बदहाल नेशनल हाईवे, छिंदगढ़ वासियों ने किया चक्काजाम
छत्तीसगढ़ के बस्तर को सुकमा से जोड़ने वाले बदहाल राष्ट्रीय राजमार्ग पर चक्काजाम
सुकमा | संवाददाताः छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले को सुकमा जिले से जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग 30 की खस्ताहाल हालत को लेकर लोगों ने चक्काजाम कर आंदोलन किया.
बस्तर से छिंदगढ़ तक नेशनल हाईवे-30 की हालत बद से बदतर हो चुकी है.
खासकर दरभा के बाद झीरम घाटी से लेकर तोंगपाल, छिंदगढ़ पाकेला तक सड़क में बड़े-बड़े गड्ढे हो चुके हैं.
सारा डामर सड़क से उखड़ चुका है और वाहनों की आवाजाही के चलते सड़क किनारे की आबादी धूल से त्रस्त है.
सड़क किनाले बसी बस्ती के लोग उड़ती धूल से परेशान हैं.
जानकारी के मुताबिक पिछले साल एनएच -30 के नवीनीकरण का प्रस्ताव सुकमा जिला प्रशासन के द्वारा मंजूर किया गया था.
इसके बावजूद एक साल बीतने के बाद भी ठेकेदार और पीडब्ल्यूडी के इंजीनियर सिर्फ नाप-जोख कर खानापूर्ति करते रहे और समस्या बढ़ती चली गई.
एनएच पर आधे अधूरे निर्माण कार्य और घटिया पेच वर्क को लेकर अब लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है.
जिसके चलते शनिवार की सुबह बड़ी संख्या में छिंदगढ़ वासियों ने नेशनल हाईवे-30 पर चक्का जाम कर दिया.
आक्रोशित लोगों ने जिला प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए सड़क की दुर्दशा को लेकर ठेकेदार और पीडब्ल्यूडी अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया है.
छिंदगढ़ वासियों का आरोप है कि पिछले कई सालों से जिला प्रशासन के द्वारा इस सड़क को बना लेने का आश्वासन दिया जा रहा है, लेकिन कुछ नहीं हुआ.
खस्ताहाल सड़क से उड़ती धूल ने लोगों का जीना मुहाल कर रखा है. यही नहीं सड़क हादसे भी आम बात हो चले हैं.
खासकर झीरम घाटी टाहकावड़ा और छिंदगढ़ तक की सड़क की स्थिति काफी खराब हो चुकी है.
मरम्मत के नाम पर हर साल लाखों रुपए खर्च किए जाते हैं, लेकिन घटिया निर्माण के चलते सड़क की हालत फिर वैसे ही हो जाती है.
जिससे गुस्साए लोगों ने घंटों तक सड़क पर चक्का जाम किया.
मौके पर पहुंचे जिला प्रशासन और पीडब्ल्यूडी अधिकारियों के लिखित में आश्वासन मिलने के बाद छिंदगढ़ वासियों ने चक्का जाम हहर साल पेचवर्क के नाम पर लाखों खर्च
वर्तमान में जगदलपुर के केशलूर से लेकर झीरम घाटी पाकेला और छिंदगढ़ तक सड़क की हालत काफी खराब है.
आलम यह है कि झीरम घाटी से टाहकावाड़ा तक बदहाल सड़क पर दिखावे के लिए गड्ढों को पाटा जा रहा है और सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है.
लोगों का कहना है कि इस सड़क से गुजरने वाले भारी मालवाहकों के भार की क्षमता के मुताबिक नेशनल हाईवे की मजबूती नहीं है. इसके चलते भी सड़क बदहाल अवस्था में है.
इस मार्ग में आए दिन हो रही दुर्घटनाओं का जवाबदारी भी लेने वाला कोई नहीं है.
आलम यह है कि यह नेशनल हाईवे सिर्फ नाम मात्र का हाईवे रह गया है. मरम्मत के नाम पर केवल भ्रष्टाचार किया जा रहा है और सड़क की हालत जस की तस बनी हुई है.
झीरम घाटी सड़क से गुजरना लोगों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है.
जगह-जगह हुए बड़े गड्ढे और सड़क से पूरी तरह से डामर गायब हो जाने से धूल और अधूरे पेच वर्क की वजह से लोग काफी परेशान हो रहे हैं
सड़क चौड़ीकरण के लिए सर्वे का कनेशनल हाईवे की इस बदहाली को लेकर लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता जी.एल रावटे का कहना है कि केशलूर से लेकर सुकमा जिले के कोंटा तक करीब 205 कि.मी. तक सड़क चौड़ीकरण का प्रस्ताव भेजा गया था.
जिसे मंत्रालय से मंजूरी मिल गई है. वहां जल्द ही सर्वे का काम भी शुरू किया जाना है. जिसके लिए टीम भी गठित कर दी गयी है.
फिलहाल नेशनल हाईवे में भारी वाहनों की आवाजाही की वजह से हर साल मरम्मत का कार्य किया जा रहा है और गड्ढों को पाटा जा रहा है.
रावटे का कहना है कि सड़क चौड़ीकरण का सर्वे होने के बाद जल्द ही सड़क का निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा.
इससे पहले सड़क में लगातार पेचवर्क किया जा रहा है.ाम
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टाया.