क्या बांग्लादेश की प्रति व्यक्ति आय भारत से आगे निकल गई है? जानिए IMF रिपोर्ट की सच्चाई
क्या बांग्लादेश प्रति व्यक्ति आय में भारत से आगे निकल रहा है? IMF के नए आंकड़ों से समझें nominal GDP, महंगाई और क्रय शक्ति (PPP) के बीच का असली अंतर और जानें दोनों देशों के आर्थिक भविष्य की तस्वीर.
नई दिल्ली । डेस्क: अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की अक्टूबर 2026 की 'वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक' रिपोर्ट के सामने आते ही दक्षिण एशिया के आर्थिक गलियारों में नई चर्चा शुरू हो गई है. आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष बांग्लादेश का प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद (GDP) भारत की तुलना में अधिक रहने का अनुमान जताया गया है. लगभग 17.5 करोड़ की आबादी वाले बांग्लादेश का अनुमानित प्रति व्यक्ति GDP 2,886 डॉलर रहने की संभावना है, जबकि भारत के लिए यह आंकड़ा 2,749 डॉलर दर्ज किया गया है.
हालांकि, इस तुलना को समझने के लिए केवल एक आंकड़े पर निर्भर रहना सही नहीं होगा. भारत की कुल अर्थव्यवस्था बांग्लादेश से लगभग आठ गुना बड़ी है. जहां भारत की GDP 4.15 ट्रिलियन डॉलर के विशाल स्तर पर है, वहीं बांग्लादेश की कुल अर्थव्यवस्था 506.4 अरब डॉलर की है. इस अंतर के बावजूद बांग्लादेश का प्रति व्यक्ति आय में आगे दिखना बीते दो दशकों में ढाका के उल्लेखनीय आर्थिक उभार को दर्शाता है.
महंगाई और क्रय शक्ति (PPP): कौन सा देश वास्तव में कितना समृद्ध?
प्रति व्यक्ति GDP के ये आंकड़े अमेरिकी डॉलर के मौजूदा विनिमय दर पर आधारित हैं, लेकिन जब इसे क्रय शक्ति समानता यानी Purchasing Power Parity (PPP) के पैमाने पर मापा जाता है, तो तस्वीर पूरी तरह बदल जाती है. PPP वह आर्थिक माध्यम है जो यह बताता है कि स्थानीय महंगाई और जीवन यापन की लागत को समायोजित करने के बाद किसी देश की मुद्रा से वास्तव में कितनी वस्तुएं और सेवाएं खरीदी जा सकती हैं.
PPP के आधार पर भारत का प्रति व्यक्ति GDP 12,998 डॉलर अनुमानित है, जो बांग्लादेश के 10,884 डॉलर से काफी अधिक है. इसका सीधा अर्थ यह है कि आम भारतीय नागरिक की वास्तविक क्रय क्षमता बांग्लादेशियों की तुलना में बेहतर है. इसके अतिरिक्त, ढाका को इस समय भीषण महंगाई का सामना करना पड़ रहा है, जहां उपभोक्ता मूल्य सूचकांक 8.7 प्रतिशत पर है, जबकि भारत में औसत महंगाई दर 5 प्रतिशत के आसपास नियंत्रित है.
विकास दर की रफ्तार और दोनों देशों का आर्थिक ढांचा
चालू वर्ष में भारत की अर्थव्यवस्था 7 प्रतिशत की मजबूत दर से बढ़ने की उम्मीद है, जो बांग्लादेश की 3.6 प्रतिशत की विकास दर से लगभग दोगुनी है. ढाका की हालिया आर्थिक सफलता का मुख्य आधार उसका 38 अरब डॉलर का तैयार परिधान उद्योग, विदेशों से आने वाला रेमिटेंस और कार्यबल में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी रही है. बांग्लादेश में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का योगदान जीडीपी में लगातार बढ़ा है.
दूसरी ओर, भारतीय अर्थव्यवस्था बेहद विविधतापूर्ण है. भारत केवल विनिर्माण पर निर्भर न होकर अपने मजबूत सेवा क्षेत्र, विशाल घरेलू बाजार, सूचना प्रौद्योगिकी (IT) और औद्योगिक आधार के दम पर आगे बढ़ रहा है.
भविष्य की राह और वैश्विक संकटों की चुनौती
IMF के दीर्घकालिक अनुमानों के अनुसार, अगले कुछ वर्षों तक बांग्लादेश प्रति व्यक्ति Nominal GDP में मामूली बढ़त बनाए रख सकता है, लेकिन 2029 तक भारत 3,661 डॉलर के प्रति व्यक्ति GDP के साथ पुनः बांग्लादेश (3,334 डॉलर) से आगे निकल जाएगा.
वर्तमान में बांग्लादेश कई भू-राजनीतिक और ऊर्जा संकटों से जूझ रहा है. अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए 95 प्रतिशत तेल और LNG आयात पर निर्भर होने के कारण मध्य पूर्व के तनाव और समुद्री व्यापारिक मार्गों में रुकावटों से उसकी अर्थव्यवस्था पर भारी दबाव पड़ा है.
संक्षेप में कहें तो, बांग्लादेश की सफलता निर्यात केंद्रित विनिर्माण की एक बेहतरीन मिसाल है, लेकिन भारत का विशाल और संतुलित आर्थिक ढांचा उसे अधिक स्थायित्व प्रदान करता है. दोनों ही देशों के लिए सबसे बड़ी चुनौती इस आर्थिक वृद्धि के लाभ को समाज के निचले तबके तक पहुंचाना और बढ़ती आय असमानता को कम करना है.