सर्बिया चुनाव: क्या छात्र आंदोलन ध्वस्त कर पाएगा वुचिच का 14 साल पुराना राजनीतिक किला?
14 सालों में सर्बिया का सबसे कड़ा मुकाबला! भ्रष्टाचार और नोवी साद स्टेशन हादसे के विरोध में उठे छात्र आंदोलन ने प्रधानमंत्री पद की रेस में उतरे अलेक्जेंडर वुचिच के सामने राजनीतिक अस्तित्व का संकट खड़ा कर दिया है.
नई दिल्ली । डेस्क: सर्बिया में रविवार को नए संसदीय चुनाव के लिए मतदान की प्रक्रिया शुरू हो गई. बीते 14 से अधिक वर्षों में देश के इस सबसे कड़े और ऐतिहासिक मुकाबले पर दुनिया भर की नजरें टिकी हुई हैं. सत्ता पर लंबे समय से काबिज राइट-विंग 'सर्बियन प्रोग्रेसिव पार्टी' (SNS) और उसके कद्दावर नेता अलेक्जेंडर वुचिच को इस बार किसी पारंपरिक राजनीतिक दल से नहीं, बल्कि युवाओं और छात्रों के एक अभूतपूर्व जन-आंदोलन से सीधी चुनौती मिल रही है. 250 सीटों वाली संसद के लिए हो रहे इस मतदान में करीब 64 लाख मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर रहे हैं.
नोवी साद हादसे से सुलगती जन-आक्रोश की चिंगारी
इस ऐतिहासिक राजनीतिक मोड़ की शुरुआत करीब दो साल पहले नोवी साद रेलवे स्टेशन पर हुए एक दर्दनाक हादसे से हुई थी. स्टेशन की छत गिरने से 16 मासूम लोगों की जान चली गई थी, जिसके पीछे व्यापक पैमाने पर फैले सरकारी भ्रष्टाचार को मुख्य वजह माना गया. इस घटना ने देश भर के युवाओं और आम नागरिकों को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर कर दिया. वर्ष 2000 में तानाशाह स्लोबोदान मिलोसेविक के तख्तापलट के बाद यह सर्बिया का सबसे बड़ा विरोध-प्रदर्शन बन गया. धीरे-धीरे पारदर्शी जांच की मांग का यह आंदोलन तख्तापलट की जगह समय से पहले चुनाव कराने की देशव्यापी मांग में बदल गया.
राजनीति के नौसिखिए बनाम अनुभवी वुचिच
चुनाव मैदान में कुल 18 दल अपनी किस्मत आजमा रही हैं, लेकिन असली जंग सत्तारूढ़ दल और 'स्टूडेंट्स लिस्ट' के बीच मानी जा रही है. कई प्रमुख विपक्षी दलों ने चुनाव न लड़ने का फैसला करते हुए अपने समर्थकों से छात्रों का साथ देने की अपील की है. विशेष बात यह है कि छात्र आंदोलन की 250 उम्मीदवारों वाली सूची में ज्यादातर शिक्षा, कला और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े विशेषज्ञ शामिल हैं, जिन्हें राजनीति का कोई पुराना अनुभव नहीं है. भ्रष्टाचार मुक्त सर्बिया का वादा करने वाले इन युवाओं ने बेलग्रेड की सड़कों पर 1.5 लाख से अधिक लोगों की रैली निकालकर अपनी ताकत का अहसास कराया है. दूसरी ओर, 56 वर्षीय अलेक्जेंडर वुचिच अपने दूसरे राष्ट्रपति कार्यकाल को बीच में ही छोड़कर प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरे हैं और छात्रों पर विदेशी फंडिंग से सरकार गिराने की साजिश का आरोप लगा रहे हैं.
रिकॉर्ड मतदान और अनोखा 'पायजामा वोटिंग ट्रेंड'
विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस बार मतदान प्रतिशत में भारी उछाल आ सकता है. सर्बिया में पिछले कुछ दशकों के दौरान औसत मतदान 55 प्रतिशत के आसपास ही रहा है, लेकिन इस बार युवाओं के उत्साह को देखते हुए इसमें बड़े बदलाव की उम्मीद है. देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में रह रहे सर्बियाई नागरिक भी इस चुनाव में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं. अमेरिकी शहर शिकागो में समय क्षेत्र के अंतर के कारण मतदान सुबह 1:00 बजे शुरू हुआ, जिसे लेकर प्रवासी सर्बियाई युवाओं ने सोशल मीडिया पर 'पायजामा वोटिंग पार्टी' का अनूठा ट्रेंड चला दिया. मतदान की निगरानी के लिए छात्रों और नागरिक संगठनों ने बड़े पैमाने पर स्वयंसेवकों को तैनात किया है, ताकि प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी बनी रहे.