वनमंत्री की शह पर खदानों का निजीकरण व अवैध उत्खनन- बैज
छत्तीसगढ़ के बस्तर में कांग्रेस की न्याय पदयात्रा
दंतेवाड़ा | संवाददाता: छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में पीसीसी अध्यक्ष दीपक बैज के नेतृत्व में बस्तर के हक अधिकारों के लिए जल, जंगल, जमीन और खनिज संसाधनों को निजी उद्योगपतियों से बचाने के लिए किरंदुल से दंतेवाड़ा "छत्तीसगढ़ न्याय पदयात्रा" के चौथे दिन गुरुवार को बड़ी संख्या में कांग्रेसियों ने कलेक्ट्रेट का घेराव किया.
बैरिकेडिंग को तोड़कर कलेक्ट्रेट में दाखिल होने के प्रयास में जमकर पुलिस और कांग्रेसी कार्यकर्ताओं के बीच झूमा झटकी हुई.
पुलिस ने पानी की बौछार और चार लेयर बैरिकेडिंग कर कांग्रेसियों को अंदर जाने से रोंक दिया. जिसके बाद पीसीसी अध्यक्ष ने छतीसगढ़ के राज्यपाल के नाम जल-जंगल और खनिज संपदा बचाने के साथ निजीकरण के विरोध में कलेक्ट्रेट के बाहर ही एसडीएम को ज्ञापन सौंपा.
दरअसल बीते सोमवार से दंतेवाड़ा जिले के किरन्दुल से पदयात्रा शुरू कर 40 किलोमीटर तय कर कांग्रेसी गुरुवार को दंतेवाड़ा शहर पहुंचे और यहाँ कलेक्ट्रेट का घेराव किया.
दीपक बैज का कहना है कि दंतेवाड़ा जिले के बैलाडीला में लौह अयस्क खदानों को निजी कंपनियों को बेचा जा रहा है ,बस्तर के आदिवासियों की जल जंगल जमीन का सौदा किया जा रहा है.
इसके विरोध में कांग्रेस ने चार दिनों की पदयात्रा कर कलेक्ट्रेट का घेराव कियाप्रकृति बस्तर की मां, इसके साथ खिलवाड़ नहीं पीसीसी अध्यक्ष दीपक बैज का कहना है कि केंद्र और राज्य में भाजपा सरकार मिलकर बस्तर की खदानों का सौदा करना चाहती हैं.
इसके लिए ना ही स्थानीय पंचायत से कोई अनुमति ली जा रही है और ना ही स्थानीय आदिवासी ग्रामीणों से अनुमति ली जा रही है. छत्तीसगढ़ के मंत्री भी इन खदानों के निजीकरण के लिए पूरा साथ दे रहे हैं.
दीपक बैज ने वन मंत्री केदार कश्यप पर आरोप लगाते हुए कहा कि नई खदानों के लिए फॉरेस्ट के सारे नियमों को ताक में रखकर वन मंत्री के द्वारा अनुमति दी जा रही है, जो कि सरासर गलत है.
उन्होंने कहा कि जल, जंगल, जमीन और खनिज संसाधनों को बर्बाद किया जा रहा है. धड़ल्ले से दंतेवाड़ा में अवैध उत्खनन किया जा रहा है.
निजीकरण और बस्तर वासियों के साथ भेदभाव भरा रवैया सरकार को बंद करना चाहिए. यह प्रकृति बस्तर की मां है, इसके साथ खिलवाड़ नहीं होने देंगे.
इस पदयात्रा में पीसीसी अध्यक्ष दीपक बैज के साथ जिलाध्यक्ष अवधेश गौतम, वरिष्ठ नेता छबिंद्र कर्मा, तूलिका कर्मा, विमल सुराना, बबलू सिद्दीकी समेत सैकड़ों कांग्रेस कार्यकर्ता शामिल रहे.
कांग्रेस नेताओं का दावा है कि जनता के मुद्दों को लेकर सड़क पर उतरने वाली इस न्याय यात्रा को बस्तरवासियों का व्यापक समर्थन मिला.