HC: कांग्रेस नेता नागेंद्र राय की मस्तूरी गोलीकांड में अग्रिम जमानत याचिका खारिज
बिलासपुर । संवाददाता: बिलासपुर के चर्चित मस्तूरी गोलीकांड और दो लाख रुपये की सुपारी किलिंग से जुड़े मामले में आरोपी कांग्रेस नेता नागेंद्र राय को छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय से राहत नहीं मिली है. न्यायमूर्ति संजय के. अग्रवाल की एकल पीठ ने मामले की संवेदनशीलता, आरोपी की लंबी फरारी और उसके आपराधिक इतिहास को ध्यान में रखते हुए अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया.
अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि आरोपी पर हथियार मुहैया कराने जैसे बेहद संगीन आरोप हैं और वह पिछले दस महीनों से फरार रहकर पुलिस जांच से बच रहा है.
इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत 28 अक्तूबर की शाम को हुई थी, जब मस्तूरी स्थित तमेश सिंह के कार्यालय के बाहर बेखौफ बदमाशों ने अंधाधुंध फायरिंग कर दी थी. इस जानलेवा हमले में चंद्रकांत सिंह और धनेंद्र सिंह उर्फ राजू सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए थे.
पुलिस की तफ्तीश में खुलासा हुआ कि नितेश सिंह, तमेश सिंह, चंद्रकांत और राजू सिंह समेत अन्य लोगों को मौत के घाट उतारने के लिए दो लाख रुपये की सुपारी दी गई थी. इस पूरी खूनी साजिश और हत्या के ठेके के पीछे कांग्रेस नेता नागेंद्र राय की मुख्य भूमिका उजागर हुई थी.
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अग्रिम जमानत का जोरदार विरोध करते हुए अदालत को सूचित किया कि नागेंद्र राय ने ही मुख्य हमलावरों को घातक हथियार उपलब्ध कराए थे. कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स (CDR) से भी यह स्पष्ट हुआ है कि आरोपी लगातार सह-आरोपी तारकेश्वर पाटले के संपर्क में बना हुआ था.
इसके अलावा, नागेंद्र राय ने बिचौलियों के जरिए विश्वजीत अनंत से मुलाकात कर हत्या की डील पक्की की थी. सरकार ने यह भी रेखांकित किया कि याचिकाकर्ता का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड रहा है और उस पर पहले से आठ अन्य गंभीर मामले दर्ज हैं.
दूसरी ओर, नागेंद्र राय के बचाव पक्ष ने याचिका का समर्थन करते हुए दलील दी कि उनके मुवक्किल को राजनीतिक द्वेष के चलते झूठे मामलों में घसीटा जा रहा है. वकील ने कहा कि हथियार सौंपने या किसी तरह की सुपारी की डील में नागेंद्र राय की सीधी संलिप्तता का कोई प्रत्यक्ष सबूत नहीं है.
बचाव पक्ष ने यह तर्क भी रखा कि दर्ज आठ पुराने मामलों में से चार में आरोपी को अदालत बरी कर चुकी है, जबकि एक में अभी तक चार्जशीट दाखिल नहीं हुई है. हालांकि, हाई कोर्ट ने बचाव पक्ष के तर्कों को नकारते हुए गंभीर आरोपों और दस महीने की निरंतर फरारी के आधार पर राहत देने से साफ इनकार कर दिया.