सुप्रीम कोर्ट: पाटन चुनाव याचिका मामले में हस्तक्षेप से इनकार
नई दिल्ली । डेस्क: सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पाटन विधानसभा सीट से उनके निर्वाचन को चुनौती देने वाली भाजपा नेता विजय बघेल की याचिका पर चल रही कार्यवाही में हस्तक्षेप करने से फिलहाल इनकार कर दिया है. अदालत ने संकेत दिया है कि इस याचिका में देरी से जुड़े भूपेश बघेल के एतराज और कानूनी पहलुओं की जांच अब छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय कर सकता है.
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने भूपेश बघेल की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और विवेक तन्खा की दलीलें सुनीं. वरिष्ठ वकीलों ने तर्क दिया कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 81 के तहत निर्धारित 45 दिनों की सीमा के बाद यह याचिका दायर की गई है, इसलिए इसे शुरुआत में ही खारिज कर दिया जाना चाहिए था.
सिब्बल ने अदालत का ध्यान विजय बघेल द्वारा जमा किए गए हलफनामे की तारीख की ओर दिलाते हुए कहा कि चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद 45 दिन की अवधि 17 जनवरी 2024 को समाप्त हो गई थी, जबकि हलफनामे पर 22 जनवरी की तारीख दर्ज है.
इस पर शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि इन तारीखों और उनके कानूनी प्रभाव को साक्ष्यों के जरिए साबित करना होगा और फिलहाल इस चरण में कार्यवाही में हस्तक्षेप करने का कोई ठोस आधार नहीं है.
गौरतलब है कि भाजपा नेता विजय बघेल ने भूपेश बघेल पर चुनाव प्रचार थमने के बाद भी पाटन में जुलूस निकालकर 48 घंटे के साइलेंस पीरियड के उल्लंघन का आरोप लगाया है और उनका निर्वाचन रद्द करने की मांग की है.