सिंहदेव ने रामगढ़ पहाड़ी को बचाने सीएम को लिखी चिट्ठी
सरगुजा | संवाददाताः छत्तीसगढ़ के पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव ने सरगुजा की रामगढ़ पहाड़ी को लेकर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को चिट्ठी लिखी है. उन्होंने रामगढ़ की पहाड़ियों के संरक्षण की मांग की है.
टीएस सिंहदेव ने चिट्ठी में लिखा है कि रामगढ़ की पहाड़ी सरगुजा के लोगों की आत्मा है. यह आदिवासी आस्था और सरगुजा का महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है. रामदेव पहाड़ी का प्राकृतिक, धार्मिक, पुरातात्विक, सामाजिक महत्व है.
उन्होंने कहा है कि भगवान श्रीराम के वनवास काल से रामगढ़ जुड़ा है. यहां संरक्षित धरोहर सीता बेंगरा और जोगीमारा गुफा के साथ विश्व की प्राचीन नाट्यशाला है. इस क्षेत्र का अपना एक पर्यावरणीय प्रभाव और वन्यजीव का आवासीय स्थल है जो इस खदान के 10 किमी के दायरे में है.
सिंहदेव ने कहा है कि यहां महाकवि कालिदास ने मेघदूत जैसी अमर कृति की रचना की थी. शिखर पर स्थित प्राचीन राम-सीता मंदिर है. जहां लाखों श्रद्धालु दर्शन करने पहाड़ी पर जाते हैं.
उन्होंने कहा कि इन दिनों मानव हस्तक्षेप से पहाड़ी में समस्याएं सामने आई है. पहाड़ी में पूरी तरह चट्टानें ढह रही है. माइनिंग का काम बहुत ही तेजी से चल रहा है. पहाड़ियों को एक बार नुकसान पहुंचेगा तो ठीक नहीं हो सकेगा. वर्तमान में संचालित पीकेईबी खदान में विस्फोट के कारण रामगढ़ की पहाड़ी दरक रही है.
सिंहदेव ने अपने 6 पन्नों के पत्र में लिखा है कि वन मंडल अधिकारी (डीएफओ) ने केते एक्सटेंशन खदान के संबंध में प्रस्तुत स्थल निरीक्षण प्रतिवेदन में 1742.155 हेक्टेयर वन भूमि के डायवर्सन की अनापत्ति में गलत रिपोर्ट दी है. स्थल निरीक्षण प्रतिवेदन के बिंदु 10 में रामगढ़ से केते एक्सटेंशन खदान की दूरी 11 किलोमीटर बताई गई है. यह तथ्यात्मक रूप से गलत है.
प्रतिवेदन में प्राचीन राम मंदिर का उल्लेख नहीं
उन्होंने कहा है कि यदि इस खनन को स्वीकृति प्रदान की जाती है तो यह रामगढ़ पहाड़ी के अस्तित्व के लिए गंभीर खतरा होगा. राजस्थान राज्य विद्युत निगम लिमिटेड द्वारा तैयार सर्वेक्षण रिपोर्ट में खनन क्षेत्र के कोने केईएक्स 3 से सीता बेंगरा की दूरी 11 किलोमीटर बताई गई है जो वास्तव में 9.53 किलोमीटर है.
उन्होंने बताया कि प्रतिवेदन में रामगढ़ के प्राचीन राम मंदिर का उल्लेख नहीं है, जिसकी दूरी 9.13 किलोमीटर है. रामगढ़ का मंदिर एवं पूरा पहाड़ भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित क्षेत्र घोषित किया गया है. रामगढ़ पहाड़ से खदान के सीमा की दूरी 8.1 किलोमीटर है. वर्तमान में संचालित कोल ब्लॉक पीकेईबी की भी सीमा है. अर्थात वर्तमान में संचालित खदान भी गलत रिपोर्ट पर स्वीकृत की गई है. डीएफओ ने अपने प्रतिवेदन में लेमरू हाथी अभ्यारण का उल्लेख ही नहीं किया है, जो 10 किलोमीटर की परिधि में आता है.
कांग्रेस सरकार के समय रुकवाया था काम
टीएस सिंहदेव ने बताया कि कांग्रेस सरकार के समय में कोयला खनन को खोलने से रोका गया था. डीएफओ ने हाल ही में दो अलग-अलग आदेश जारी किया. दोनों आदेश में दिए हुए कॉर्डिनेट्स अलग हैं.
एनजीटी वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की अनुशंसा पर इसे नो गो एरिया बताया गया है. वन क्षेत्र की दो संस्थाओं ने रिपोर्ट को प्रस्तुत किया था. पहाड़ के संवर्धन, संरक्षण के लिए एक समिति का गठन किया गया था.