सुकमा: पुलिस परिवारों की महिलाओं को मिल रहा स्वावलंबन का नया मंच
बस्तर के सुकमा जिले में पुलिस बल के परिवारों की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए 'सेवा पथ - एक पहल' की शुरुआत की गई है. इस नि:शुल्क सिलाई प्रशिक्षण के जरिए 150 महिलाओं को स्वरोजगार और आर्थिक सुरक्षा का नया अवसर मिल रहा है.
सुकमा । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित सुकमा जिले में शांति और सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ अब सामाजिक बदलाव की एक नई बयार बह रही है. दूरदराज और कठिन इलाकों में तैनात सुरक्षाकर्मियों के परिवारों को सशक्त बनाने के लिए सुकमा जिला पुलिस ने 'सेवा पथ - एक पहल' नाम से एक कल्याणकारी योजना की शुरुआत की है.
इस योजना के तहत पुलिस लाइन परिसर में एक नि:शुल्क सिलाई प्रशिक्षण केंद्र खोला गया है, जहां पहले बैच में पुलिस परिवारों की 150 महिलाओं को तीन महीने का गहन व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है.
इस पहल का मुख्य उद्देश्य अग्रिम मोर्चे पर डटे जवानों की घर-गृहस्थी संभालने वाली महिलाओं को हुनरमंद बनाकर उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है. सुकमा पुलिस अधीक्षक मयंक गुर्जर ने बताया कि हर वर्दीधारी के पीछे उसका परिवार खड़ा होता है. जब जवान दुर्गम इलाकों में गश्त पर होते हैं, तब घर की पूरी जिम्मेदारी ये महिलाएं ही उठाती हैं. वास्तविक सामाजिक सुरक्षा की शुरुआत अपने घर से ही होनी चाहिए, इसलिए इस अनदेखे वर्ग की जरूरतों को समझते हुए इस दिशा में ठोस कदम उठाया गया है.
कार्यक्रम के दौरान पहुंचे संजीव कृष्ण ठाकुर महाराज ने भी इस प्रयास की सराहना की. उन्होंने कहा कि महिलाओं का सशक्तिकरण ही एक प्रगतिशील समाज की आधारशिला है. इस तरह के ज़मीनी प्रयास केवल कौशल विकास तक सीमित नहीं रहते, बल्कि महिलाओं में आत्मविश्वास जगाकर उनके परिवारों को दीर्घकालिक आर्थिक सुरक्षा प्रदान करते हैं.
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा चलाए जा रहे जन-कल्याणकारी और आत्मनिर्भर अभियानों से प्रेरित यह पहल सिर्फ सिलाई सिखाने तक सीमित नहीं है. इसका असली मकसद महिलाओं को आत्मसम्मान, गरिमा और स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ना है.
सुकमा में अब सुरक्षा का दायरा केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक विकास और करुणा की मजबूत नींव पर एक बेहतर भविष्य गढ़ने की ओर बढ़ रहा है.