रायपुर एयरपोर्ट विवाद: किसान ने मांगा 3500 करोड़ का मुआवजा
रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में स्थित स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट की जमीन को लेकर एक बड़ा कानूनी विवाद सामने आया है. रायपुर के एक 53 वर्षीय किसान, अश्वनी बांधे ने देश की सर्वोच्च अदालत का दरवाजा खटखटाया है. याचिकाकर्ता का दावा है कि जिस जमीन पर वर्तमान में रायपुर हवाई अड्डे की टर्मिनल बिल्डिंग और बगीचे बने हुए हैं, वह असल में उनके पूर्वजों की है.
इस ऐतिहासिक दावे के एवज में उन्होंने सरकार से लगभग 3,500 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग की है.
याचिका के अनुसार, यह विवाद द्वितीय विश्व युद्ध के समय का है. अश्वनी बांधे का कहना है कि विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश सरकार ने सैन्य उद्देश्यों के लिए उनके परिवार की जमीन को अस्थायी रूप से अधिग्रहित किया था. नियम के मुताबिक, युद्ध समाप्त होने के बाद यह जमीन उनके परिवार को वापस सौंपी जानी थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ.
याचिकाकर्ता पिछले 35 वर्षों से इस जमीन को वापस पाने या उचित मुआवजे के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं.
इस मामले में इसी साल छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय (हाईकोर्ट) ने विवाद की नए सिरे से जांच करने के आदेश दिए थे. हालांकि, बांधे का तर्क है कि इस विषय की जांच सक्षम प्राधिकारी द्वारा पहले ही की जा चुकी है, इसलिए उन्होंने जून 2026 में सीधे सुप्रीम कोर्ट का रुख किया और मुआवजे की अपील की.
फिलहाल देश की शीर्ष अदालत ने इस याचिका पर कोई अंतिम फैसला नहीं सुनाया है और मामला अभी लंबित है.
अपने दावों को मजबूत करने के लिए याचिकाकर्ता ने कई ऐतिहासिक भूमि रिकॉर्ड, ब्रिटिश काल के अधिग्रहण से जुड़े दस्तावेज और राज्य के संस्कृति विभाग से मिले अभिलेखागार (आर्काइवल मैटेरियल) का सहारा लिया है.
इन सरकारी दस्तावेजों में कथित तौर पर युद्धकालीन हवाई पट्टी के लिए अधिग्रहित की गई जमीन के संबंध में उनके पूर्वजों के नामों का उल्लेख है. किसान द्वारा मांगी गई ₹3,500 करोड़ की भारी-भरकम राशि में पिछले कई दशकों का बकाया किराया, ब्याज और अन्य कानूनी देनदारियां शामिल हैं.