रवि, 18 अक्टू. 2026

CGKhabar

झीरम घाटी: NIA कोर्ट के फैसले को कांग्रेस ने बताया 'आधा-अधूरा न्याय'

C

CG Khabar

06 सित. 2026, 03:37 PM 2 मिनट में पढ़ें 3

दीपक बैज
दीपक बैज

रायपुर । संवाददाता: साल 2013 के बहुचर्चित झीरम घाटी नरसंहार मामले में एनआईए की विशेष अदालत द्वारा शनिवार को सुनाए गए फैसले पर छत्तीसगढ़ की राजनीति गरमा गई है. छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष दीपक बैज ने अदालत के फैसले को "आधा-अधूरा न्याय" करार देते हुए केंद्रीय जांच एजेंसी एनआईए पर गंभीर आरोप लगाए हैं. 


दीपक बैज ने कहा कि एनआईए ने राजनीतिक षड्यंत्रकारियों और शीर्ष माओवादी कमांडरों को बचाने के लिए जांच की दिशा ही बदल दी.

विज्ञापन


जगदलपुर की विशेष अदालत ने मई 2013 के उस जानलेवा हमले में शामिल 10 काडरों को दोषी ठहराया है, जिसमें छत्तीसगढ़ कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व पूरी तरह खत्म हो गया था. फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस ने तर्क दिया कि इतने बड़े पैमाने पर किए गए हमले को शीर्ष माओवादी नेताओं की भागीदारी के बिना अंजाम नहीं दिया जा सकता था.


दीपक बैज ने सवाल उठाते हुए कहा कि खुद एनआईए ने माना था कि इस हमले में 200 से अधिक नक्सली शामिल थे और 39 लोगों के खिलाफ नामजद आरोप थे. ऐसे में केवल 10 निचले स्तर के कार्यकर्ताओं के खिलाफ ही आरोप क्यों साबित हो सके? 


उन्होंने कहा कि सजा पाने वाले महज छोटे स्तर के कारिंदे हैं, जबकि इसके असली सूत्रधार और मुख्य साजिशकर्ता आज भी कानून की पकड़ से बाहर हैं.


दूसरी ओर, सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने एनआईए अदालत के फैसले का स्वागत करते हुए इसे कानून के शासन और भारतीय न्यायिक प्रणाली की बड़ी जीत बताया है. विपक्ष के अधूरे अन्वेषण के दावों को खारिज करते हुए भाजपा ने कहा कि अदालत ने पेश किए गए पुख्ता सबूतों और तथ्यों के आधार पर निर्णय लिया है. 


भाजपा ने कांग्रेस को देश की सुरक्षा से जुड़ी इस गंभीर त्रासदी पर राजनीति न करने की सलाह दी.


कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने इस नरसंहार के पीछे की गहरी साजिश को लेकर कई अनसुलझे सवाल खड़े किए. उन्होंने पूछा कि घायल पीड़ितों और प्रत्यक्षदर्शियों से एनआईए ने औपचारिक पूछताछ क्यों नहीं की? जीवित बचे लोगों ने बयान दर्ज कराने के लिए बार-बार हलफनामे दिए, लेकिन उनके बयानों को नजरअंदाज कर दिया गया. इसके अलावा, परिवर्तन यात्रा के लिए दिए गए विशेष सुरक्षा घेरे को अचानक क्यों हटाया गया और काफिले का रूट किसके आदेश पर बदला गया?  

यह खबर शेयर करें: WhatsApp Facebook
CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP