यूरोप में महंगाई और जीवन-यापन का संकट: फ्रांस से इटली तक सड़कों पर उतरे लाखों लोग
बढ़ती महंगाई और बुनियादी सुविधाओं की कमी से परेशान पूरे यूरोप में जनआक्रोश की लहर दौड़ पड़ी है. फ्रांस से लेकर इटली तक लाखों लोग सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, जो कई जगहों पर हिंसक झड़पों में बदल गया है.
पेरिस/रोम/ब्रासेल्स । डेस्क: जीवन-यापन की बढ़ती लागत, कम वेतन और आवास की विकराल होती समस्याओं के विरोध में पूरा यूरोप इस समय भारी अशांति के दौर से गुजर रहा है. फ्रांस, बेल्जियम, इटली और पुर्तगाल जैसे प्रमुख यूरोपीय देशों में सैकड़ों-हजारों लोग एक साथ सड़कों पर उतर आए हैं. हालांकि ये सभी प्रदर्शन अलग-अलग और असंगठित तरीके से आयोजित किए गए थे, लेकिन इनका साझा कारण नागरिकों का आर्थिक असंतोष है. इस अभूतपूर्व जनआक्रोश ने यूरोपीय संघ के कई देशों की सरकारों पर राजनीतिक और प्रशासनिक दबाव बेहद बढ़ा दिया है.
फ्रांस में सबसे भीषण बवाल, 1200 लोग गिरफ्तार
यूरोपीय विरोध प्रदर्शनों का मुख्य केंद्र फ्रांस बना हुआ है, जहां पिछले कई दशकों में सबसे उग्र और तनावपूर्ण दिन देखा गया. गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, देशभर में करीब 5,500,000 से अधिक लोग सड़कों पर उतरे. शुरुआत में छात्रों के आंदोलन से शुरू हुआ यह प्रदर्शन देखते ही देखते उग्र झड़पों, आगजनी और दुकानों में लूटपाट में बदल गया. उपद्रवियों ने सरकारी भवनों, आलीशान शोरूम्स और सुपरमार्केट्स को निशाना बनाया तथा पुलिस वाहनों पर हमला कर दिया.
फ्रांसीसी प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू ने स्थिति का जायजा लेते हुए बताया कि हिंसा के मामले में 1200 लोगों को हिरासत में लिया गया है, जबकि सुरक्षा में तैनात 150 पुलिस अधिकारी घायल हुए हैं. लिमोगेस शहर में नकाबपोश प्रदर्शनकारियों द्वारा लगाई गई आग में 140 साल पुराना ऐतिहासिक टाउन हॉल जलकर खाक हो गया, वहीं मार्सिले, लील और ल्योन जैसे प्रमुख शहरों में भी सरकारी संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचाया गया है. राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन ने इस हिंसा पर सख्त रुख अपनाते हुए दोषियों को कानूनी कटघरे में खड़ा करने और कड़ी सजा देने का वादा किया है.
बेल्जियम और पुर्तगाल में भी बिगड़े हालात
बेल्जियम की राजधानी ब्रासेल्स में विश्वविद्यालय पंजीकरण शुल्क बढ़ाने के खिलाफ छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा. प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को वॉटर कैनन और आंसू गैस के गोलों का सहारा लेना पड़ा. इसके अलावा लीज शहर में भी पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक टकराव दर्ज किया गया.
दूसरी ओर, पुर्तगाल की राजधानी लिस्बन में भी दसियों हजार लोगों ने विशाल मार्च निकाला. वहां के नागरिक आसमान छूती महंगाई, कम मजदूरी और घरों की अत्यधिक कीमतों से बेहाल हैं. वर्ष 2017 के बाद से पुर्तगाल में मकानों के दाम दोगुने से अधिक हो चुके हैं और नए किराए में भी बेतहाशा वृद्धि हुई है. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार जनता की व्यावहारिक समस्याओं से पूरी तरह कट चुकी है, जबकि संसदीय मामलों के मंत्री का कहना है कि सरकार सड़कों के दबाव में झुकने वाली नहीं है.
इटली के मिलान में पुलिस से भिड़े उपद्रवी
इटली का वित्तीय केंद्र मिलान भी इस विरोध की आंच से अछूता नहीं रहा. मिलान के प्रसिद्ध पियाज़ा डेल डुओमो और आसपास के व्यापारिक इलाकों में प्रदर्शनकारियों ने जमकर उत्पात मचाया. युद्ध और महंगाई के खिलाफ शुरू हुआ यह मार्च उस वक्त हिंसक हो गया जब नकाबपोश युवकों ने पुलिस बल पर पत्थर और कंक्रीट के टुकड़े फेंकने शुरू कर दिए. पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पानी की बौछारों का प्रयोग किया. इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने हिंसा की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा कि विरोध प्रदर्शन करना हर नागरिक का अधिकार है, लेकिन शहरों को आग के हवाले करना किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं है.
यूरोप में और गहरा सकता है असंतोष का दायरा
विशेषज्ञों का मानना है कि फ्रांस इस पूरे आंदोलन का केंद्र बिंदु है और अब यह आक्रोश धीरे-धीरे पूरे महाद्वीप में पैर पसार रहा है. जर्मनी, ऑस्ट्रिया और ग्रीस जैसे देशों में भी ऐसे ही आंदोलनों की सुगबुगाहट शुरू हो चुकी है, जहां आने वाले दिनों में बड़े प्रदर्शन देखने को मिल सकते हैं. शिक्षा के लिए कम बजट, लगातार बढ़ती महंगाई और युवाओं का अनिश्चित भविष्य इन प्रदर्शनों की मुख्य जड़ें हैं. आगामी महीनों में यूरोप के कई बड़े देशों में चुनाव होने वाले हैं, ऐसे में यह आर्थिक और सामाजिक असंतोष वहां की भावी राजनीति की दिशा तय करने में बड़ी भूमिका निभाएगा.