनाथ मंदिर के पास मांसाहारी भोजन पर बैन बहाल
सोमनाथ मंदिर के पास नॉनवेज फूड पर बैन जारी रहेगा. गुजरात हाईकोर्ट की डिविजन बेंच ने सिंगल जज के उस फैसले पर स्टे लगा दिया है, जिसमें मांसाहारी भोजन की बिक्री पर लगी रोक को हटा दिया गया था.
अहमदाबाद । डेस्क: गुजरात उच्च न्यायालय की एक डिविजन बेंच ने शुक्रवार को सोमनाथ मंदिर के आसपास मांसाहारी भोजन की तैयारी, बिक्री और भंडारण पर लगे प्रतिबंध को फिर से बहाल कर दिया है. कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश (ACJ) मनश रंजन पाठक और न्यायमूर्ति निर्जर एस देसाई की डिविजन बेंच ने सिंगल जज द्वारा बैन हटाने के कुछ ही घंटों बाद उनके फैसले पर स्टे दे दिया. राज्य सरकार द्वारा सिंगल जज के फैसले के तुरंत बाद दायर की गई अपील पर सुनवाई करते हुए अदालत ने यह अंतरिम आदेश जारी किया.
सिंगल जज के फैसले के तुरंत बाद राज्य सरकार ने दायर की अपील
सिंगल जज न्यायमूर्ति निशा एम ठकोर ने अपना फैसला अपराह्न लगभग 3 बजे सुनाया था. उस समय उनका निर्णय अदालत की वेबसाइट पर प्रकाशित भी नहीं हुआ था कि राज्य सरकार ने अपील दायर कर दी. डिविजन बेंच ने शाम को लगभग 5:30 बजे, यानी ढाई घंटे के भीतर ही इस अपील पर सुनवाई की.
इससे पहले, जिला मजिस्ट्रेट ने 10 जुलाई को एक प्रारंभिक अधिसूचना जारी कर सोमनाथ मंदिर के आसपास के निर्दिष्ट क्षेत्रों में दुकानों, रेस्तरां, होटलों और सड़क किनारे के स्टॉलों में मांस, मछली और मांसाहारी व्यंजनों की बिक्री, भंडारण और तैयारी पर प्रस्तावित प्रतिबंध के संबंध में आपत्तियां मांगी थीं.
इसके बाद 10 अगस्त को अंतिम अधिसूचना जारी कर सोमनाथ मंदिर के 500 मीटर के दायरे सहित सात निर्दिष्ट क्षेत्रों में प्रतिबंध लागू कर दिया गया था.
रेस्तरां मालिकों की याचिका और सिंगल जज की टिप्पणी
इस अधिसूचना के खिलाफ क्षेत्र के रेस्तरां मालिकों ने गुजरात हाईकोर्ट का रुख किया था. सिंगल जज ने 30 अक्टूबर को उनकी याचिका स्वीकार कर ली थी. सिंगल जज ने अपने फैसले में कहा था कि जिला मजिस्ट्रेट के पास मांसाहारी भोजन की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का अधिकार नहीं है.
न्यायमूर्ति ठकोर ने माना कि यह बैन रेस्तरां मालिकों के व्यवसाय चलाने के अधिकार में हस्तक्षेप करता है. उन्होंने टिप्पणी की कि प्राधिकारी गतिविधियों को विनियमित कर सकते हैं, लेकिन उन्हें पूरी तरह समाप्त नहीं कर सकते. विनियमन की शक्ति का अर्थ गतिविधियों का अस्तित्व बनाए रखना है, न कि उन्हें खत्म करना. साथ ही, कोर्ट ने धार्मिक भावनाओं की रक्षा के तर्क को खारिज करते हुए कहा कि भोजन का चयन व्यक्तिगत पसंद का विषय है.
डिविजन बेंच का रुख और त्यौहारों के कारण दी गई अंतरिम राहत
डिविजन बेंच के समक्ष महाधिवक्ता कमल त्रिवेदी ने तर्क दिया कि आगामी दीपावली और गुजराती नव वर्ष के दौरान लाखों श्रद्धालु सोमनाथ मंदिर और आसपास के धार्मिक स्थलों के दर्शन करेंगे. ऐसे में यदि निर्दिष्ट क्षेत्रों में मांस और मांसाहारी व्यंजनों की अनुमति दी जाती है, तो इससे श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत होंगी और क्षेत्र में असुविधा, जोखिम या खतरा पैदा हो सकता है.
राज्य सरकार के तर्कों और सुप्रीम कोर्ट तथा अन्य हाईकोर्ट्स के पूर्व फैसलों का हवाला दिए जाने के बाद डिविजन बेंच ने 10 अगस्त की अधिसूचना को बरकरार रखा और सिंगल जज के आदेश पर रोक लगा दी. अदालत ने रेस्तरां मालिकों से जवाब मांगा है और मामले की अगली सुनवाई 25 नवंबर तय की है.