80 हजार साल का सफर: 2028 में लॉन्च होगा इंसानियत का पहला इंटरस्टेलर मिशन
इंसानियत का सबसे लंबा सफर! 2028 में लॉन्च होने जा रहा 'फार्मी एक्सप्लोरर' अंतरिक्ष यान 80,000 साल की यात्रा तय कर पृथ्वी के निकटतम तारे प्रोक्सिमा सेंटोरी पहुंचेगा. यह मिशन भविष्य की पीढ़ियों को प्रेरित करने और अंतरतारकीय अन्वेषण की शुरुआत करने का एक अनूठा प्रयास है.
नई दिल्ली । डेस्क: मानव जाति के अंतरतारकीय यानी इंटरस्टेलर अभियानों के सपने को साकार करने के लिए वैज्ञानिकों ने एक बेहद महत्वाकांक्षी अंतरिक्ष मिशन की रूपरेखा तैयार की है. 'फार्मी एक्सप्लोरर' नाम के इस मिशन के तहत वर्ष 2028 में एक विशेष अंतरिक्ष यान को ब्रह्मांड की गहराई में भेजने की योजना है. इस यान का गंतव्य हमारे सौर मंडल के बाहर पृथ्वी का सबसे नजदीकी तारा 'प्रोक्सिमा सेंटोरी' होगा. पृथ्वी से लगभग 4.4 प्रकाश वर्ष की दूरी पर स्थित इस तारे तक पहुंचने के लिए अंतरिक्ष यान को करीब 25.8 ट्रिलियन मील का सफर तय करना होगा, जिसमें लगभग 80 हजार साल का समय लगेगा.
एक काल्पनिक वीडियो में दर्शाया गया है कि वर्ष 81,528 के आसपास यह यान अल्फा सेंटारी तारामंडल पहुंचेगा. वहां भविष्य के स्पेस स्टेशन में रहने वाले इंसानी समुदाय इसे अंतरिक्ष यात्रा के शुरुआती इतिहास के एक महत्वपूर्ण प्रतीक के रूप में स्वीकार करेंगे. स्पेन के टेनेरिफ में आयोजित 'स्टारमस फेस्टिवल' के दौरान इस मिशन के उद्यमी काम गफारियन ने इस पूरी योजना का खाका प्रस्तुत किया. उनका मानना है कि मानव का अंतिम लक्ष्य चांद या मंगल तक सीमित रहना नहीं है, बल्कि सौर मंडल के बाहर नए संसार की खोज करना है.
चांद और मंगल से परे सौर मंडल के बाहर जीवन की नई नींव
नासा के आर्टिमिस मिशन में उपकरण आपूर्ति करने वाली कंपनियों के संस्थापक गफारियन के अनुसार, चंद्रमा केवल एक शुरुआती पड़ाव है, न कि अंतिम गंतव्य. उनका दृष्टिकोण है कि मंगल और अन्य ग्रहों के साथ-साथ सौर मंडल से बाहर की यात्राओं के लिए पहले चंद्रमा पर आवश्यक बुनियादी ढांचा विकसित करना अनिवार्य है. उनका अनुमान है कि वर्ष 2050 तक अंतरिक्ष में एक ऐसा शहर बनकर तैयार हो जाएगा जहां इंसान रह सकेंगे और काम कर सकेंगे. वहां कृत्रिम गुरुत्वाकर्षण और माइक्रोग्रैविटी में विशाल कारखाने स्थापित किए जाएंगे, जहां विकसित तकनीक कैंसर जैसी बीमारियों के इलाज में भी मददगार साबित हो सकती है.
गोल्डन रिकॉर्ड के जरिए अंतरिक्ष में पहुंचेगा पृथ्वी का संदेश
नासा के प्रसिद्ध वोयाजर-1 और वोयाजर-2 यान पहले ही सौर मंडल की सीमाओं को पार कर चुके हैं, लेकिन फार्मी एक्सप्लोरर का लक्ष्य सीधे किसी दूसरे तारे की ओर बढ़ना है. वोयाजर अभियानों की तरह ही फार्मी एक्सप्लोरर में भी एक 'गोल्डन रिकॉर्ड' की प्रतिलिपि रखी जाएगी. इसमें गणितीय सूत्र, पृथ्वी के पेड़-पौधों और जीवों की तस्वीरें, प्राकृतिक दृश्य, 55 भाषाओं में रिकॉर्ड किए गए संदेश, संगीत, पक्षियों की आवाजें और मानवीय हंसी के शब्द शामिल होंगे. इसके अलावा पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जिमी कार्टर का एक लिखित संदेश और दुनिया भर के बच्चों के नए संदेश भी जोड़े जा रहे हैं.
भविष्य के गंतव्य को ध्यान में रखकर तय किया गया अनोखा मार्ग
अल्फा सेंटारी तारामंडल की स्थिति समय के साथ बदल रही है, इसलिए इस अंतरिक्ष यान को तारे की वर्तमान स्थिति की दिशा में नहीं भेजा जाएगा. इसके बजाय, 79,500 साल बाद वह तारा ब्रह्मांड में जिस स्थान पर मौजूद होगा, उस बिंदु की गणना करके यान का मार्ग निर्धारित किया जा रहा है. वर्तमान में यह लक्ष्य बिंदु कर्क तारामंडल की ओर स्थित है. इस मिशन का नाम प्रसिद्ध वैज्ञानिक एनरिको फार्मी के नाम पर रखा गया है, जिनके नाम से प्रसिद्ध 'फार्मी पैराडॉक्स' जुड़ा हुआ है.
तकनीक की सीमाएं और भविष्य की पीढ़ियों के लिए एक विरासत
इस मिशन को अंजाम देने के लिए 1.5 करोड़ डॉलर का फंड जुटाने का प्रयास किया जा रहा है. वैज्ञानिकों से ऐसे वैज्ञानिक उपकरणों के प्रस्ताव मांगे गए हैं जो इस लंबे सफर को झेल सकें. हालांकि, प्रोजेक्ट से जुड़े विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि यान में लगे अधिकांश सेंसरों से 80 हजार सालों तक कोई डेटा वापस मिलना संभव नहीं होगा, क्योंकि सौर मंडल पार करते ही इसका सिग्नल संपर्क टूट जाएगा. इसके बावजूद, मिशन के सह-संस्थापक फिलिप जॉनस्टन का कहना है कि इसका मुख्य उद्देश्य महज एक लक्ष्य हासिल करना नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को अपनी सीमाओं से परे जाकर सपने देखने की प्रेरणा देना है.