सोम, 26 अक्टू. 2026

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इजराइली चुनाव में ईरानी दखल की आशंका, नेतन्याहू ने दी कड़ी चेतावनी

इजराइल में होने वाले चुनावों के दौरान प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान और उसके समर्थित गुटों द्वारा हमले की आशंका जताई है. नेतन्याहू ने सख्त लहजे में चेतावनी देते हुए कहा है कि किसी भी दुस्साहस का करारा जवाब दिया जाएगा.

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26 अक्टू. 2026, 12:15 AM 2 मिनट में पढ़ें 66

नेतन्याहू-ट्रंप
नेतन्याहू-ट्रंप

नई दिल्ली । डेस्क: इजराइल में मंगलवार को होने जा रहे आम चुनावों से ठीक पहले देश का सियासी और सुरक्षा माहौल बेहद संवेदनशील हो गया है. प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने खुफिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए आशंका जताई है कि ईरान और उसके सहयोगी संगठन चुनाव प्रक्रिया को बाधित करने के इरादे से हमला कर सकते हैं. 

अपने चुनावी अभियान के अंतिम दौर में राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे को केंद्र में रखते हुए नेतन्याहू ने ईरान को स्पष्ट चेतावनी दी है कि किसी भी प्रकार की उकसावे वाली कार्रवाई का जवाब अत्यंत कठोर और अप्रत्याशित सैन्य प्रहार से दिया जाएगा.

चुनाव प्रचार के दौरान खुद को देश के एकमात्र सक्षम रक्षक के रूप में पेश कर रहे नेतन्याहू ने हाल के दिनों में अपने आक्रामक बयानों से राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है. 

उन्होंने इजराइली सुरक्षा बलों को ईरान के मौजूदा शासन के खिलाफ कड़े कदम उठाने के निर्देश दिए हैं. अमेरिका के साथ मिलकर चलाए जा रहे सैन्य अभियानों का जिक्र करते हुए इजराइली नेतृत्व ने साफ किया है कि देश की सेना रक्षात्मक और आक्रामक दोनों ही तरह की कार्रवाई के लिए पूरी तरह तैयार है.

दूसरी ओर, इस पूरे घटनाक्रम में अमेरिका की भूमिका भी काफी अहम मानी जा रही है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान के साथ जारी गतिरोध पर कड़े रुख का संकेत देते हुए कहा है कि जल्द ही ईरान के साथ समझौता करने या फिर से सैन्य हमले शुरू करने पर अंतिम फैसला लिया जाएगा. 

फारस की खाड़ी में अमेरिकी नौसेना की अतिरिक्त तैनाती और विमान वाहक पोत भेजे जाने से इस क्षेत्र में तनाव और गहरा गया है.

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास जहाजों पर बढ़ते खतरों और यमन के हूती विद्रोहियों की आक्रामकता को देखते हुए अमेरिका ने मध्य पूर्व के कई हिस्सों से अपने राजनयिक और सैन्य कर्मचारियों की संख्या में कटौती करना शुरू कर दिया है. 

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव के इस दौर में सुरक्षा चुनौतियां काफी जटिल हो चुकी हैं और आने वाले दिन पूरे क्षेत्र की स्थिरता के लिहाज से बेहद नाजुक साबित हो सकते हैं.

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