ब्रिटेन गुलामी पर माफी मांगने को तैयार, लेकिन भारत पर औपनिवेशिक शासन पर खामोश
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम ने गुलामी के ऐतिहासिक पापों पर औपचारिक रूप से माफी मांगने की बात तो कही है, लेकिन वित्तीय क्षतिपूर्ति देने से साफ इनकार कर दिया है. इस पर भारतीय सांसद शशि थरूर ने कड़ा एतराज जताते हुए कहा कि ब्रिटेन द्वारा केवल गुलामी पर बात करना और भारत पर अपने औपनिवेशिक शासन के अत्याचारों पर चुप्पी साधे रखना अक्षम्य है.
नई दिल्ली । डेस्क: एंटीगुआ और बारबुडा में आयोजित होने जा रहे राष्ट्रमंडल शासनाध्यक्षों के सम्मेलन (CHOGM) से ठीक पहले ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम ने गुलामी के ऐतिहासिक व्यापार पर औपचारिक रूप से माफी मांगने का संकेत दिया है. 'द गार्डियन' में प्रकाशित अपने एक लेख में यूके के प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ट्रांसअटलांटिक दास प्रथा से प्रभावित देशों के साथ एक संरचित बातचीत की पेशकश कर रही है और वह ब्रिटिश राज्य की ओर से औपचारिक माफी की मांगों को सुनने के लिए तैयार हैं. हालांकि, उन्होंने प्रभावित देशों को किसी भी तरह का वित्तीय हर्जाना या क्षतिपूर्ति देने की संभावना को पूरी तरह खारिज कर दिया है.
वित्तीय क्षतिपूर्ति की मांग खारिज, गरीब देशों के लिए कर्ज पुनर्गठन का दिया प्रस्ताव
मैनचेस्टर के पूर्व मेयर रह चुके प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम ने तर्क दिया कि ब्रिटेन की मौजूदा जनता को एक अलग दौर और अलग कानूनी परिस्थितियों में हुए ऐतिहासिक अपराधों के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता. उन्होंने वित्तीय मुआवजे के बजाय पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री गॉर्डन ब्राउन के नेतृत्व में राष्ट्रमंडल के सबसे गरीब देशों के लिए एक कर्ज पुनर्गठन पहल की घोषणा की है, साथ ही जलवायु संकट से निपटने के लिए ऊर्जा परिवर्तन में सहायता देने का वादा किया है.
गौरतलब है कि ब्रिटेन ने 1807 में दास व्यापार को समाप्त करना शुरू किया था और 1833 में गुलामी का उन्मूलन किया था, जिसके बाद ब्रिटिश सरकार ने गुलामों को तो कुछ नहीं दिया लेकिन गुलाम मालिकों को 20 मिलियन पाउंड का मुआवजा दिया था.
शशि थरूर का पलटवार: औपनिवेशिक अत्याचारों और भारत की लूट पर माफी न मांगना अक्षम्य
ब्रिटिश प्रधानमंत्री के इस रुख पर कांग्रेस सांसद और लेखक डॉ. शशि थरूर ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है. भारत में ब्रिटिश उपनिवेशवाद के दुष्प्रभावों पर विस्तार से लिख चुके थरूर ने गुलामी पर माफी की इच्छा का तो स्वागत किया, लेकिन ब्रिटेन द्वारा औपनिवेशिक काल के अत्याचारों को पूरी तरह नजरअंदाज करने को अक्षम्य बताया.
उन्होंने कहा कि ब्रिटेन ने भारत और अन्य उपनिवेशों में जो लूट, तबाही और लाखों निर्दोषों की हत्या की, उसके लिए आज तक एक बार भी 'सॉरी' न कहना बेहद शर्मनाक है. थरूर ने स्पष्ट किया कि यद्यपि हर्जाने की कोई भी राशि ब्रिटिश शोषण की भरपाई नहीं कर सकती, फिर भी औपनिवेशिक दौर के भयानक विनाश के लिए ब्रिटेन द्वारा नैतिक प्रायश्चित किया जाना अत्यंत आवश्यक है.