कांगो में 4,687 मौतों के बाद जागा प्रशासन: इबोला वैक्सीन का ट्रायल शुरू
डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में इतिहास का सबसे भयावह इबोला प्रकोप जारी है. इस जानलेवा बीमारी से निपटने के लिए एक नया और महत्वपूर्ण वैक्सीन क्लिनिकल ट्रायल शुरू किया गया है, जिसमें मर्क, मॉडर्ना और ऑक्सफोर्ड-सीरम इंस्टीट्यूट की टीके शामिल हैं.
नई दिल्ली । डेस्क: डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में इबोला वायरस के घातक प्रकोप को काबू में करने के लिए एक बेहद अहम क्लिनिकल ट्रायल आधिकारिक रूप से शुरू हो चुका है. कांगो ही इस मौजूदा महामारी का केंद्र है, जहाँ से यह बीमारी पैदा हुई और यहीं पर इसके सर्वाधिक मामले तथा मौतें दर्ज की गई हैं. इस परीक्षण की शुरुआत पूर्वी कांगो के बूनिया शहर से हुई, जहाँ पहले प्रतिभागी को मर्क एंड कंपनी की 'एर्वेबो' (Ervebo) वैक्सीन की खुराक दी गई.
हालांकि एर्वेबो को मूल रूप से इबोला की जाइरे प्रजाति से बचाव के लिए मंजूरी मिली थी, लेकिन पशुओं पर हुए अध्ययनों से संकेत मिले हैं कि यह बुंडिबुग्यो इबोला संक्रमण के असर और मृत्यु दर को भी काफी हद तक कम कर सकती है.
इसके अलावा, ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय और भारत के सीरम इंस्टीट्यूट द्वारा संयुक्त रूप से विकसित प्रायोगिक टीका तथा मॉडर्ना इंक का नया टीका भी आने वाले कुछ हफ्तों में इस अध्ययन में शामिल किया जा सकता है.
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आंकड़ों के मुताबिक कांगो में अब तक 9,704 से अधिक पुष्ट मामले सामने आ चुके हैं और 4,687 लोगों की मौत हो चुकी है, जो देश के इतिहास में सबसे बड़ा इबोला प्रकोप है.
महामारी की गंभीरता को देखते हुए कोएलिशन फॉर एपिडेमिक प्रिपेयर्डनेस इनोवेशंस (CEPI) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रिचर्ड हैचेट ने उम्मीद जताई है कि ट्रायल पूरा करने का यह सही समय है, क्योंकि पारंपरिक नियंत्रण उपायों से संक्रमण पूरी तरह रुक नहीं पा रहा है.
हालांकि, क्षेत्र में दशकों से जारी अस्थिरता और सशस्त्र समूहों की मौजूदगी के कारण प्रतिभागियों को ट्रैक करना और डेटा जुटाना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है.
यदि यह परीक्षण सफल रहता है, तो इन टीकों का बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू किया जाएगा.
भारत के सीरम इंस्टीट्यूट ने महज नौ दिनों के भीतर ऑक्सफोर्ड वैक्सीन की 6 लाख से अधिक खुराक तैयार करने की क्षमता प्रदर्शित की है. विशेषज्ञों का मानना है कि सफल परिणामों के बाद करोड़ों खुराकें उपलब्ध कराई जा सकेंगी, जिससे स्वास्थ्य अधिकारी संक्रमितों के संपर्क में आए लोगों के साथ-साथ उच्च जोखिम वाले पूरे क्षेत्रों में व्यापक स्तर पर टीकाकरण अभियान चला सकेंगे.