सरगुजा गैंगरेप: कांग्रेस ने पुलिस और मेडिकल रिपोर्ट पर उठाए गंभीर सवाल
अंबिकापुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में दो नाबालिग लड़कियों के साथ हुई सामूहिक दुष्कर्म की घटना ने अब राजनीतिक तूल पकड़ लिया है. इस मामले की गंभीरता को देखते हुए कांग्रेस की राष्ट्रीय सचिव और प्रदेश सह-प्रभारी जरिता लैतफलांग शनिवार शाम जांच दल के साथ पीड़ित परिवार से मिलने उनके गांव पहुंचीं.
पीड़ित बच्चियों और उनके परिजनों की आपबीती सुनने के बाद जरिता लैतफलांग इतनी अधिक भावुक हो गईं कि मीडिया से बात करते समय उनके शब्द कम पड़ गए और उन्हें दो बार रुकना पड़ा.
मीडिया से संवाद के दौरान कांग्रेस नेता ने प्रदेश सरकार और प्रशासन पर तीखा हमला बोला. उन्होंने आरोप लगाया कि 'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ' का नारा देने वाली भाजपा सरकार के राज में बेटियां कतई सुरक्षित नहीं हैं.
उन्होंने पुलिसिया कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि वारदात के बाद समय पर एफआईआर क्यों नहीं दर्ज की गई? साथ ही, उन्होंने स्थानीय डॉक्टर की मेडिकल रिपोर्ट को भी संदिग्ध बताया.
जरिता का आरोप है कि सीतापुर में हुई शुरुआती जांच में दुष्कर्म की पुष्टि नहीं की गई, जबकि बाद में अंबिकापुर में हुई जांच में हकीकत सामने आई. उन्होंने सवाल किया कि क्या मेडिकल अधिकारी किसी दबाव में काम कर रहे थे.
यह हृदयविदारक घटना 24 अप्रैल की रात की है, जब शादी समारोह से लौट रही चार सहेलियों को करीब एक दर्जन युवकों ने घेर लिया था. इनमें से दो लड़कियां भागने में सफल रहीं, लेकिन दो नाबालिगों को आरोपियों ने अपनी हवस का शिकार बनाया.
कांग्रेस जांच दल ने पीड़ित परिवार को मिल रही धमकियों पर भी चिंता जाहिर की और न्याय प्रशासन की विफलता पर सरकार को आड़े हाथों लिया.
इस दौरान पूर्व मंत्री अमरजीत भगत और अन्य स्थानीय कांग्रेस नेता भी उपस्थित रहे, जो अब इस मामले की विस्तृत रिपोर्ट प्रदेश अध्यक्ष को सौंपेंगे. पुलिस के अनुसार, इस मामले में अब तक 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें से चार नाबालिग बताए जा रहे हैं.