व्हाट्सएप पर 'OK' लिखना छुट्टी की मंजूरी नहीं: इलाहाबाद कैट
व्हाट्सएप मैसेज पर 'OK' लिखकर भेजी गई प्रतिक्रिया को छुट्टी की आधिकारिक मंजूरी नहीं माना जा सकता. इलाहाबाद कैट ने एक रेलवे कर्मचारी की याचिका खारिज करते हुए यह महत्वपूर्ण फैसला दिया है.
प्रयागराज । डेस्क: ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी अधिकारी द्वारा व्हाट्सएप पर भेजा गया 'OK' संदेश अपने आप में छुट्टी की आधिकारिक स्वीकृति का ठोस प्रमाण नहीं हो सकता. सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (CAT) की इलाहाबाद पीठ ने उत्तर मध्य रेलवे के कर्मचारी प्रिया रंजन कुमार की याचिका को खारिज करते हुए यह महत्वपूर्ण टिप्पणी की है.
न्यायाधिकरण के सदस्य रजनीश कुमार राय ने कहा कि किसी संदेश का उत्तर केवल 'OK' होना यह साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है कि सक्षम प्राधिकारी ने नियमानुसार अवकाश स्वीकृत कर दिया था.
मामला उत्तर मध्य रेलवे में कार्यरत कर्मचारी प्रिया रंजन कुमार के तबादले से जुड़ा है, जिन्हें प्रयागराज से फतेहपुर स्थानांतरित कर दिया गया था.
याचिकाकर्ता का कहना था कि उन्होंने तीन दिन की छुट्टी के बाद व्हाट्सएप के जरिए दो और दिनों के विस्तार की मांग की थी, जिस पर वरिष्ठ मंडल वाणिज्यिक प्रबंधक (Sr. DCM) हिमांशु शुक्ला ने 'OK' लिखकर जवाब दिया था.
हालांकि, ड्यूटी पर लौटने पर उन्हें निलंबित कर दिया गया और बाद में उनका तबादला फतेहपुर कर दिया गया. कर्मचारी ने आरोप लगाया कि यह तबादला प्रशासनिक न होकर दंडात्मक कार्रवाई के रूप में किया गया था.
दूसरी ओर, रेलवे प्रशासन ने पीठ के समक्ष तर्क दिया कि फतेहपुर रेलवे स्टेशन पर नए प्रवेश द्वार और बुकिंग कार्यालय के विकास के कारण प्रशासनिक आवश्यकताओं के तहत यह तबादला किया गया था.
ट्रिब्यूनल ने रेलवे के इस प्रशासनिक कारण को स्वीकार किया और माना कि केवल व्हाट्सएप पर 'OK' लिखने से आधिकारिक मंजूरी सिद्ध नहीं होती. सर्वोच्च न्यायालय के 'सोमेश तिवारी बनाम भारत संघ' मामले का हवाला देते हुए कैट ने माना कि बिना किसी दुर्भावना या दंडात्मक मंशा के किया गया यह तबादला पूरी तरह से वैध है.