फ्रांस के घटनाक्रम पर क्या कहता है हांगकांग का SOUTH CHINA MORNING POST
फ्रांस में भड़की हिंसा और विरोध-प्रदर्शन केवल मैक्रों सरकार के लिए नहीं, बल्कि पूरे यूरोपीय संघ के राजनीतिक भविष्य के लिए चेतावनी हैं. आर्थिक तंगी, बढ़ती महँगाई और बजटीय कटौती के बीच चीनी विशेषज्ञों ने आगाह किया है कि अगर यह संकट लंबे समय तक चला, तो इसका असर फ्रांस के राष्ट्रपति चुनाव से लेकर पूरे यूरोप के एकीकरण पर गहराई से पड़ेगा.
सीजीखबर डेस्क । रायपुर: फ्रांस में जारी सामाजिक असंतोष और देशव्यापी विरोध-प्रदर्शनों ने एक बार फिर पूरे यूरोप का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है. चीनी विश्लेषकों का मानना है कि यह उथल-पुथल किसी साधारण स्थानीय विवाद का नतीजा नहीं है, बल्कि यह एक बड़े राजनीतिक और आर्थिक स्पिलओवर प्रभाव का संकेत दे रही है जो आने वाले समय में यूरोपीय राजनीति के ढांचे को फिर से बदल सकता है. अप्रैल में होने वाले राष्ट्रपति चुनावों से ठीक पहले उभर कर आया यह संकट फ्रांसीसी राजनेताओं के लिए एक कठिन परीक्षा बन गया है, जहाँ हर राजनीतिक दल जन-आक्रोश को अपने चुनावी लाभ में बदलने की कोशिश कर रहा है.
बजटीय कटौती और आर्थिक दबाव से भड़का जन-आक्रोश
शुरुआत में स्कूली सुविधाओं में सुधार की माँग को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों का यह आंदोलन देखते ही देखते व्यापक नागरिक असंतोष में तब्दील हो गया. बढ़ती महँगाई, घटती क्रय शक्ति और सरकारी खर्चों में कटौती के फैसलों ने जलती आग में घी का काम किया है. लगभग आधा मिलियन से अधिक प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर चुके हैं, जिसके परिणामस्वरूप बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां और आगजनी की घटनाएं सामने आई हैं. करीब 120 प्रतिशत जीडीपी अनुपात वाले कर्ज और भारी बजटीय घाटे से जूझ रही मैक्रों सरकार वित्तीय स्थिति सुधारने के लिए सार्वजनिक वेतन फ्रीज करने और सामाजिक प्राथमिकताओं में कटौती करने जैसे सख्त कदम उठाने को मजबूर हुई है, जिसने आम जनता के गुस्से को सीमा से बाहर कर दिया है.
वैश्विक प्रतिस्पर्धा और जियोपॉलिटिकल रणनीतियों पर उठते सवाल
फुदान यूनिवर्सिटी और बीजिंग फॉरन स्टडीज यूनिवर्सिटी के विश्लेषकों का कहना है कि यह असंतोष केवल तात्कालिक मंदी का परिणाम नहीं है, बल्कि पोस्ट-कोल्ड वॉर दौर में उच्च लागत और कमजोर नवाचार के कारण फ्रांस तथा पूरे यूरोप की घटती वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को भी उजागर करता है. विशेषज्ञों के अनुसार, रूस-यूक्रेन संघर्ष और मध्य पूर्व के तनाव जैसे भू-राजनीतिक मोर्चों पर की गई गलत गणनाओं का आर्थिक खामियाजा अब यूरोपीय मध्यवर्ग भुगत रहा है. वैश्वीकरण और स्वचालन के कारण सिमटती मध्यम वर्गीय आय ने समाज में धुव्रीकरण के लिए उपजाऊ जमीन तैयार कर दी है.
राष्ट्रपति चुनावों पर गहराता संकट और यूरोप का भविष्य
राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के दूसरे कार्यकाल के अंतिम चरण में उभरा यह संकट सीधे तौर पर उनकी राजनीतिक विरासत और देश की सुरक्षा स्थिति को चुनौती दे रहा है. एक तरफ जहां मरीन ले पेन का सुदूर-दक्षिणपंथी नेशनल रैली दल इसे प्राधिकरण और भरोसे का संकट बताकर कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर बढ़त बना रहा है, वहीं दूसरी तरफ वामपंथी गठबंधन भी सरकार के प्रबंधन पर लगातार हमलावर है. चीनी विश्लेषकों की चेतावनी है कि यदि फ्रांस और जर्मनी जैसे यूरोपीय संघ के प्रमुख स्तंभों में चरमपंथी और सुदूर-दक्षिणपंथी ताकतों का दबदबा बढ़ता है, तो आव्रजन और यूरोपीय एकीकरण के विरोध की नीतियां खुद यूरोपीय संघ के अस्तित्व पर बड़े अनिश्चित सवाल खड़े कर सकती हैं.