छत्तीसगढ़ में गांधी जयंती पर शुरू होंगी 6 ओपन जेल
रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ सरकार राज्य में जेल सुधार और कैदियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाने जा रही है. आगामी 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के अवसर पर प्रदेश में 6 नई ओपन जेलों का उद्घाटन किया जाएगा.
इस पहल का मुख्य उद्देश्य जेल की ऊंची दीवारों के मानसिक दबाव को दूर करना और अच्छा आचरण रखने वाले कैदियों को दिन के समय बाहर काम करने की स्वतंत्रता देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है.
इस नई व्यवस्था के तहत रायपुर, दुर्ग, जगदलपुर, बेमेतरा, अंबिकापुर और बिलासपुर में कुल 350 कैदियों के रहने की व्यवस्था की गई है. इसके अंतर्गत बेमेतरा में 200 पुरुष, दुर्ग में 50 पुरुष, जगदलपुर में 50 (25 पुरुष व 25 महिला), रायपुर में 25 महिला, अंबिकापुर में 15 पुरुष और बिलासपुर में 10 (5 पुरुष व 5 महिला) कैदियों की क्षमता निर्धारित की गई है.
पात्र कैदी दिन के समय अपनी योग्यता के अनुसार कृषि, निर्माण, सिलाई, हस्तशिल्प या स्वरोजगार जैसे कार्यों के लिए बाहर जा सकेंगे और शाम ढलते ही उन्हें परिसर में वापस लौटना होगा.
हालांकि, ओपन जेल में प्रवेश का अधिकार सख्त नियमों के अधीन है. राज्य राजपत्र के दिशानिर्देशों के अनुसार केवल वही कैदी इसके पात्र होंगे जिनकी आयु 30 से 60 वर्ष के बीच हो, जिनका जेल में आचरण निष्कलंक रहा हो और जिन्होंने अपनी न्यूनतम 10 वर्ष या आजीवन कारावास की सजा में से कम से कम सात साल पूरे कर लिए हों.
देशविरोधी अपराधों, सशस्त्र बलों के खिलाफ अपराधों, मृत्युदंड से आजीवन कारावास में बदले गए मामलों तथा आईपीसी की 44 और बीएनएस की 46 धाराओं के तहत दोषी ठहराए गए अपराधियों समेत 11 श्रेणियों के कैदियों को इस योजना से पूरी तरह बाहर रखा गया है.
जेल विभाग के अधिकारियों के अनुसार, ये ओपन जेलें राज्य के मौजूदा बुनियादी ढांचे का उपयोग करके बनाई जा रही हैं, जिससे सरकारी खजाने पर कोई अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा.
वर्तमान में छत्तीसगढ़ की 33 जेलों (5 केंद्रीय, 20 जिला और 8 उप-जेल) में 14,383 की कुल क्षमता के मुकाबले 18,700 से अधिक कैदी बंद हैं. ऐसे में यह पहल न केवल जेलों में भीड़ के दबाव को कम करने में मददगार साबित होगी, बल्कि अनुशासित कैदियों को सम्मानजनक और सामान्य नागरिक जीवन में लौटने का एक वास्तविक अवसर भी प्रदान करेगी.