TMC: 30 अक्टूबर को चुनाव आयोग में ममता और ऋतब्रत गुट की सुनवाई
तृणमूल कांग्रेस के चुनाव चिह्न और असली पहचान को लेकर छिड़ी कानूनी लड़ाई अब अंतिम दौर में है. चुनाव आयोग ने 30 अक्टूबर को ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले दोनों विरोधी गुटों को संयुक्त सुनवाई के लिए दिल्ली बुलाया है.
नई दिल्ली । डेस्क: पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के अस्तित्व और नियंत्रण को लेकर जारी अंदरूनी लड़ाई अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है. ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व वाले भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने TMC के दोनों विरोधी गुटों को 30 अक्टूबर को दिल्ली स्थित 'निर्वाचन सदन' में एक साझा सुनवाई के लिए समन भेजा है.
इस संयुक्त सुनवाई में मुख्य चुनाव आयुक्त और आयोग की पूर्ण पीठ यह तय करेगी कि तृणमूल कांग्रेस का आधिकारिक नाम, चुनाव चिह्न और पार्टी की संपत्ति किस गुट को मिलेगी.
यह विवाद मई में आए विधानसभा चुनाव परिणामों के बाद शुरू हुआ था, जब पार्टी में बड़ा विभाजन देखने को मिला. वर्तमान में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाला मुख्य दल और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाला विद्रोही गुट आमने-सामने हैं.
स्थिति यह है कि TMC के 80 विधायकों में से 60 से अधिक विधायक ऋतब्रत गुट के साथ चले गए हैं. इसके अलावा लोकसभा के 28 में से 20 सांसदों ने पार्टी छोड़कर भाजपा के सहयोगी दल NCPI का दामन थाम लिया, जबकि राज्यसभा के चार सदस्यों ने इस्तीफा देकर भाजपा के टिकट पर दोबारा उच्च सदन में प्रवेश किया है.
मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचने के बाद, शीर्ष अदालत ने 28 सितंबर को चुनाव आयोग को निर्देश दिया था कि वह तीन महीने के भीतर इस गुटबाजी विवाद का निपटारा करे. इसी आदेश के तहत आयोग ने दोनों पक्षों को 26 अक्टूबर तक अपने-अपने सांगठनिक सदस्यों के समर्थन वाले हलफनामे जमा करने का समय दिया है.
इस बीच, ममता बनर्जी समर्थक गुट ने राज्य प्रशासन पर विद्रोही गुट को पुलिस की मदद से शह देने का आरोप लगाते हुए संवैधानिक अधिकारियों के समक्ष शिकायत दर्ज कराई है.
तृणमूल के ममता समर्थकों ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए चेतावनी दी है कि यदि आयोग का फैसला न्यायसंगत नहीं रहा, तो वे इस कानूनी लड़ाई को दोबारा सुप्रीम कोर्ट ले जाएंगे. 30 अक्टूबर को होने वाली इस सुनवाई पर अब पूरे देश की नजरें टिकी हुई हैं.