रायगढ़ : हाथियों की मौत की गुत्थी सुलझाने जुटे देशभर के विशेषज्ञ
रायगढ़ । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में लगातार हो रही हाथी शावकों की मौत और वन्यजीव संरक्षण की चुनौतियों के बीच एक बेहद अहम राष्ट्रीय कार्यशाला की शुरुआत हुई है. 'लर्निंग फ्रॉम डेड: एसेन्शियल्स ऑफ मॉर्टेलिटी इन्वेस्टिगेशन ऑफ एशियन एलिफेंट्स' विषय पर केंद्रित यह दो दिवसीय आयोजन कोतरा रोड स्थित एक निजी होटल में किया जा रहा है.
भारतीय वन्यजीव संस्थान (देहरादून), भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (बरेली) और छत्तीसगढ़ वन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य हाथियों की मृत्यु के वैज्ञानिक कारणों का सटीक विश्लेषण करना है.
इस महत्वपूर्ण कार्यशाला में देशभर के जाने-माने वन्यजीव विशेषज्ञ, जबलपुर के सीनियर डॉक्टर्स, देहरादून और आईवीआरआई बरेली के वैज्ञानिकों सहित छत्तीसगढ़ के विभागीय पशु चिकित्सक हिस्सा ले रहे हैं.
विशेषज्ञों द्वारा फील्ड स्टाफ और वन अधिकारियों को पोस्टमार्टम की आधुनिक प्रक्रियाओं, साक्ष्य जुटाने की वैज्ञानिक पद्धतियों, बीमारियों और हादसों से जुड़े आंकड़ों के तकनीकी विश्लेषण का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है.
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस तकनीकी प्रशिक्षण से जमीनी स्तर पर तैनात अमले की कार्यक्षमता मजबूत होगी, जिससे भविष्य में वन्यजीवों की मौत के मामलों की अधिक प्रभावी और वैज्ञानिक जांच सुनिश्चित की जा सकेगी.
गौरतलब है कि रायगढ़ और धरमजयगढ़ वनमंडल के अंतर्गत वर्तमान में 100 से ज्यादा हाथी सक्रिय हैं, जिसके कारण इस क्षेत्र में मानव-हाथी सह-अस्तित्व को बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है.
रायगढ़ और धरमजयगढ़ के वनमंडलाधिकारियों ने बताया कि यह कार्यशाला राज्य में हाथी संरक्षण की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी.
विशेषज्ञों के अनुभवों और आधुनिक केस स्टडीज के जरिए वन विभाग को ऐसी रणनीतियां तैयार करने में मदद मिलेगी, जिससे हाथियों की अप्राकृतिक मौतों पर लगाम लगाई जा सके और इंसानों व हाथियों के बीच टकराव को कम किया जा सके.