गर्भवती ने अस्पताल की फर्श पर बच्चे को दिया जन्म
सूरजपुर | संवाददाताः छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में एक गर्भवती महिला द्वारा अस्पताल की फर्श पर बच्चे को जन्म देने का मामला सामने आया है. घटना भटगांव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का है.
जिस समय गर्भवती महिला प्रसव के लिए अस्पताल पहुंची वहां डॉक्टर और स्टॉफ मौजूद नहीं थे. डॉक्टर के इंतजार में महिला करीब 4 घंटे तक दर्द से तड़पती रही.
हालत ऐसे हो गए कि महिला को अस्पताल के फर्श पर ही बच्चे को जन्म देना पड़ा. इसके बाद पीड़िता ने सास के साथ फर्श की सफाई की.
मिली जानकारी के अनुसार भैयाथान ब्लॉक के ग्राम असना ढोढ़ी निवासी पीड़ित महिला कुंती बाई अपनी सास इंजोरिया बाई के साथ प्रसव के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भटगांव पहुंची थी.
अस्पताल में डॉक्टर, नर्स यहां तक वार्ड ब्वॉय भी मौजूद नहीं थे. पूछताछ करने पर दोनों को डिलीवरी रूम में भेज दिया गया.
प्रसव विभाग में जिस नर्स की ड्यूटी थी, वह भी गायब थी. उसका फोन भी बंद आ रहा था. ड्यूटी डॉक्टर शीला सोरेन का भी फोन बंद मिला.
महिला को वहां ना तो स्ट्रेचर मिला, ना ही बिस्तर. यहां तक प्रसव के लिए कोई इंतजाम भी नहीं किया गया. मजबूरी में महिला ने अपनी सास की मदद से अस्पताल के फर्श पर ही बच्चे को जन्म दिया.
प्रसव के दौरान अस्पताल की फर्श पर खून फैल गया था, जिसे पीड़िता ने अपनी सास के साथ मिलकर साफ किया. इसके बाद पीड़िता और नवजात को बिस्तर पर लिटाया गया.
करीब 4 घंटे बाद दूसरी ड्यूटी डॉक्टर साक्षी सोनी पहुंची. तब तक महिला को देखने व पूछने वाला कोई नहीं पहुंचा. बताया जा रहा है कि जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ हैं.
इस संबंध में बीएमओ डॉ. राकेश सिंह ने जांच का आश्वासन दिया है. वहीं सूरजपुर सीएमएचओ डॉ. कपिल देव पैकरा का कहना है कि मामला संज्ञान में आया है. मामले की जांच के लिए कमेटी बना दी गई है.
जांच कराई जाएगी. जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी
प्रसव से पहले मां-बच्चे की मौत
इसी तरह का एक अन्य मामला बलौदाबाजार जिले का है. यहां समय पर उपचार नहीं मिलने से एक गर्भवती महिला और उसके गर्भ में पल रहे की मौत हो गई.
जिले के लवन निवासी संतोषी साहू को प्रसव पीड़ा होने पर परिजन रविवार की रात पलारी सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र लेकर आए थे.
परिजनों का आरोप है कि वहां उसे करीब 5 घंटे तक बिना इलाज के रखा गया. परिजन उपचार के लिए बोले तो डॉक्टर नहीं है कहकर जिला अस्पताल बलौदाबाजार रेफर कर दिया.
शाम करीब 7 बजे जिला अस्पताल पहुंचने पर वहां भी समय पर उपचार नहीं मिला. परिजनों का आरोप है कि करीब तीन घंटे तक कोई भी डॉक्टर पीड़िता को देखने तक नहीं आए. नर्स द्वारा इंजेक्शन दिया गया.
इस बीच पीड़िता की हालत बिगड़ने लगी तो डॉक्टर ने किसी बड़े निजी अस्पताल ले जाने की सलाह दी.
परिजन पीड़िता को लेकर निजी अस्पताल चंदा देवी पहुंचे. वहां करीब आधे घंटे रखने के बाद डॉक्टरों ने हाथ खड़े करते हुए रायपुर रेफर कर दिया. जबकि आधे घंटे में 3000 रुपए का बिल जमा करना पड़ा.
रायपुर ले जाते समय पीड़िता की हालत ज्यादा खराब होने पर परिजन रास्ते में उन्हें पलारी अस्पताल लेकर पहुंचे. वहां डॉक्टर ने जच्चा और गर्भस्थ शिशु दोनों को मृत घोषित कर दिया.
परिजनों ने स्वास्थ्य कर्मियों और डॉक्टरों पर आरोप लगाया है कि समय पर उपचार नहीं मिलने की वजह से दोनों की जान चली गई. जिला अस्पताल जैसे बड़े संस्थान में भी लापरवाही बरती गई. परिजनों ने मामले में कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए दोषियों को सजा दिलाने की मांग की है. .