देश में 220 दवा सैंपल गुणवत्ता जांच में फेल, यूपी, तमिलनाडु और कर्नाटक में सबसे ज्यादा मामले
अगस्त 2026 में देश की दवा गुणवत्ता जांच में 220 दवा सैंपल घटिया पाए गए हैं. इनमें कई नामी देसी और विदेशी कंपनियों की दवाएं शामिल हैं. जानिए कौन सी दवाएं जांच में फेल हुईं और किन राज्यों में इनका पता चला.
सीजीखबर डेस्क । रायपुर: देश में बिकने वाली दवाओं की गुणवत्ता को लेकर केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने अगस्त 2026 के आंकड़े जारी किए हैं. सरकारी लैबोरेटरीज द्वारा की गई जांच में कुल 220 दवाओं के सैंपल गुणवत्ता के तय मानकों पर खरे नहीं उतरे हैं. इन दवाओं को 'मानक गुणवत्ता के अनुरूप नहीं' यानी नॉट ऑफ स्टैंडर्ड क्वालिटी (NSQ) की श्रेणी में रखा गया है.
आंकड़ों से पता चलता है कि कुल फेल हुए सैंपलों में से लगभग 45 प्रतिशत मामले अकेले उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु और कर्नाटक से आए हैं. अगस्त के महीने में राज्य स्तरीय दवा जांच प्रयोगशालाओं ने 191 सैंपलों को घटिया पाया, जबकि केंद्रीय प्रयोगशालाओं (सीडीएससीओ लैब्स) ने 29 सैंपलों को अमानक घोषित किया. राज्यों में सबसे ज्यादा 38-38 खराब सैंपल उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु की प्रयोगशालाओं में पकड़े गए, जबकि कर्नाटक की लैब्स ने 24 सैंपलों को घटिया बताया.
यह रिपोर्ट इसलिए भी चिंताजनक है क्योंकि इसमें केवल छोटी कंपनियां ही नहीं, बल्कि देश और दुनिया की कई दिग्गज फार्मा कंपनियों की दवाएं भी शामिल हैं. जिन प्रमुख कंपनियों के दवा सैंपल जांच में फेल हुए हैं, उनमें जाइडस लाइफ साइंसेज, इंटास फार्मास्यूटिकल्स, इप्का लैबोरेटरीज, ग्लेनमार्क फार्मास्यूटिकल्स, एलेम्बिक फार्मास्यूटिकल्स, अल्केम लेबोरेटरीज की इकाई अल्केम हेल्थ साइंस और बहुराष्ट्रीय दवा कंपनी फाइजर लिमिटेड शामिल हैं.
जांच में उत्तर प्रदेश की लखनऊ प्रयोगशाला ने फाइजर लिमिटेड के एक एनेस्थेटिक एंटासिड जेल के सैंपल को अमानक पाया. इसी तरह, जाइडस लाइफ साइंसेज की कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवा सायक्लोफोस्फेमाइड टैबलेट्स (सायक्लोक्सन), इप्का लैबोरेटरीज की उल्टी व मिचली रोकने वाली मेटोक्लोप्रामाइड हाइड्रोक्लोराइड टैबलेट्स, इंटास फार्मास्यूटिकल्स की मिर्गी या दौरे के इलाज में इस्तेमाल होने वाली लेवेटिरासेटम टैबलेट्स और ग्लेनमार्क फार्मास्यूटिकल्स की बीपी की दवा टेलमिसार्टन व एम्लोडिपाइन टैबलेट्स के सैंपल भी मानकों पर फेल रहे.
इसके अलावा, अल्केम हेल्थ साइंसेज की दो प्रमुख एंटीबायोटिक दवाओं—सेफिक्साइम टैबलेट्स और एमोक्सिसिलिन एंड पोटाशियम क्लैवुलनेट टैबलेट्स—को भी राज्य प्रयोगशालाओं ने अमानक घोषित किया है. सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी केरल स्टेट ड्रग्स एंड फार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड के भी तीन सैंपल घटिया पाए गए, जिनमें एक सैंपल डिक्लोफेनाक सोडियम (दर्द निवारक) और दो सैंपल टेलमिसार्टन (बीपी की दवा) के थे.
दिल्ली (एनसीटी) में की गई जांच में बीपी की एक मशहूर दवा 'टेल्मा एएम' का सैंपल पूरी तरह से नकली (स्प्यूरियस) पाया गया. जब इस दवा के डिब्बे पर लिखे असली निर्माता से संपर्क किया गया, तो कंपनी ने स्पष्ट किया कि यह बैच उनके द्वारा बनाया ही नहीं गया है. दवा नियामक ने बताया कि किसी अनधिकृत निर्माता ने दूसरी कंपनी के ब्रांड नाम का गलत इस्तेमाल करके यह नकली दवा बाजार में उतारी है. इस मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है और नियम के मुताबिक सख्त कार्रवाई की जाएगी.
