ईरान पर फिर सैन्य हमले की तैयारी या होगा बड़ा समझौता?
मिडटर्म चुनावों के बीच अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध या शांति का सस्पेंस गहराया. राष्ट्रपति ट्रंप ने सैन्य हमले के साथ-साथ समझौते के विकल्प को खुला रखा है, वहीं पेंटागन की सैन्य तैयारियों और मध्य पूर्व में अमेरिकी युद्धपोतों की तैनाती ने वैश्विक हलचल बढ़ा दी है.
नई दिल्ली । डेस्क: अमेरिका के 3 नवंबर को होने वाले मिडटर्म चुनावों से ठीक पहले मध्य पूर्व में स्थिति एक बार फिर बेहद संवेदनशील और तनावपूर्ण हो गई है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से जब यह पूछा गया कि वह ईरान पर संभावित सैन्य कार्रवाई से कितने करीब हैं, तो उन्होंने सीधी जानकारी देने से साफ इनकार कर दिया.
शनिवार को संवाददाताओं से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि क्या उन्हें लगता है कि वह पहले से इसकी घोषणा करेंगे. इसके साथ ही ट्रंप ने यह स्पष्ट संकेत दिया कि एक तरफ फिर से हमले की गुंजाइश बनी हुई है, तो दूसरी तरफ दोनों देशों के बीच एक बड़ा और ऐतिहासिक समझौता होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता.
हालांकि, ट्रंप ने यह सवाल भी उठाया कि अगर कोई समझौता होता भी है, तो क्या ईरान उस पर कायम रहेगा.
दूसरी ओर, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान ने अमेरिका पर युद्ध समाप्त करने के लिए जारी बातचीत को बाधित करने का गंभीर आरोप लगाया है.
ईरानी सरकारी टेलीविजन पर दिए अपने बयान में उन्होंने कहा कि सर्वोच्च नेता ने अधिकारियों को समझौता पूरा करने का निर्देश दिया था, लेकिन अमेरिकी पक्ष ने वार्ता के नियमों को तोड़कर प्रक्रियाओं को रोक दिया. इसके बावजूद पेज़ेशकियान का मानना है कि वार्ता प्रक्रिया को आगे बढ़ाकर समझौते को अंतिम रूप तक पहुंचाया जाना चाहिए.
क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच अमेरिकी खुफिया प्रमुख जय क्लेटन ने विदेश मंत्री मार्को रुबियो को भेजी एक रिपोर्ट में चेतावनी दी है कि अमेरिकी कर्मियों को निशाना बनाने की ईरानी साजिशें गंभीर मोड़ पर पहुंच चुकी हैं. सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए वाशिंगटन ने कई संवेदनशील स्थानों से राजनयिक और सैन्य कर्मियों को वापस बुलाना शुरू कर दिया है.
पेंटागन ने राष्ट्रपति ट्रंप के सामने परमाणु ठिकानों, प्रमुख पुलों और ईरानी नियंत्रण वाले द्वीपों पर लक्षित अभियानों सहित कई सैन्य विकल्प प्रस्तुत किए हैं. अमेरिकी नौसेना ने मध्य पूर्व में दो विमानवाहक पोत तैनात कर दिए हैं, जबकि एक तीसरा पोत प्रशांत महासागर की ओर से बढ़ रहा है. फिलहाल किसी अंतिम सैन्य कार्रवाई का आधिकारिक फैसला नहीं लिया गया है.