बाघ की खाल के साथ महाराष्ट्र के दो पुलिसकर्मी गिरफ्तार
रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में वन विभाग और वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (WCCB) की एक संयुक्त टीम ने एक बड़े अंतरराज्यीय वन्यजीव तस्करी रैकेट का भंडाफोड़ किया है. मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस तस्करी में शामिल मुख्य आरोपी पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र के दो पुलिसकर्मी हैं.
अधिकारियों के मुताबिक, दोनों के पास से दो बाघों की खालें बरामद की गई हैं, जबकि इनमें से एक आरोपी के घर की तलाशी लेने पर भारी मात्रा में प्रतिबंधित पैंगोलिन के शल्क भी मिले हैं.
वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि यह कार्रवाई छत्तीसगढ़-महाराष्ट्र सीमा से सटे पश्चिम भानुप्रतापपुर वन मंडल के बांदे इलाके में सोमवार और मंगलवार की दरमियानी रात को की गई. पुलिसकर्मी बाबूराव मडावी और बिजेश्वर गेडाम एक मोटरसाइकिल पर बाघ की दो खालें ले जा रहे थे, तभी एंटी-पोचिंग यूनिट और वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो की टीम ने उन्हें रंगे हाथों धर दबोचा.
दोनों आरोपियों के खिलाफ वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है.
गिरफ्तारी के बाद जब आरोपी पुलिसकर्मी गेडाम से कड़ाई से पूछताछ की गई, तो उसकी निशानदेही पर महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले के अहेरी में स्थित उसके घर पर छापेमारी की गई. वहां से मिली पैंगोलिन के शल्कों की बड़ी खेप इस बात का साफ इशारा करती है कि यह नेटवर्क कई संरक्षित वन्यजीव प्रजातियों की तस्करी में लिप्त था.
शुरुआती जांच में सामने आया है कि दोनों पुलिसकर्मी इस अंतरराज्यीय शिकार नेटवर्क में बिचौलियों के रूप में काम कर रहे थे.
उदंती सीता नदी टाइगर रिजर्व के अधिकारियों के अनुसार, प्राथमिक जांच से पता चलता है कि इन बाघों का शिकार बस्तर के इंद्रावती टाइगर रिजर्व-अबूझमाड़ क्षेत्र में किया गया था, जो मध्य भारत में बाघों के सबसे महत्वपूर्ण आवासों में से एक माना जाता है.
यह पूरी कार्रवाई 'ऑपरेशन सेफ पैसेज' के तहत की गई, जिसका मकसद महाराष्ट्र के गढ़चिरौली से लेकर छत्तीसगढ़ के इंद्रावती, अबूझमाड़, उदंती सीता नदी और ओडिशा के सुनाबेड़ा वन्यजीव अभयारण्य तक फैले लगभग 400 किलोमीटर लंबे वन्यजीव गलियारे को सुरक्षित रखना है. फिलहाल वन विभाग की टीमें इस रैकेट से जुड़े मुख्य शिकारियों को पकड़ने के लिए लगातार छापेमारी कर रही हैं.