कराची चिड़ियाघर: नूर जहां की याद और मधुबाला की जिंदगी बचाने की जिद
बेजुबानों के प्रति कूरता या प्रशासनिक लापरवाही? कराची में हाथियों की मौत के बाद उठे गंभीर सवाल. जानिए नूर जहां की विदाई और उसकी बहन मधुबाला के संघर्ष की यह भावुक कहानी.
नई दिल्ली । डेस्क: कराची के चिड़ियाघर में 'यू आर माई सनशाइन' गुनगुनाते हुए जूड एलन ने एक ऐसे बेजुबान को अंतिम विदाई दी, जिसे वे बचा न सके. 17 साल की अफ्रीकी हथिनी नूर मांझा (नूर जहां) जब अपने जीवन के अंतिम क्षणों में दर्द से कराह रही थी, तब एलन उसके पैरों की मालिश कर रहे थे और उसके घावों पर मरहम लगा रहे थे. अप्रैल 2023 में नूर जहां ने आखिरी सांस ली. इस घटना ने कॉरपोरेट नौकरी छोड़कर जानवरों की सेवा में जुटे 45 वर्षीय जूड एलन के जीवन का मकसद ही बदल दिया. नूर जहां को खोने का गम अब उसकी बहन मधुबाला की देखभाल और सुरक्षा के लिए एक बड़े आंदोलन का रूप ले चुका है.
तंजानिया से पाकिस्तान तक: चार बहनों की दर्दनाक दास्तान
साल 2009 में तंजानिया के जंगलों से पकड़े गए चार हाथी के बच्चों को पाकिस्तान लाया गया था. इनमें से दो हाथियों—नूर जहां और मधुबाला—को कराची ज़ू में रखा गया, जबकि उनकी अन्य दो बहनों, सोनिया और मल्लिका को सफारी पार्क भेजा गया. कंक्रीट के बाड़ों और अकेलेपन में घुटते इन जीवों की सुध तब ली गई जब 2020 में इस्लामाबाद के मशहूर हाथी 'कावन' को कंबोडिया के अभयारण्य में भेजा गया था. हालांकि, कराची की इन बहनों के लिए मदद में काफी देर हो चुकी थी. नूर मांझा की मौत के बाद मधुबाला अकेली रह गई और अकेलेपन के तनाव में दीवारों से सिर पटकने लगी.
अपनों का साथ और फिर एक और नया सदमा
अंतरराष्ट्रीय पशु कल्याण संस्था 'फोर पॉज़' (Four Paws) और जूड एलन के प्रयासों से नवंबर 2024 में मधुबाला को उसकी बची हुई बहनों, सोनिया और मल्लिका से मिलाने के लिए सफारी पार्क स्थानांतरित किया गया. लंबे समय बाद जब ये बहनें आपस में मिलीं, तो उन्होंने एक-दूसरे को अपनी सूंड से स्पर्श किया. लेकिन यह खुशी ज्यादा दिनों तक नहीं टिक सकी. महज़ कुछ दिनों बाद 8 दिसंबर को सोनिया की मौत हो गई. हालांकि शुरुआती जांच में दिल का दौरा पड़ने की बात कही गई, लेकिन फोर पॉज़ की रिपोर्ट में पैरों के पुराने संक्रमण और कुपोषण को इसकी वजह बताया गया.
फुटबॉल की दोस्ती और सेहत में सुधार की उम्मीद
अपनी दो बहनों को खोने के बाद मधुबाला भी गंभीर रूप से बीमार पड़ गई और उसका वजन 200 किलो से अधिक घट गया. हालांकि, विशेषज्ञों और अंतरराष्ट्रीय डॉक्टरों की टीम की मदद से अब उसकी सेहत में 85 प्रतिशत तक सुधार आया है. मधुबाला को तनाव से बाहर निकालने के लिए जूड एलन ने एक अनोखा तरीका अपनाया. उन्होंने उसके साथ फुटबॉल खेलना शुरू किया. शुरुआत में आक्रामक रहने वाली मधुबाला जल्द ही इस खेल की दीवानी हो गई और एलन के साथ उसका एक अटूट रिश्ता बन गया, जिसने उसे नया जीवन जीने की प्रेरणा दी.
अभयारण्य या चिड़ियाघर? प्रशासनिक व्यवस्था पर उठते सवाल
सफारी पार्क में मधुबाला के आने के बाद भी स्थितियां पूरी तरह सुधर नहीं पाई हैं. कार्यकर्ताओं का कहना है कि जिसे अभयारण्य होना चाहिए था, वह अब भी आम चिड़ियाघर की तरह संचालित हो रहा है, जहां लोग जानवरों के बेहद करीब आ जाते हैं. हालांकि, सिंध प्रांत के वन्यजीव अधिकारियों का मानना है कि इन विशालकाय जीवों को शहरों के छोटे बाड़ों के बजाय ग्रामीण इलाकों के प्राकृतिक और खुले माहौल में रखा जाना चाहिए. 2020 में इस्लामाबाद उच्च न्यायालय के एक ऐतिहासिक फैसले में जानवरों के अधिकारों को स्वीकार किया गया था, जिसके तहत मधुबाला को भी एक अनुकूल माहौल में रहने का कानूनी अधिकार है.