पॉक्सो मामलों में पीड़ितों को वित्तीय मदद के लिए इंजरी रिपोर्ट अनिवार्य नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
पॉक्सो (POCSO) मामलों में पीड़ितों को वित्तीय सहायता देने को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. अदालत ने कहा कि मेडिकल या इंजरी रिपोर्ट का न होना पीड़ितों को राहत राशि से वंचित करने का आधार नहीं बन सकता.
प्रयागराज । डेस्क: इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि पॉक्सो (POCSO) अधिनियम के तहत पीड़ित बच्चों और यौन अपराधों की शिकार महिलाओं को वित्तीय सहायता देने से केवल इसलिए इंकार नहीं किया जा सकता क्योंकि उनके पास पेनेट्रेटिव यौन हमले को दर्शाने वाली कोई मेडिकल या इंजरी रिपोर्ट नहीं है.
न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की पीठ ने सुनवाई करते हुए अपने फैसले में कहा कि आपराधिक मामले में भी केवल इंजरी रिपोर्ट न होने के आधार पर आरोपी को बरी नहीं किया जा सकता.
ऐसे में एक सामाजिक कल्याणकारी योजना के तहत अंतरिम वित्तीय राहत रोकने के लिए मेडिकल रिपोर्ट को अनिवार्य बनाना पूरी तरह से तर्कहीन है.
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी भी दावे की सत्यता की जांच के लिए प्राथमिकी (FIR) और आरोप पत्र (Charge-sheet) ही पर्याप्त आधार होंगे.