दवाओं के घटिया पाए जाने पर केंद्र सरकार और केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने आम जनता को आश्वस्त करते हुए कहा है कि किसी दवा सैंपल का फेल होना केवल उस खास बैच तक सीमित होता है जिसकी जांच लैब में की गई है. इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि बाजार में उपलब्ध उस नाम की अन्य सभी दवाएं खराब हैं या इस्तेमाल के लायक नहीं हैं. दवा का कोई सैंपल किसी एक निर्धारित तकनीकी या गुणवत्ता पैमाने पर खरा न उतरने के कारण एनएसक्यू घोषित किया जाता है.
जानकारों का यह भी मानना है कि किसी राज्य में अमानक दवाओं की ज्यादा संख्या मिलना वहां की मजबूत जांच और निगरानी व्यवस्था का संकेत हो सकता है. हालांकि, सीडीएससीओ ने यह डेटा जारी नहीं किया है कि कुल कितने सैंपल उठाए गए थे.
लघु उद्योग भारती (एलयूबी), जो सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों (एमएसएमई) का एक प्रमुख संगठन है, ने दवा नियामक से आग्रह किया है कि सरकार को इस बात पर भी जोर देना चाहिए कि भारत में उपलब्ध 97 प्रतिशत से अधिक दवाएं पूरी तरह से सुरक्षित और मानक के अनुरूप हैं. संगठन ने संसद में दिए गए आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि पिछले पांच वर्षों में जांचे गए कुल 4,92,904 सैंपलों में से केवल 2.91 प्रतिशत दवाएं ही अमानक पाई गईं और महज 0.32 प्रतिशत दवाएं नकली या मिलावटी थीं.
विशेषज्ञों के अनुसार, किसी दवा के अमानक होने के पीछे हमेशा निर्माण की कमी ही एकमात्र वजह नहीं होती. कई बार दवा बनने के बाद गोदामों में सही तापमान न मिलना, गर्मियों में परिवहन के दौरान गर्मी से दवा का खराब होना, रिटेल दुकान पर रख-रखाव की गड़बड़ी, या फिर दो अलग-अलग जांच लैब्स के तरीकों में अंतर होने के कारण भी दवा के सैंपल टेस्ट में फेल हो जाते हैं. उद्योग जगत का कहना है कि वे इस 2.5 से 3 प्रतिशत की दर को भी और कम करने के लिए लगातार काम कर रहे हैं.
जांच में अमानक (NSQ) पाई गई प्रमुख दवाओं की सूची:
1) सायक्लोक्सन (सायक्लोफोस्फेमाइड टैबलेट्स आईपी 50 एमजी)
कंपनी का नाम: जाइडस लाइफ साइंसेज (Zydus Life Sciences)
राज्य जहाँ पाई गई: राज्य औषधि प्रयोगशाला (उत्तर प्रदेश/अन्य)
2) एनेस्थेटिक एंटासिड जेल (Anesthetic Antacid Gel)
कंपनी का नाम: फाइजर लिमिटेड (Pfizer Ltd)
राज्य जहाँ पाई गई: उत्तर प्रदेश (लखनऊ लैब)
3) मेटोक्लोप्रामाइड हाइड्रोक्लोराइड टैबलेट्स आईपी 10 एमजी
कंपनी का नाम: इप्का लैबोरेटरीज (Ipca Laboratories)
राज्य जहाँ पाई गई: राज्य औषधि प्रयोगशाला
4) लेवेटिरासेटम टैबलेट्स आईपी 500 एमजी
कंपनी का नाम: इंटास फार्मास्यूटिकल्स (Intas Pharmaceuticals)
राज्य जहाँ पाई गई: राज्य औषधि प्रयोगशाला
5) टेलमिसार्टन 40 एमजी और एम्लोडिपाइन 5 एमजी टैबलेट्स आईपी
कंपनी का नाम: ग्लेनमार्क फार्मास्यूटिकल्स (Glenmark Pharmaceuticals)
राज्य जहाँ पाई गई: राज्य औषधि प्रयोगशाला
6) सेफिक्साइम टैबलेट्स आईपी
कंपनी का नाम: अल्केम हेल्थ साइंसेज (Alkem Health Sciences)
राज्य जहाँ पाई गई: राज्य औषधि प्रयोगशाला
7) एमोक्सिसिलिन एंड पोटाशियम क्लैवुलनेट टैबलेट्स आईपी
कंपनी का नाम: अल्केम हेल्थ साइंसेज (Alkem Health Sciences)
राज्य जहाँ पाई गई: राज्य औषधि प्रयोगशाला
8) डिक्लोफेनाक सोडियम टैबलेट्स आईपी 50 एमजी (1 सैंपल)
कंपनी का नाम: केरल स्टेट ड्रग्स एंड फार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड (KSDP)
राज्य जहाँ पाई गई: केरल
9) टेलमिसार्टन टैबलेट्स आईपी 40 एमजी (2 सैंपल)
कंपनी का नाम: केरल स्टेट ड्रग्स एंड फार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड (KSDP)
राज्य जहाँ पाई गई: केरल
10) टेल्मा एएम (नकली/Spurious दवा)
कंपनी का नाम: अनधिकृत निर्माता (ग्लेनमार्क ब्रांड नाम का अनधिकृत इस्तेमाल)
राज्य जहाँ पाई गई: दिल्ली (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली)