लोकतंत्र में सत्ता परिवर्तन की मांग करना गलत नहीं: दिल्ली HC में नेहा बोरा के वकील
दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान एआईएसए (AISA) प्रमुख नेहा बोरा के वकील ने कहा कि लोकतंत्र में सत्ता बदलने की मांग करना कोई अपराध नहीं है. अदालत ने 10 हजार रुपये के शांति बॉन्ड के नोटिस के खिलाफ दायर याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा है.
नई दिल्ली । डेस्क: ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा को जारी 10,000 रुपये के शांति बॉन्ड नोटिस के खिलाफ दायर याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है. कोर्ट शुक्रवार शाम 6 बजे इस मामले में अपना आदेश सुनाएगा.
करीब ढाई घंटे तक चली लंबी सुनवाई के दौरान एएसजी चेतन शर्मा और बोरा के वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन के बीच तीखी बहस देखने को मिली.
सुनवाई में केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) ने एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि इसमें सत्ता बदलने (रेजीम चेंज) की बात कही गई थी. इस पर नेहा बोरा के वकील ने दलील देते हुए कहा, "लोकतंत्र में सत्ता परिवर्तन की मांग करने में कुछ भी गलत नहीं है."
इसका विरोध करते हुए एएसजी ने कहा कि लोकतंत्र में सत्ता का परिवर्तन वोटों के जरिए होता है, न कि उपद्रवी तत्वों द्वारा.
यह पूरा मामला 16 अक्टूबर को 'लहरा दो तिरंगा' विरोध प्रदर्शन के बाद स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट द्वारा भेजे गए नोटिस से जुड़ा है. भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126, 130 और 135(3) के तहत जारी इस नोटिस में शांति बनाए रखने के लिए जमानती बॉन्ड भरने को कहा गया था.
नेहा बोरा ने इस नोटिस को अदालत में चुनौती देते हुए रद्द करने और किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई से राहत देने की मांग की है. याचिका में कहा गया है कि मंडी हाउस में शांतिपूर्ण प्रदर्शन का आयोजन किया गया था, लेकिन पुलिस ने बेवजह हिरासत में रखा और बाद में शांति भंग होने की आशंका जताते हुए नोटिस थमा दिया, जबकि शांति भंग होने की आशंका का कोई ठोस आधार मौजूद नहीं है.