ऑपरेशन ट्राइडेंट: अंतरराष्ट्रीय नार्को-सिंडिकेट पर NCB का एक्शन, 38 ठिकानों पर छापेमारी
मोदी सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' नीति के तहत NCB और राज्य पुलिस ने पूर्वोत्तर में 'ऑपरेशन ट्राइडेंट' चलाकर नार्को-सिंडिकेट के वित्तीय और लॉजिस्टिक्स ढांचे को ध्वस्त कर दिया. 100 करोड़ के हवाला नेटवर्क और अवैध संपत्तियों पर बड़ी कार्रवाई.
नई दिल्ली । डेस्क: मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ केंद्र सरकार की सख्त नीति के तहत नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने पूर्वोत्तर में एक विशाल और समन्वित कार्रवाई को अंजाम दिया है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के अनुसार, सुरक्षा एजेंसियों और राज्य पुलिस बलों ने 23 अक्टूबर 2026 की सुबह 'ऑपरेशन ट्राइडेंट' के तहत असम, मिजोरम और मणिपुर में एक साथ 38 ठिकानों पर छापेमारी की. यह व्यापक अभियान केवल नशीले पदार्थों की जब्ती तक सीमित न रहकर 'नारकोटिक्स कंट्रोल विजन डॉक्यूमेंट (2026-2029)' के अनुरूप पूरे अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क और उसके वित्तीय स्रोतों को पूरी तरह ध्वस्त करने की रणनीति पर केंद्रित था.
हवाला नेटवर्क ध्वस्त और करोड़ों की संपत्ति फ्रीज
इस बहु-एजेंसी अभियान के दौरान सुरक्षा बलों ने अंतरराष्ट्रीय तस्करी गिरोह के वित्तीय आधार पर गहरा प्रहार किया है. जांच में लगभग 100 करोड़ रुपये के अवैध हवाला लेनदेन का पर्दाफाश हुआ, जिसके बाद त्वरित कार्रवाई करते हुए 1,424 बैंक खातों को फ्रीज कर दिया गया. इसके साथ ही 17.82 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति, 12 लाख रुपये नकद और 500 डेटोनेटर जब्त किए गए हैं. इस पूरे ऑपरेशन के दौरान 18 संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है. यह नेटवर्क मुख्य रूप से 'डेथ ट्रायंगल कॉरिडोर' के माध्यम से भारत, म्यांमार और बांग्लादेश की सीमाओं के पार तस्करी का संचालन कर रहा था.
अंतर-एजेंसी समन्वय और रणनीतिक कमान
'ऑपरेशन ट्राइडेंट' में NCB, मिजोरम पुलिस और प्रवर्तन निदेशालय (ED) के बीच उत्कृष्ट तालमेल देखने को मिला. कई दिनों तक गोपनीय खुफिया जानकारी साझा करने और उच्चस्तरीय रणनीतिक बैठकों के बाद इस संयुक्त कार्रवाई का खाका तैयार किया गया था. एकीकृत कमान संरचना के तहत 38 टीमों ने मिजोरम के आइजॉल, चम्फाई और भारत-म्यांमार सीमा पर स्थित व्यापारिक कस्बे जोखॉथर के अलावा मणिपुर के चूड़ाचांदपुर और असम के कछार क्षेत्र जैसे संवेदनशील ट्रांजिट कॉरिडोर में एक साथ धावा बोला. दुर्गम भौगोलिक स्थितियों के बावजूद सटीक समयबद्धता के साथ छापेमारी की गई, जिससे तस्करों को भागने या वित्तीय सबूत मिटाने का कोई मौका नहीं मिला.
म्यांमार आधारित अंतरराष्ट्रीय कार्टेल का भंडाफोड़
इस अभियान की नींव म्यांमार स्थित सरगना थांगसिंतुआंग उर्फ चिंतुआंग के नेटवर्क की गहन जांच के बाद रखी गई थी. यह सरगना म्यांमार-मिजोरम-मणिपुर-असम-त्रिपुरा कॉरिडोर के रास्ते मेथामफेटामाइन और हेरोइन की तस्करी का मुख्य सूत्रधार था, जिसे दिल्ली से गिरफ्तार किया जा चुका है. इसके अलावा, डिलीवरी का समन्वय करने वाले वुंगखानथॉना, 100 करोड़ के हवाला नेटवर्क को संभालने वाली ललरमपारी और असम कॉरिडोर के लॉजिस्टिक्स प्रमुख अबू सालेह को पहले ही सलाखों के पीछे भेजा जा चुका है. विस्तृत वित्तीय विश्लेषण और डिजिटल फॉरेंसिक जांच के जरिए सामने आई मुखौटा कंपनियों और बिचौलियों के नेटवर्क को निशाना बनाते हुए 'ऑपरेशन ट्राइडेंट' को सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया.